ब्लड सेल तकनीक क्या है?

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रक्त सेल तकनीक क्या है?

 

रक्त सेल तकनीक क्या है?

क्या से बाँझपन पर विजय प्राप्त किया जा सकता है?

यदि आप सचमुच के बारे में जानना चाहते हैं तो,

आइए, इसके बारे में कुछ बेहतर तरीके से जानना प्रयास करें

एक ऐसी तकनीक के रूप में सामने आई है,

जिससे निराश और हताश वह दंपति भी खुश हो, 

जो आज की तारीख तक केवल और केवल निराश हैं

रक्त सेल तकनीक पहले ही यद्यपि हमारे घरों में,

 आई वी एफ तकनीक बांझपन को दूर करने वाला सौगज रूप में पहुंचा है

लेकिन अब हमारे बीच में,

 ब्लड तकनीक की तरह एक ऐसी तकनीक का नया विकल्प सामने आया है,

जिससे शादी की 30 साल बाद भी अगर कोई दंपति संतान सुख से वंचित हो,

 तो वह भी अब वंचित नहीं रह जाएगा

विशेषज्ञों का कहना है 


रक्त सेल तकनीक से बांझपन का इलाज हो सकता है।

इस बारे में विशेषज्ञों का कहना है कि आईवीएफ यानी टेस्ट ट्यूब बेबी कैंसर प्रभावी विकल्प हैं,

लेकिन कई मामले ऐसे भी देखे गए हैं, जहां यह तकनीक,

आईआईवी तकनीक में फेल हो गया है।

तब ऐसे विकट स्थिति में जो तकनीक का काम आता है उसी का नाम है रक्त सेल तकनीक।

कब होना चाहिए प्रभावी रक्त सेल तकनीक 

रक्त सेल तकनीक से बांझपन दूर हो सकता है

लेकिन हमें यह भी जानना आवश्यक है कि आखिर यह तकनीक क्या है

कब और कैसे प्रभावी साबित हो सकता है?

विशेषज्ञ बताते हैं कि,

महिला 

थिन इंडो मैट्रियम, एशिन मैन सिंड्रोम, पूवर ओवेरियन रिजर्व 

नामक बीमारी से पीड़ित हो या फिर

  पुरुष में लो स्पर्म काउंट या नील स्पर्म काउंट  हो तो यह पद्धति प्रभावी साबित हुई है।

यदि पुरुष में स्पर्म काउंट कम भी हो तो भी वह अपने बच्चे को इस तकनीक से मिल सकता है।

वि आईआईएफ से किस प्रकार भिन्न हैं रक्त सेल तकनीक 

आई वी एफ तकनीक और यह नवीनतम तकनीक अर्थात् रक्त कोशिका तकनीक में अंतर यह है कि आईवीएफ में अंडाणु या शुक्राणु में दिक्कत हो तो दोनों का लेब में निषेचन करके महिला की गर्भ को स्थानांतरित किया जा सकता है।

जब कोई व्यक्ति रक्त सेल तकनीक से बच्चा चाहता है तो उसे टेस्ट ट्यूब बेबी कराना कटीई जरूरी नहीं है। इस तकनीक में सामान्य प्रक्रिया से ही संतों को सुख प्राप्त होता है।

लखनऊ नवासी एक दंपति को बीस साल से संतान की तलाश है लेकिन उन्हें कुछ भी सफलता मिली नहीं।

जब उन्होंने इस तकनीक को आजमाया तो आज उनकी गोद भरा है यहां पर उनका नाम नहीं, बस उनका अनुभव ही शेयर हो सकता है

भारतीय स्टैम सेल सोसायटी के उपाध्यक्ष डॉ। पास्टर मिश्र ने अब तक 100 से ज्यादा महिला-पुरुष इसका लाभ उठाया है।

इस तरह से बाँझपन को मात देने वाला यह तकनीक सचमुच एक बड़न साबित हुआ है।

उद्धरण इस प्रकार है कि विज्ञानविदों की सावधानी पूर्वक लाभ ले जा सकते हैं और अपनी जान ढोंगी बाबा से भी बचा सकते हैं। यह न केवल, वह दर्द भी भुला दिया जा सकता है।

धन्यवाद

लेखक: के पी सिंह

28022018

 

 

 

 

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