मैं हूं भौतिक विज्ञान

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मैं हूं भौतिक विज्ञान 

मैं हूं भौतिक विज्ञान , लोग मुझे भौतिकी अथवा फिजिक्स भी कहते हैं।

लेकिन मैं आपको अपने बारे में कुछ भी और बताऊं मैं चाहती हूं,

कृपया आप पहले हम सब की जननी यानी विज्ञान के बारे में जानने का प्रयास करें ।

इसका फायदा यह होगा कि आप मुझे न केवल वास्तविक रूप से,
भली-भांति जान पाएंगे बल्कि
मैं आज संसार को क्या दे रही हूं उसे भी आप बेहतर ढंग से जान पाएंगे ।
तो आइए बिना देर किए आज ही सबसे
पहले जानते हैं कि आखिर विज्ञान किसे कहते हैं?

विज्ञान किसे कहते हैं 

दोस्तों, अगर आप सचमुच  ही यह जानना चाहते हैं कि आखिर,

विज्ञान किसे कहते हैं तो आप बनें रहें मेरे लेख में।

मुझे विश्वास है, कि आप को आपके ही सवाल का जवाब जरूर मिलेगा। 

 

भौतिक जगत की परिघटनाओ, प्रक्रियाओं, पदार्थों,एवं उनके गुणों के सम्बंध में प्रेक्षणो द्वारा स्थापित सुव्यवस्थित व क्रमबद्ध ज्ञान ही विज्ञान है ।

इसे और सरल भाषा में कुछ इस तरह भी कहा जाता है ” वास्तविक अनुभवों या प्रयोगों एवं परीक्षणों से प्राप्त तथ्यों के तार्किक विश्लेषण द्वारा विकसित हुए सुव्यवस्थित ज्ञान को विज्ञान कहते हैं

विज्ञान विभेद

 

हम विज्ञान को प्रमुख रूप से तीन भागों में विभाजित कर सकते हैं ।

ये भाग हैं प्राकृतिक विज्ञान, औपचारिक विज्ञान, सामाजिक विज्ञान ।

यहां हमें यह भी समझना होगा कि इन तीन प्रमुख भागों के भी अंदर कुछ भाग होते हैं जैसे प्राकृतिक विज्ञान में भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान का अध्ययन किया जाता है तो वहीं औपचारिक विज्ञान में गणित तथा तर्क शास्त्र का अध्ययन किया जाता है ।

इसी प्रकार सामाजिक विज्ञान में मानव व्यवहार तथा समाज का अध्ययन किया जाता है ।

प्राकृतिक विज्ञान और हम

आपने भली-भांति यह जान लिया है कि मैं भौतिक विज्ञान मुख्य रूप से प्राकृतिक विज्ञान का हिस्सा हूं ।

प्राकृतिक विज्ञान विज्ञान की वह शाखा है जिसमें प्राकृतिक परिघटनाओ का विवरण ,व्याख्या, भविष्य कथन अवलोकन एवं अनुभव जन्य साक्ष्यों के आधार पर आधारित होते हैं ।

वास्तव में विज्ञान शब्द का प्रयोग प्राकृतिक विज्ञानों के लिए ही किया जाता है।

प्राकृतिक के मुख्य तीन भाग हैं ।

भौतिक, रसायन, जीव विज्ञान ।मेरा संपूर्ण अस्तित्व यानी भौतिक विज्ञान का संपूर्ण अध्ययन  इसी प्राकृतिक विज्ञान के तहत ही किया जाता है ।

मैं हूं भौतिक विज्ञान 

मुझे लोग फिजिक्स कहते हैं ।यह शब्द ग्रीक भाषा से लिया गया है ।जिसका अर्थ है प्रकृति या प्राकृतिक वस्तुएं ।अध्ययन की सुविधा के लिए विद्वान लोगों ने मुझे कुल 8भागो में बांटा है ।ये भाग इस प्रकार हैं :यांत्रिकी Mechanics ध्वनि sound ऊष्मा Heat प्रकाश light विद्युत Electricity चुम्बकत्व magnetism आधुनिक व परमाणु भौतिकी modern and atomic physics इलेक्ट्रॉनिकी Electronicsआदि ।हमारी देववाणी यानी संस्कृत में भी मेरा वर्णन है ।संस्कृत में प्रयुक्त भौतिक शब्द ही मेरी पहचान है ।

भौतिक विज्ञान के पिता कौन हैं ? Who is the father ofphysics?

जहां तक बात मेरे जन्मदाता की है तो विद्वानों ने यह दर्जा सर आइजक न्यूटन को दिया है ।सर आइजक का जन्म 4जनवरी 1643 को लिकनशायर इंग्लैंड में हुआ था ।न्यूटन ने ही गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत दिया था ।उन्होंने ही बताया था कि पृथ्वी प्रत्येक वस्तु को अपनी तरफ खींचती है ।

उन्होंने यह भी बताया था कि सूर्य के प्रकाश में सात रंग होते हैं ।

अवकल गणित का आविष्कार व प्रकाश के कणिका सिद्धांत का प्रतिपादन उन्होंने ही किया था ।इन्ही महत्वपूर्ण खोजों के कारण उन्हें भौतिकी का जन्मदाता कहा जाता है ।

भौतिक विज्ञान की महत्वपूर्ण शाखाएं : Important branches of physics:

जहां तक मेरी शाखाओं की बात है तो इनका परिचय इस तरह है।ऊष्मागतिकी,प्रकाशिकी, ध्वनि तरंग, विद्युतकी, चुम्बकत्व विद्युत चुम्बकत्व, माप विज्ञान, परमाणु भौतिकी, खगोलिकी  नाभिकीय भौतिकी, रेडियोलाजी , मेटोलाजी, मेटलरजी, कीमोमेटरिकस, एपीगरैफी एसटरोनाटिकस   सर्वाधिक महत्वपूर्ण शाखाएं हैं जिनके बगैर आप मेरी यानी भौतिकी की कल्पना भी नही कर सकते हैं।

भौतिक विज्ञान ने संसार को क्या दिया है?  What has physics given to the world?

जाहिर है यह सवाल आपके मन में काफी देर से रहा होगा तो मैने सोचा मैं आपको खुद ही बता दूं कि मैने संसार को आजतक क्या क्या दिया है ।तो भाइयो बहनों मैने संसार को कुछ ऐसे मात्रक दिए हैं जिनके प्रयोग से ही आप इतना कुछ जानते हैं ।सच कहूं तो प्रकाश वर्ष, पारसेक,ऐंगस्ट्राम, खगोलिकी मात्रक, सौर दिवस, फैदम, समुद्री मील यह सब मेरी ही देन हैं ।इसे इस तरह भी समझा जा सकता है कि यदि संसार को मैंने जूल ,न्यूटन, अर्ग न दिए होते तो क्या होता ।

आप के दूध नापने के लिए लीटर, कपड़ा नापने के लिए मीटर और समय की नाप जोख के लिए सेकंड मैने ही दिए हैं वर्ना सोचिए क्या हम कभी समय से काम कर पाते?

निष्कर्ष यही है कि आज का मानव प्रगतिशील है ।वह दिन प्रतिदिन विकास के नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है और उसके इस काम में मेरा सदैव योगदान रहता है ।

आंखों मे नजर का चश्मा हो या रेडियो, टीवी, टेलीफोन, फोटोग्राफी, सिनेमा, मौसम की जानकारी कृत्रिम उपग्रह, सौर ऊर्जा, सौर चूल्हा, सौर बैट्री, चांद औरमंगल की ऐतिहासिक यात्रा सभी में मेरा योगदान है ।

जिसे आप चाहते हुए भी कभी भूल नही सकते ।

धन्यवाद

KPSINGH 23022018

 

 

 

 

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