भारत के महान व्यक्तिव

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भारत के महान व्यक्तिव फैजी व डीडी कर्वे 

भारत के महान व्यक्तिव फैजी व डीडी कर्वे में

अगर हम पहले फैजी की बात करें,

तो फैजी का मूल नाम शेख अबुल फजल था।

फैजी फारसी के प्रकांड पंडित कहे जाते हैं।

शायद सभी लोग जानते होंगे कि श्रीमान फैजी

अकबर के राज कवि पद पर आसीन थे।

फैजी का जन्म 24 सितम्बर 1547 को आगरा में हुआ था।

वह शेख मुबारक के सबसे बड़े पुत्र थे।

यह अबुल फजल के बड़े भाई थे ।

अबुल फजल को शायद ही कोई न जानता हो

क्योंकि भारत के महान व्यक्तिव

फैजी के भाई अबुल फजल ने विश्व विख्यात ग्रंथ

अकबर नामा

की फारसी में रचना की थी।

फैजी ने अपने पिता शेख मुबारक से शिक्षा दीक्षा प्राप्त की थी ।

शेख मुबारक स्वयं फारसी भाषा का तथा इस्लामी

धर्म शास्त्र का विद्वान थे।

1567 में अकबर ने फैजी को अपनी सेवा में लिया था।

अकबर फैजी के ज्ञान से इतना प्रभा था कि उसने फैजी को 

राजकुमारों की शिक्षा का दायित्व ही सौंप दिया था।

कहते हैं कि फैजी और अबुल फजल ने ही अकबर

को धार्मिक रूप से

इतना उदार व सहनशील बनाया था।

फैजी का निधन 5 अक्टूबर 1595 को लाहौर में हुआ था।

🔴फैजी ने अकबर के शासन काल में विभिन्न उच्च प्रशासनिक पदोंपर कार्य किया था।

🔴1581 में फैजी को आगरा, कालपी कालिंजर का सदर नियुक्त किया गया था 

🔴मलिक उश शुअरा यानी राज कवि पद पर

अकबर ने फैजी को 1588 में स्थापित किया था।

🔴फैजी ने महान गणितज्ञ भास्कराचार्य द्वारा

संस्कृत में लिखे गए ग्रंथ लीलावती का फारसी में

अनुवाद किया था।

🔴तसबीर अल सुबह फैजी का कविता संग्रह है।

🔴नालओ दमन, मरकज ए अदवार  सुलेमान ओ बिलकीस,

हफ्तकिश्वर फैजी की अन्य रचनाएँ हैं ।

भारत के महान व्यक्तिव फैजी व डीके कर्वे सचमुच अतुलनीय हैं। 

डीके कर्वे 

भारत के महान व्यक्तिव डीडी कर्वे का पूरा नाम

धोन्धो केशव कर्वे था।

स्वतंत्रता के पूर्व पुनर्जागरण युग के यह महान

समाज सुधारक व शिक्षाविद थे।

इन्होंने महाराष्ट्र की राष्ट्र वाद, समाज सुधार, धर्म सुधार,

आदि की उर्वर जमीन में जन्म लिया था ।

इन्होंने स्त्री शिक्षा के लिए तथा स्त्री सशक्तिकरण

के लिए बहुत कार्य किया है ।

महाराष्ट्र में विधवा पुनर्विवाह आंदोलन से जुड़े

समाज सुधारकों में डीके कर्वे अग्रणी रहे हैं।

डीके कर्वे को अन्ना कर्वे तथा महर्षि के नाम से भी जाना जाता था।

कर्वे का जन्म 18 अप्रैल 1858 को महाराष्ट्र के रत्नागिरी में

एक निम्न मध्यम वर्गीय चित्त पावन ब्राह्मण परिवार में हुआ था।

इनके पिता का नाम केशव बापन्ना कर्वे था ।

कर्वे ने मुम्बई के विल्सन कालेज से इंटरमीडिएट किया था।

बाद में एलफिन्सटन कालेज से गणित में स्नातक किया।

1891 में ये  पूना मुम्बई में फार्ग्यूशन कालेज में गणित के अध्यापक बने थे।

यहां वह 1914 तक अपनी  सेवाएं देते रहे थे।

 समाज में महििलाओं की दशा से अक्सर चिंतित रहते थे।

इसी लिए उन्होंने समाज में स्त्री हित सम्बंधित कार्य प्रारंभ किया।

वह खासकर महिला शिक्षा के लिए विशेष प्रयासरत रहते थे।

उन्होंने रमाबाई पंडिता और ईश्वर चंद्र विद्यासागर से प्रेरणा ली थी।

भारतीय समाज में विधवा पुनर्विवाह को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से

कर्वे ने 1893 में विधवा पुनर्विवाह संघ की स्थापना की थी।

अपनी पत्नी के गुजर जाने के बाद 1893 में इन्होंने एक विधवा से विवाह किया था।

9 नवम्बर 1962 को मुंबई में इनका निधन हुआ था ।

🔴1893 में कर्वे ने विधवा पुनर्विवाह संघ की स्थापना की थी 

🔴1896 में कर्वे ने पुणे में हिन्दू विधवा गृह संगठन की स्थापना की थी ।

🔴इस संगठन का उद्देश्य निराश्रित महिलाओं को आश्रय और शिक्षा देना था  ।

🔴1907 में इन्होंने महिला विद्यालय की स्थापना की थी।

🔴1908 में इन्होंने निष्काम कर्म मठ की स्थापना की थी।

🔴1916 में पुणे में इन्होंने भारत का प्रथम महिला विश्व विद्यालय आरंभ किया था ।

🔴इस विश्व विद्यालय का 1920 में इन्होने नाम बदलकर

“श्रीमती नत्थीबाई दामोदर ठाकरसे भारतीय महिला विश्वविद्यालय” कर दिया था।

🔴1936 में इसे पुणे से बम्बई स्थानांतरित कर दिया गया था।।।

🔴कर्वे को 1958 में भारत रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया था ।

🔴कर्वे ने अपनी दो आत्मकथाएं लिखी हैं मराठी में आत्मव्रत तथा अंग्रेजी में Looking Back लिखी है ।

भारत के महान व्यक्तिव फैजी व डीके कर्वे वास्तव में अतुलनीय हैं। 

 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 30072018

 

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