तथ्यों के आइने में गौतम बुद्ध

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तथ्यों का आइने में गौतम बुद्ध 

परिचय

●तथ्यों का आइने में बौद्ध धर्म का तात्पारी यह है कि हम यहां पर,

●विश्व प्रसिद्ध इस धर्म के बारे में जो कुछ भी जानते हैं वह सब कुछ तथ्यों में ही होगा

●बौद्ध धर्म के संस्थापक महात्मा बुद्ध थे

●गौतम बुद्ध वर्धमान महावीर के समकालीन माने जाते हैं।

●मौर्य शासक सम्राट अशोक के रुममान देई अभिलेख से यह जानकारी मिलती है कि,

●गौतम बुद्ध का जन्म कपिल वस्तु के पास नेपाल की तलवार में स्थित लम्बिनी ग्राम में हुआ था।

गौतम बुद्ध का जन्म

● गौतमबुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व में हुआ था।

● गौतम बुद्ध के पिता शारदाण शाक्य गण के प्रधान थे।

●माता महा माया  कोयाली वंश की कन्या थीं ।

● गौतम बुद्ध का बचपन का नाम सिद्धार्थ था।

● इनके जन्म के कुछ दिन बाद ही उनकी मां की मृत्यु हो गई थी।

●अतः इनका लालन पालन इन की मौसी प्रजापति गौतमी ने किया था।

● इनका विवाह 16 साल का अल्पायु में शाक्य कुल की कन्या यशोधरा के साथ हुआ था।

● उत्तरी कैलीन बौद्ध ग्रंथों में यिशोधरा के अन्य नाम गोपा, बिम्बा, भदकचछना आदि मिलते हैं।

● गौतम बुद्ध का बेटे का नाम राहुल था

●गौतम बुद्ध के जीवन में चार दृश्यों का प्रभाव पड़ा जो था:

●वृद्ध और बीमार व्यक्ति, मृतकों और प्रसन्नचित्त सन्यासी

उपरीकुत्त चार दृश्य देखे जाने के बाद इनके मन में वैराग्य भाव पैदा हो गए।

इन समस्याओं के समाधान के लिए सिद्धार्थ ने पत्नी और बच्चे को सोते हुए घर छोड़ दिया

गृह त्याग के समय गौतम बुद्ध की उम्र 29 साल का था।

बौद्धों में गृह त्याग को महाभािनिष्करण कहा जाता है।

आंतरिक अशांति

गौतम बुद्ध का पहला मुलाकात सन्ख्या दर्शन के आचार्य आलार कलम से वैशाली के पास हुआ।

यहीं पर गौतम बुद्ध ने तपस्या की लेकिन उन्हें शांति नहीं मिली।

यहां से गौतम बुद्ध निकल गए और राजघरे के पास रहने वाले रुद्रक रामपुत्र के पास पहुंचे।

यहां से गौतम बुद्ध फिर उरुवेला यानी बोध जा चुके हैं।

यहां पर 6 साल की कड़ी मेहनत के बाद 35 वर्ष की आयु में वैशाख पूर्णिमा की रात को एक पीपल के पेड़ के नीचे ये ज्ञान प्राप्त हुआ।

ज्ञान प्राप्ति के बाद

इस ज्ञान की प्राप्ति के बाद इनका नाम बुद्ध हो गया।

बुद्ध का एक और नाम है तथागत जिसका अर्थ है “सत्य है ज्ञान का”

शाक्य कुल में जन्म के कारण इन्हें शाक्य मुनी भी कहते हैं।

बुद्ध धर्म का प्रचार

ज्ञान प्राप्ति के बाद गौतम बुद्ध ने अपनी राय प्रचार शुरू किया।

उरुवेला में वे सबसे पहले श्रृषी पत्तन यानी सारनाथ वाराणसी पहुंचे।

यहां पर उन्होंने पांच ब्राह्मण सन्यासी को अपनी पहली उपदेश दिया।

यह पहला उपदेश को धर्म चक्र प्रवर्तन कहा जाता है।

वर्षा ऋतु में गौतम बुद्ध किसी एक जगह पर निवास करते थे

बाकी समय वे घूम घूमने के लिए अपने वोट प्रचार करते थे

सनातन से बुद्ध वाराणसी गए जहां यश नामक एक धनी परशुती पुत्र को अपनी शिष्य बनाया।

वाराणसी से गौतम बुद्ध मेढग के राजधानी राजगृह पहुंचे

राजघर में इन्हें द्वितीय, तीसरा, चौथा वर्षाकाल व्यय किया था।

मगध के राजा बिंब सार में इनके निवास के लिए वेलुवन नामक एक महा विहार बन वाया।

राजघाट में रहते हुए बुद्ध ने अपने घर नगर में भी कपिल वस्तु की यात्रा की थी, जहां अपने परिवार के सभी लोगों को दीक्षित किया।

राजघरा के बाद ये वैशाली पहुंचा

वैशाली में इनका निवास कुटाग शाला में था

यहां पर वैशाली की नगर बड़ू आम्रपाली भी उनकी चतुर बनी

ज्ञान प्राप्त करने के 8 साल बाद शिष्य आनंद के कहने पर उन्होंने संघ में महिलाओं को प्रवेश दिया था।

बुद्ध का मौसी संघ में प्रवेश करने वाला पहला थां

गौतम बुद्ध का उपदेश

गौतम बुद्ध का पहला उपदेश धर्म चक्र प्रवर्तन कहता है।

उनकी यह उपदेश दुख, दुख के कारण, और उसके समाधान से संबंधित हैं

यह चार आर्य सत्य कहता है।

ये हैं दुख, दुख का कारण, दुख निरोधक, दुख की रोकथाम प्रतिपदा।

बुद्ध अपनी मत या विचार को मध्यमा प्रतिपदा कहते हैं।

बुद्ध के अनुयायी दो भागों में बन्ते थे

भिक्षु भक्षी, उपासक उपासिका

सामान्य मनुष्य के लिए बुद्ध ने धर्म का उपदेश दिया उसे उपासक धर्म कहा जाता है।

बौद्धधर्म का त्रि रत्न है बुद्ध, दम्मा, संघ

महात्मा बुद्ध की मृत्यु 80 वर्ष की अवस्था में 483 ईसापूर्व मल्ल गणराज्य की राजधानी कुशीनारा में हुआ।

यह महान परिश्रम कहलाता है।

गौतम बुद्ध ने अपना अंतिम उपदेश सुभचछ को दिया था।

धन्यवाद

लेखक:

के पी सिंह “किर्तीखेड़ा”

07032018

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