कौन है देश की पहली महिला ट्रक चालक? तथ्यों के आइने में

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कौन है देश की पहली महिला ट्रक चालक? Who is the country’s first female truck driver? तथ्यों के आइने में

दोस्तों सच बोलिएगा ,जब भी हम या आप किसी ट्रक चालक की कल्पना करते हैं तो बिना हिचक हमारे आप के मन मस्तिष्क में केवल और केवल किसी पुरुष चालक की ही तस्वीर उभर कर सामने आती है ।क्योंकि यह तथ्य हमारे मन में घर कर चुका है कि ट्रक जैसे भारी वाहन को सिर्फ पुरुष ही चला सकते हैं ।महिला चालक के नाम पर साइकिल, स्कूटी या कार चालक के रूप मे ही कोई महिला हमारे जेहन में फिट होती है ।सच कहें तो ट्रक चलाने की कल्पना हम किसी महिला के लिए कर ही नही सकते ।जब कि सच्चाई कुछ और ही है ।क्योंकि एक सत्य यह भी है कि समय और जरूरत किसी से कुछ भी करवा सकता है ।फिर चाहे वह ट्रक चलाना हो या फिर किसी रेलवे स्टेशन में कुली का काम ।हम यहां एक ऐसी ही तथ्यात्मक जानकारी आपको देना चाहते हैं जिसका विषय है भारत की पहली महिला ट्रक चालक की दास्तान ।

पुणे का तमाशा या हिम्मत की हकीकत 

जी हां दोस्तों ।पुणे वह शहर है जिसे भारत की पहली महिला ट्रक चालक की धरती होने का गौरव प्राप्त है ।क्योंकि यहां की रहने वाली ट्रक वाली बाई के नाम से विख्यात “सोरजी बाई “ही हैं भारत की पहली महिला ट्रक चालक ।यह इस कदर प्रसिद्ध हैं कि आप पुणे में कहीं भी हों बस ट्रक वाली बाई के नाम से इनके पास पहुंच सकते हैं ।जब भी सोरजी बाई किसी रास्ते से अपना ट्रक चलाते हुए निकलती हैं तो लोग इन्हें देखकर इनकी ओर इशारा करके बिना यह कहे नही रहते कि “देखो वह जा रही है ट्रक वाली बाई “।

सामान्य महिला से कैसे बनीं भारत की पहली महिला ट्रक चालक 

जैसा कि हर कहानी के पीछे भी एक छिपी दास्तान होती है ठीक इसी प्रकार सोरजी बाई की कहानी भी परत दर परत की कहानी है ।सच कहें तो सोरजी बाई की यह रोमांचक गाथा प्रारंभ होती है 1972 से जब उनके पति ढोंढी राम सतपुते सौराष्ट्र के एक गांव से निकलकर पुणे में अपने लिए रोजगार ढूढने आए थे ।सतपुते शुरुआत में बैलगाड़ी से बर्फ ढोने का काम करने लगे ।जबकि सोरजी बाई पास में ही एक बाग की रखवाली का काम करने लगीं ।सतपुते बर्फ को फैक्ट्री से बैलगाड़ी में लादकर दुकानदारों के पास पहुंचाते थे ।चूंकि काम ज्यादा था इसलिए काम समय से पूरा नही हो पाता था तो इन्होंने एक थ्री-व्हीलर लोन से ले लिया ।लेकिन जैसा इन्होने सोचा था वैसा नही हुआ ।

सिर मुड़ाते ही पड़े ओले 

जैसे ही सतपुते ने थ्री व्हीलर खरीदा वह बीमार पड़ गए ।बीमारी ऐसी की फिर उठने का नाम ही गायब ।इस स्थिति में सोरजी बाई किराए के ड्राइवर पर निर्भर रहने लगीं ।लेकिन कहते हैं कि जब कुछ बड़ा होना होता है तो संयोग बन जाया करते हैं ।हुआ यूं कि ड्राइवर रोज रोज मटरगश्ती करने लगा ।वह काम पर लेट आता ।और जब आता तो काम भी ठीक से नही करता तो सोरजी बाई दुखी होकर सोचने लगी कि वह खुद भी तो चला सकती है ।हालांकि पहले कभी ऐसा सपने में भी नहीं सोचा था लेकिन मजबूरी में न केवल सोचा बल्कि गम्भीरता से खुद चालक बनने की सोचने लगीं ।

ट्रक सीखने की समस्या और उसका इलाज 

बड़ी हिम्मत से जब एक दिन सोरजी बाई ने अपनी इच्छा बताई कि वह खुद चालक बनना चाहती है तो सतपुते मजाक समझने लगा लेकिन जल्द ही उसे एहसास हुआ कि यह मजाक नही था तो वह अपनी पत्नी को इस पथ की पथरीली सच्चाई बताने लगे ।लेकिन सीखना है तो सीखना है।सोरजी बाई का यह निश्चय उन्हें यह सोचने पर विवश कर दिया कि सोरजी बाई ट्रक चलाना सीखेगी ।

बैंक मे आई दिक्कत लेकिन छू मंतर भी हो गई 

चूंकि सोरजी बाई ट्रक चालक बनकर ट्रक के लिए पैसा चाहती थी ताकि वह खुद का ट्रक ले सके लेकिन मैनेजर इसके लिए तैयार नही हुआ ।उसने कहा क्या उलट-पुलट बात करती हो महिला और ट्रक चालक ?हम नही दे पाएंगे लोन ।लेकिन चूंकि सोरजी बाई ड्राइवर बनना ही चाहती थी इसलिए काफी हील हुज्जत के बाद जब मैनेजर को बात समझ में आई तो उसने लोन दे दिया ।इसी तरह पंजीकरण कार्यालय में भी कुछ सवाल जवाब हुए तब जाकर लाइसेंस प्राप्त हुआ ।यह सोरजी बाई के लिए सपना पूरा होने जैसा था ।शुरुआत में सोरजी बाई जहां से भी ट्रक लेकर जाती वहां भीड़ लग जातीथी ।

भारत की पहली महिला चालक की वर्तमान स्थिति 

आजकल बड़े आराम से सोरजी की जिंदगी चल रही है।जल्द ही कमाई करके उसने दूसरा ट्रक ले लिया है ।एक वह खुद चलाती हैं तो दूसरा ट्रक पति या किराए का ड्राइवर चलाता है ।हिम्मत की जीती जागती मिसाल सोरजी बाई पढी लिखी नहीं हैं फलस्वरूप शुरुआत में रोड में कुछ पढ नही पाती थीं ।लेकिन आज वह सब समझ लेती हैं ।थोड़ी बहुत प्रारंभिक जांच भी वह अपने ट्रक की कर लेती हैं ।वह किसी का विश्वास नही करतीं इस लिए मेंटिनेंस पर कोई समझौता नहीं करतीं ।

निष्कर्ष यह है कि छुई मुई समझे जाने वाली औरत के प्रति लोगों की धारणा बदल कर रख देने वाली सोरजी बाई केवल भारत की पहली महिला ट्रक ड्राइवर होने के नाते याद रखने की पात्र नहीं हैं बल्कि वह हिम्मत और जज्बे की जीती जागती मिशाल होने के नाते अनुकरणीय हैं ।

धन्यवाद

लेखक :के पी सिंह

22022018

 

 

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