गोपाल दास नीरज तथ्यों के आइने में

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 गोपाल दास नीरज   तथ्यों के आइने में 

गोपाल दास नीरज तथ्यों के आइने में का पहला तथ्य यही है कि वे 

प्रतियोगियों की नजर में उतने ही ऊंचे हैं,

जितने ऊंचे वह पूरी दुनिया की नजर में हैं या फिर जितने ऊंचे होने चाहिएं।

लेकिन हम यहां इस पोस्ट में गोपाल दास नीरज जी का वर्णन 

प्रतियोगियों की नजर से करेंगे ताकि भविष्य में हम इनसे संबंधित 

किसी भी तथ्य से वंचित न रहें।

इसे आप तथ्यों  के आइने में गोपाल दास नीरज भी कह सकते हैं ।

जीवन की राहों में 

🔴गोपाल दास नीरज का वास्तविक नाम गोपाल दास सक्सेना था।

🔴इनका जन्म 4 जनवरी 1925 को उत्तर प्रदेश के इटावा जनपद के पुरावली गांव में हुआ था।

🔴इनकी मृत्यु 19 जुलाई 2018 को दिल्ली में हुई थी। 

🔴इनके पिता का नाम बाबू ब्रज किशोर सक्सेना था।

🔴नीरज जी चार भाइयों में दूसरे नंबर के थे। नीरज जी जब केवल छ:वर्ष के थे तभी इनके पिता की मृत्यु हो गई थी।

🔴गोपाल दास नीरज ने 1942 में एटा से हाई स्कूल किया था।

🔴नीरज जी कुछ दिन इटावा कचहरी में टाइपिस्ट रहे थे। जब आर्थिक तंगी कम न हुई तो सिनेमा घर की दूकान पर भी नौकरी की  ।

🔴बहुत दिनों तक भटकने के बाद दिल्ली में सप्लाई विभाग में टाइपिस्ट बनाए गए।

🔴इसके बाद कानपुर के डीएवी कालेज में टाइपिस्ट बने।

🔴बाल्कट ब्रदर्स नामक कंपनी में पांच साल टाइपिस्ट रहे  ।

फिर बदली किस्मत 

 

🔴काफी ज्यादा यायावर जीवन जीने के बाद इन्हें 1955 में मेरठ कालेज में हिन्दी का प्रवक्ता चयन किया गया।

🔴बाद में इन्होने प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे दिया था।

🔴मेरठ के बाद ये अली में धर्म समाज कालेज में हिन्दी विभाग के प्राध् बने।

🔴नीरज जी फिल्मों में भी गीत लिख कर नाम कमाया है ।

🔴इन्हें हिन्दी फिल्मों में गीत लिखने के लिए पहला मौका 8 फरवरी 1960 को,

आर के चंद्रा ने अपनी फिल्म “नई उमर की नई फसल ” में दिया था।

🔴1964 में नीरज स्थाई रूप से मुम्बई पहुचे थे। यहां इन्होंने फिल्मी गीत लिखकर अपना डंका बजा दिया।

🔴कारवां गुजर गया,, ,  जैसा प्रसिद्ध गीत यहीं रहकर लिखा था।

लेकिन 8 साल बाद यानी 1972 में इन्होंने मुंबई को अलविदा कह दिया था। 

जलाओ दिये पर रहे ध्यान इतना 

🔴जलाओ दिये पर रहे ध्यान इतना अंधेरा धरा पर कहीं रह न जाए  यह नीरज की प्रसिद्ध कविता है ।

🔴मुम्बई से इनके वापस आने की मुख्य वजह यह थी कि इनके लिखे गीत तो हिट थे लेकिन इनकी फिल्में फ्लॉप हो रही थीं ।

🔴मुम्बई से वापस नीरज अलीगढ़ आए और यहीं कवि सम्मेलन में भाग लेते रहे,

9 जून 2018 को हाथरस में हुआ कवि सम्मेलन इनका आखिरी कवि सम्मेलन था ।

🔴नीरज की कविताओं में 20 से ज्यादा शोध हो चुके हैं।

🔴नीरज ने दर्जनों विदेशी कवि सम्मेलन में भी भाग लिया था।

पहला विदेशी सम्मेलन नेपाल था।

🔴अमेरिका,  इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया में भी नीरज काव्य पाठ कर चुके थे। 

नीरज का फिल्मी सफर 

तथ्यों के आइने में गोपाल दास नीरज से संबंधित अगला तथ्य यह है,

🔴कि कवि नीरज का फिल्मी सफर बेहद छोटा रहा है ।

वह 1964 में मुंबई गए और 1972 में वापस अलीगढ़ आ गए थे ।

🔴फिल्मी लेखन हलांकि इसके बाद भी जारी रहा था।

🔴नीरज ने जिन हस्तियों के लिए काम किया वे इस प्रकार हैं राजेश रोशन, शंकर जय किशन  एस डी बर्मन  इकबाल कुरैशी  जय देव  हेमंत कुरैशी, देवा नंद, राज कपूर, मनोज कुमार आदि।

इनकी चर्चित फिल्में हैं नई उम्र की नई फसल  कन्या दान प्रेम पुजारी मेरा नाम जोकर चंदा और बिजली  चाचाचा, आज और कल छुपा रुस्तम शर्मीली पहचान फरेब आदि।

मेरा नाम जोकर का गाना, “ए भाई देखकर चलो,,, ,  “बेहद सफल गीतों में एक है । 

नीरज को मिले अलंकार 

तथ्यों के आइने में गोपाल दास नीरज का एक तथ्य यह भी है,कि

🔴 इन्हें हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग ने 1991में साहित्य वाचस्पति पुरस्कार दिया था।

🔴विद्या वाचस्पति पुरस्कार 1995 में इन्हें विक्रम शिला हिन्दी विद्या पीठ ने दिया था ।

🔴1996 में बी आर अम्बेडकर विवि आगरा ने तथा 2007 में लखनऊ विवि ने इन्हें डी लिट की मानद उपाधियाँ प्रदान की थी।

🔴1974 में टैगोर वाचस्पति पुरस्कार टैगोर सोसाइटी जयपुर ने दिया था।।

🔴1994 में यश भारती एक लाख राशि का उत्तर प्रदेश सरकार ने दिया ।

🔴आलमी उर्दू कॉन्फ्रेंस दिल्ली 1981 में प्राप्त किया।

🔴1990 उत्तर प्रदेश हिन्द संस्थान  से परस्कृत। 🔴हिन्दी, उर्दू अकादमी लखनऊ से सम्मानित 1990।

🔴हिन्दी गौरव सम्मान 2004 लखनऊ उत्तर प्रदेश।

गीत गंधर्व  , गीत सम्राट गीत कौस्तुभ  गीत ऋषि, धरती तिलक

आदि उपाधियों से भी यह लैस थे।

गोपाल दास नीरज तथ्यों के आइने में कुछ इसी तरह हमको आपको दिखते हैं । 

नीरज की कृतियां 

गोपाल दास नीरज तथ्यों के आइने में अपने रचना संसार में कुछ इस तरह से दिखते हैं। 

🔴नदी किनारे (पूर्व नाम संघर्ष )

🔴लहर पुकारे (पूर्व नाम अंतर धनि)

🔴बादर बरस गयो(पूर्व नाम विभावरी)

🔴प्राण गीत

🔴दर्द दिया है।

🔴नीरज की पाती,

🔴दो गीत,

🔴मुक्तकी

🔴आसावरी

🔴गीत अगीत तुम्हारे लिए नीरज की गीतिकाऐ वंशी वट सूना है नीरज रचना वली 3खंड नीरजा दोहावली

🔴नीरज ज्योतिष दोहा वली

🔴शुक्र नाड़ी ज्योतिष दोहावली

🔴नीरज के प्रेम गीत

🔴बादलों से सलाम लेता हूँ।

🔴कुछ दोहे नीरज के, कारवां गुजर गया,

🔴तुम्हारे लि

🔴 फिर दीप जलेगा

🔴गीत जो गाए नहीं🔴ह शलोक प्रिय गीतकार नीरज

🔴आधुनिक हिन्द कवि नीरज

🔴पंत कला काव्य और दर्शन

🔴नील पंखी

🔴लिख लिख भेजत पाती।

लय   गीतकार, बच्चन :यात्री अग्निपथ का, हिन्दी के विरह गीत, हिन्दी रूबाइयां हिन्दी के श्रृगार गीत का सम्पादन भी किया है ।

गोपाल दास नीरज तथ्यों के आइने कुछ इसी तरह चमकते हैं। 

धन्यावाद KPSINGH 20072018

 

 

 

 

 

 

 

 

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