शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्ला खान

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       शहनाई वादक           उस्ताद बिस्मिल्ला                   ख़ान 

शहनाई  वादक उस्ताद बिस्मिल्ला खान भारत रत्न से सम्मानित,

वह व्यक्ति हैं,जो भारत की शान हैं।

हिन्दू मुस्लिम या किसी भी प्रकार की तीन पांच या तिकड़म  से निहायत आज़ाद ,

बिस्मिल्ला खान को पूरा भारत सलाम करता है ।

भारत के हरेक आदमी को गर्व है कि वह उस देश में रहता है,

जिसकी शामें कभी बिस्मिल्ला खान से शुरू

होकर बिस्मिल्ला खान पर ही खत्म होती थीं।

बिस्मिल्ला खान सच्चे भारतीय सबसे पहले

थे बाद में सब कुछ थे।

भारत रत्न बिस्मिल्ला खान सच्चे अर्थों में भारत के महान रत्न थे।

      सहनाई सम्राट              बिस्मिल्ला खान

सहनाई सम्राट भारत रत्न बिस्मिल्ला खान का

जन्म बिहार के एक छोटे से गांव में 21 मई 1916

को हुआ था।

बक्सर के जिस गांव में बिस्मिल्ला खान का जन्म

हुआ था उसका नाम डुमरांव था।

बिस्मिल्ला खान के जीवन का सर्वाधिक

महत्वपूर्ण समय बनारस में व्यतीत हुआ था।

शहनाई वादन की कला में महारत हासिल करने

वाले भारत रत्न बिस्मिल्ला खान,

अपने चाचा अली बक्स खां या विलायत खां के

साथ बचपन से ही बनारस के विश्वनाथ मंदिर में

सुबह शाम शहनाई का अभ्यास करते थे। 

शहनाई के ख़ास शुर 

बिस्मिल्ला खान की शहनाई  जब इस नायाब

शख्स के होंठों में होती थी,

तब वह शहनाई कभी भी शहनाई नहीं लगती थी।

सच्चाई यह है कि वह शहनाई जीवन का सारतत्व लगती थी।  

सच तो यह भी है कि बिस्मिल्ला खान साहब ने शहनाई को,

उस समय एक असीम उंचाई दी थी जब गाने बजाने को ,

सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा जाता था।

बिस्मिल्ला खान साहब के खास शुर बजरी,चैती ,झूला आदि थे।

यह वही लोक धुन हैं जिनके दमदार प्रदर्शन ने

खान साहब को खास बनाया था।

मजहब से शिया होने के बाद भी खान साहब

विद्या की देवी माँ सरस्वती के महान उपासक थे।

बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय और शांति निकेतन

से उन्हें डाक्टरेट की उपाधि प्राप्त थी।

भारत रत्न,रोसटम पुरस्कार,पद्म भूषण,पद्म श्री,,

पद्म विभूषण,तानसेन आदि पुरस्कार उनके

यक्तितव में चार चांद लगाते थे।

बिस्मिल्ला खां साहब का नाम भारत के इतिहास

में सदैव अमर रहेगा। 

शहनाई क्या है

शहनाई एक सुषिर वाद्य यंत्र है।

यह वह वाद्य यंत्र होता है जिसके अंदर का भाग पोला होता है।

इस तरह के यंत्र में वायु का उपयोग होता है।

इस तरह के यंत्र के अन्य उदाहरण हैं शहनाई,बांसुरी,

अलगोजा,बैंड,हारमोनियम,शंख आदि।

जहां तक बात शहरों की है तो यह भारत का एक

प्राचीन यंत्र है।

इसका प्रयोग शास्त्रीय संगीत से लेकर फिल्मी

गीतों तक में किया जाता है।

शहनाई एक खोखली नली होती है,जिसका एक

सिरा अधिक चौङा होता है तो दूसरा पतला होता है।

शहनाई के स॔करे सिरे पर विशेष प्रकार की पत्तियों

और दलदली घासों से बनीं एक सेमी लम्बी दो

पत्तियां लगी होती हैं।

शहनाई को लोकप्रिय बनाने में उस्ताद बिस्मिल्ला

ख़ान का अतुुलनी योगदान है।

शहनाई के इस महान नायक को भारत सरकार ने

2001 में भारत रत्न प्रदान किया था।

2006 में स्वर्ग सिधारने वाले बिस्मिल्ला खान साहब को,

स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर जी के साथ भारत

रत्न प्रदान किया गया था। 

           धन्यवाद

■By KPSINGH■

        07052018

 

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