रामानुज और कालिदास

2
16

 

   रामानुज और   कालिदास 

भारत के महान व्यक्तिव रामानुज और  कालिदास एक

नहीँ बल्कि अनेकों में एक हैं। 

भारत में महान व्यक्तिव रामानुज और कालिदास इन सभी

के बारे में एक साथ

यद्यपि बताना संभव नहीं है,फिर भी हमारी कोशिश है

कि हम आपको

भारत के महान व्यक्तिवों के बारे में अधिक से अधिक

संख्या में बता सकें।

जी हां. दोस्तों  भारत के महान व्यक्तिव के क्रम में जो

आज के हमारे भारत के महान व्यक्तिव हैं,

उनका विस्तृत वर्णन इस प्रकार है :

आचार्य रामानुज 

भारत के महान व्यक्तिवों में रामानुज प्रथम श्रेणी में

आते हैं।

भारत के महानतम महान व्यक्तिव में शामिल

आचार्य रामानुज की गणना भारत में भक्ति आंदोलन

के प्रमुख आधार स्तंभ के रूप में की जाती है ।

आचार्य रामानुज का जन्म तमिलनाडु के तिरु में 1017 ई में हुआ था।

संपूर्ण भारत के विभिन्न भागों का भ्रमण करने के

पश्चात वह श्री रंगम में निवास करने लगे थे ।

उन्होंने दक्षिण  भारत में भगवान् विष्णु के रूप में

भगवान् के एकत्व का प्रसार किया ।

उनकी शिक्षाओं का मूल उद्देश्य पूर्ण एकत्ववाद तथा

विशुद्ध अद्वैत वाद का खंढन करना था।

तथा उनके

मायावाद सिद्धत को अस्वीकार करना था।

भारत के महान व्यक्तिव रामानुज ने सगुण ईश्वर की उपासना पर बल दिया,

तथा वेदांत दर्शन के माध्यम से भक्ति का मार्ग दिखाया। 

भारत के महान व्यक्तिवों में शामिल रामानुज  के

मतानुसार भक्ति एवं प्रपत्ति से प्रसन्न ईश्वर स्वयं मोक्ष

प्रदान करता है।

रामानुज ने अपना संपूर्ण जीवन भक्ति एवं उपासना में

व्यतीत किया था।

इनका निधन 1137 ई में हुआ था ।

🔴रामानुज ने विशिष्टाद्वैत मत का प्रतिपादन किया था।

इसका अर्थ है ब्रह्म अर्थात ईश्वर

अद्वैत होते हुए भी जीव तथा जगत की शक्तियों द्वारा विशिष्ट है।

🔴वह मुक्ति प्राप्ति के लिए ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण

में विश्वास रखते थे ।

🔴इन्होंने निर्गुण ईश्वर के विश्वस को ननकारा है।

🔴निम्बार्काचार्य भक्ति आंदोलन के एक अन्य प्रमुख संत हुए हैं

जो रामानुज से कई वर्ष छोटे थे लेकिन समकालीन थे।

 

 

महाकवि कालिदास जी 

भारत के महान व्यक्तिव में अगर आप कभी सबसे

महान की खोज करें

तो आपको ज्यादा नहीं चंद नाम ही मिल पाएंगे जिन्हें आप सच्चे

अर्थों में भारत के महानतम व्यक्तिव कह सकते हैं ।

 

इस छोटी सी लिस्ट में भी भारत के लोग

जिस महान व्यक्तिव को नहीं भूल सकते

वह नाम है कालिदास जी का।

कालिदास जी  को हम संस्कृत के महानतम

शेक्सपियर भी कह सकते हैं।

कालिदास जी संस्कृत भाषा के महानतम साहित्यकार माने जाते हैं।

कालिदास जी के जीवनकाल के बारे में कुछ मतभेद हैं।

बावजूद इसके अधिकतर विद्वान इस बात से सहमत हैं

कि कालिदास जी का जीवन काल

चंद्र गुप्त द्वितीय के समय का है।

कालिदास चंद्र गुप्त द्वितीय के दरबारी कवि थे।

मेघदूत, अभिज्ञान शाकुंतलम  मालविकाग्निमित्रम

तथा कुमार संभव कालिदास की महान साहित्यिक

रचनाएं हैं।

🔴ऋतु संहार कालिदास की प्रथम रचना मानी जाती है। 

🔴मेघदूत कालिदास द्वारा रचित खंड काव्य है।

जो पूर्व मेघ तथा उत्तर मेघ नामक दो भागों में विभक्त हैं ।

मेघदूत वियोग श्रृंगार से सुसज्जित कालिदास की उत्कृष्ट रचना है।

🔴कुमार संभव तथा रघुवंश कालिदास द्वारा रचित महा काव्य हैं।

🔴कुमार संभव 17 सर्गों मे विभाजित महाकाव्य है ।

इसमें भगवान् शिव तथा माता पार्वती के पुत्र कार्तिकेय

की कथा है।

🔴रघुवंश 19 सर्गों में विभाजित कालिदास का

सर्वश्रेष्ठ महाकाव्य है।

इसमें राजा दिलीप से लेकर अग्निवर्ण तक कुल 40

इच्छ्वाकु वंशी राजाओं की कथा है।

सभी राजाओं का जीवन चरित्र बेहद उत्कृष्टता से

वर्णित है।

यहां कालिदास की उच्च कोटि की साहित्यिक

सजीवता के दर्शन होते हैं।

🔴मालविकाग्निमित्रम कालिदास द्वारा लिखित 

प्रथम नाटक है  यह नाटक पांच अंको में विभाजित है।

इसमें शुंग नरेश अग्निमित्र तथा रानी की सेविका

मालविका की प्रणय कथा वर्णित है।

भारत के महान व्यक्तिव एक नहीँ अनेकों हैं पर भारत

के महान व्यक्तिवों में रामाानु व कालिदास अनुपम हैं। 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 06082018

 

2 COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here