लोक प्रिय बनें, मगर कैसे?

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लोकप्रिय बनें मगर कैसे? 

लोक प्रिय बनें,

मगर कैसे यह बेहद आम सवाल है। 

दोस्तों हम में से सब लोग लोकप्रिय बनना चाहते हैं।

शायद ही संसार में कोई ऐसा भी व्यक्ति हो जो लोकप्रिय न बनाना चाहता हो ।

सच्चाई यही है कि क्या राजा क्या रंक, सभी न केवल लोकप्रिय होना चाहते हैं बल्कि सबसे ज्यादा लोकप्रिय होना चाहते हैं ।

हर व्यक्ति अपने-अपने क्षेत्र में इस कदर प्रसिद्ध होना  चाहता है कि भले ही ,

इसके लिए उसे कुछ भी करना पड़े ।

जरा ठहर कर भी सोचिए 

संसार में कुछ ऐसे भी उत्साही लोग देखे गए हैं,

जो अपना नुकसान करने को भी तैयार हैं ,बस उन्हें कोई प्रसिद्ध होने का सर्टीफिकेट दे दे ।

सवाल उठता है कि क्या यह तरीका प्रसिद्ध पाने के लिए सही है,

कि हम अपना खुद का नुकसान भी कर लें प्रसिद्ध होने के लिए ?

जी नहीं ।

यह तरीका बिल्कुल सही नहीं है।

क्योंकि  इतिहास में जो भी लोकप्रिय लोग हुए हैं ,उन्होने इस तरीके को अपनाने के बारे मे कभी नहीं सोचा ।

लोकप्रिय लोग लोकप्रिय यूं ही नहीं बनें 

दोस्तों,लोक प्रिय बनें मगर कैसे यह एक अहम सवाल है ।

इसके जवाब तलाशने के पहले हमें कुछ और भी सोचना होगा ।

महान लोगों का एक खास गुण होता है और वह है बड़प्पन को बांटना ।

उनके सम्पर्क मे जो भी आता है ,वह उसे अपने आचार विचार से यह समझाने में सफल होते हैं,

कि उनके लिए आप का बेहद महत्व है ।

अर्थात महान लोग जिससे भी मिलते हैं ,

उसकी उतनी ही कदर करते हैं जितनी वह खुद अपने लिए वह उस नए मिलने वाले व्यक्ति से करते हैं ।

महान लोग किसी महानता की डिग्री को हासिल नहीं करते

लेकिन वह हर मनुष्य की वैल्यू जरूर करते हैं ।

फल स्वरूप उनके संपर्क में आने वाला हर व्यक्ति उन्हें श्रेष्ठ और महान माने बिना नहीं रह सकता ।

यही है लोकप्रिय बनने की पहली सीढी ।

लोक प्रियता की दूसरी सीढ़ी 

लोक प्रिय बनें मगर कैसे? इस सवाल का जवाब अर्थात दूसरी सीढी के रूप में आप ,

इसे ले सकते हैं कि लोकप्रिय लोग लगभग हर व्यक्ति को अपना समझते हैं ।

मेरा पराया के भाव से बहुत चिपके न होकर इससे बहुत दूर होते हैं ।

इसका परिणाम यह होता है कि लोग चाहकर भी उन्हें भूल नही पाते ,

और इस तरह उनकी लोकप्रियता आसमान की बुलंदियों की ओर बढ जाती है ।

लोक प्रिय बनने की ओर 

जी हां दोस्तों, महान लोग या लोकप्रिय लोग अपने फायदे के लिए किसी का नुकसान नहीं करते ,

बल्कि वह अपना घाटा कुबूल करके भी किसी दूसरे को कष्ट या क्षति पहुंचाने के बारे में कभी नही सोचते ।

हमारे इतिहास में सैकड़ों उदाहरण हैं ,

जिनके अनुसार जिन लोगों ने इस मिट्टी की दुनिया में अपनी पहचान को बनाए रखा है ,

वह आगे चल कर महान लोगों की श्रेणी में शामिल हुए ।

क्योंकि जो इस संसार के तीन तिकड़म से खुद को उबार नहीं पाते ,

उनका खुद का वास्तविक अस्तित्व मिटते देर नहीं लगती ।

सकारात्मक लोकप्रियता और दुनिया 

 

ध्यान देने की बात है ,आजकल दो तरह के लोग प्रसिद्धि पाते हैं ।

अथवा लोकप्रियता हासिल करते हैं ।

एक सकारात्मक लोग होते हैं तो दूसरे नकारात्मक लोग होते हैं ।

सकारात्मक लोग लोगों की पीड़ा खत्म करते हैं तो नकारात्मक लोग लोगों को हर हाल में पीड़ा देने की फिराक में रहते हैं ।

आप को यह भली-भांति जान लेना चाहिए कि आप सिर्फ सकारात्मक  आचरण से लोकप्रिय बनें तभी श्रेष्ठता है ।

वर्ना प्रसिद्ध तो वह बदमाश भी हो जाता है थोड़े दिन के लिए ,

जो किसी दिन पुलिस की गोली का शिकार भी हो जाता है ।

धन्यवाद

KPSINGH 09032018

 

 

12 COMMENTS

  1. प्रसिद्धि पाने के मूल मंत्र को बेहतर और सरल तरीके से समझाये हैं | सर मेरे विचार से अगर आपके लेखों को कोई नियमित रूप से पढ़कर अपने आचरण में अमल करे तो दुःचरित्र व्यक्ति भी चरित्रवान् बन सकता है |

  2. ईमानदारी कार्य के प्रति निष्ठा ओर बड़ो के लिए दिल से सम्मान सफल आदमी बनने के लिए सबसे जरूरी है बहुत सुंदर लेख है सर बताने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया

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