कहां हुई थी सबसे घातक ओलावृष्टि ?

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कहां हुई थी सबसे घातक ओलावृष्टि? 

दुनिया की सबसे घातक ओलावृष्टि के बारे में जानने से पहले ,

आइए जानते हैं कि यह ओलावृष्टि क्या है?

वर्षण के फलस्वरूप हिम के कण यदि गोले बन जाएं,

जो 5 से 10 मिमी व्यास के हों तो इनके गिरने को ओलावृष्टि कहते हैं ।

सामान्यतः ये कपासी वर्षा मेघ के संघनन  से बनते हैं ।

सामानयतः ओलावृष्टि का निर्माण दो  विधियों से होता है ।

●भूतल पर गिरने वाली जल की बूंदे यदि ऐसी वायु में से गुजरती हैं ,

जिनका तापमान हिमांक से कम होता है तो जल की बूंदे जम जाती हैं ।

●ऊरधवाधर वायु धाराएं ऊपर उठते समय वर्षा की बूंदों को काफी उंचाई तक उछाल देती हैं ,

●और वायुमंडल के ऊपरी भागों में तापमान हिमांक से  कम  होने के कारण ये बूंदे जम जाती हैं ।

मुरादाबाद में हुई थी सबसे घातक ओलावृष्टि 

कहां हुई थी सबसे घातक ओलावृष्टि का जवाब है, मुरादाबाद ।

जी हां, दुनिया की सबसे घातक ओलावृष्टि को जब भी याद किया जाता है

तो सबसे पहले आने वाला नाम मुरादाबाद का है ।

संयुक्त राष्ट्र संघ और मौसम विज्ञान संगठन द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार

साल 1888 में उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में आज तक की सबसे घातक ओलावृष्टि हुई थी ।

प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से अफ्रीका व एशिया प्रशांत सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र हैं ।

आपदा जोखिम में कमी लाने के लिए दोनों संगठनों के नेतृत्व में मैक्सिको में अहम बैठक हुई है ।

भारत समेत करीब पांच हजार लोगों ने इसमें भागीदारी निभाई है ।

 बैठक से पूर्व विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने पहली बार ,

दुनिया की सबसे घातक  और भयावह मौसमी घटनाओं पर रिपोर्ट जारी की है ।

इसमें 1873 से लेकर अब तक आए सबसे भीषण ,

तूफान ,चक्रवात व अन्य मौसमी घटनाओं में हताहतों के आंकड़े हैं ।

दुनिया की सबसे भयावह मौसमी घटनाएं 

कहां हुई थी सबसे ज्यादा नुकसान करने वाली यानी घातक ओलावृष्टि ,

के साथ ही साथ यहां इस बात की भी चर्चा की जानी है कि ।

विश्व की और सबसे भयावह  मौसमी घटनाएं कब और कहां घटित हुई हैं अब तक ।

आइए इसी क्रम में जानते हैं कुछ ऐसी ही बिकराल मौसमी घटनाओं के बारे में, ,,,

ओलावृष्टि

30 अप्रैल 1888 को उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में आज तक की ,

सबसे घातक ओलावृष्टि हुई मानी जाती है ।

इसमें 246 लोगों की मौत हुई थी और 1600 मवेशी खेत रहे थे ।

एक एक ओले का आकार संतरे के बराबर था ।

ओले इतना अधिक थे कि दो फिट ऊंचाई पर यह जमीन में पड़े थे ।

आकाशीय बिजली

नवंबर 1994 में मिस्र के द्रोका क्षेत्र में ,

बाढ़ और तूफान के कारण बिजली गिरने से 469 लोगों की जान चली गई थी ।

चक्रवात

12/13 नवंबर 1970 को पूर्वी पाकिस्तान यानी बांग्लादेश में ,

दुनिया का सबसे घातक चक्रवात आया था ।

इसकी गति 185किमी प्रति घंटा थी ।इस तूफान का नाम ग्रेट भोला है ।

इसमें करीब 3 लाख लोगों की जान चली गई थी ।

आकाशीय बिजली से आग

23 दिसंबर 1975 को जिम्बाब्वे के मनिका ट्राइबल ट्रस्ट लैंड पर ,

एक झोपड़ी में बिजली गिरने से 21 लोगों की मृत्यु हुई थी ।

टारनेडो 

26 अप्रैल 1989 को बांग्लादेश के मानिक गंज क्षेत्र में उठे टारनेडो ने दो कस्बों को तबाह किया था ।

इसमें 1300 लोगों की जान चली गई थी ।और 80000 लोग बेघर हुए थे ।

धन्यवाद

लेखक के पी सिंह

24032018

 

11 COMMENTS

    • सर मैं मोबाइल यूजर्स हूं कम्प्यूटर पर मुझे आइडिया नहीं है ।

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