हे अटल हो अटल अब अटल हो सदा

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हे अटल हो अटल अब अटल हो सदा 

हे अटल, हो अटल अब अटल हो सदा

दोस्तों, हम आज जिस अटल शक्ति की यहां चर्चा करने जा रहे हैं

वह अटल व्यक्तिव के धनी व्यक्ति हमारे परम आदरणीय 

हमारे जीवन के चिरकालिक अनुकरणीय

भारत के 10 वेंं प्रधानमंत्री मंत्री के रूप में भारत को अटल नेतृत्व देने वाले

भारत के महान व्यक्तिवों में शामिल और भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी हैं।

वही बाजपेयी जी, जो भारत जैसे दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश की

एक नहीँ तीन बार पूरी सिद्दत से  बागडोर संभाल चुके हैं।

अटल थे अटल अब रहेंगे अटल 

श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी भारत की वह सख्सियत हैं

जिनके व्यक्तित्व में एक नहीँ सैकड़ों खूबियों के विश्व भर ने

एक नही अनेकों बार दर्शन किए हैं।

फिर वह मौका चाहे संयुक्त राष्ट्र संघ में पहली बार हिंदी में भाषण देने की कूबत

और जज्बा दिखाने का अवसर हो

या फिर पूरी दुनिया को धता बताकर पोखरन परमाणु का सगर्व परीक्षण करके

सारे संसार को यह संदेश देने का वक्त रहा हो कि हम भारत वासी

अपनी सुरक्षा से कोई यदि समझौता नहीं करते तो दूसरी ओर

हम भारतीय किसी और की सुरक्षा का सपने में भी निज स्वार्थ के लिए

अतिक्रमण नहीं करते। 

अटल की अटल शक्ति 

अटल की अटल शक्ति के दर्शन पूरे विश्व ने कारगिल युद्ध के दौरान

तब साक्षात किए थे जब दुश्मन को अभय दान देकर ही वापस हुए थे कि

सामने नापाक देश की नापाक हरकत ने अटल के अदम्य साहस को

हिलाने की असफल कोशिश की थी।

विडंबना देखिए एक तरफ अटल जी अमन चैन का संदेश देने में व्यस्त थे

तो दूसरी ओर दोस्त के भेष में माल पुआ का स्वाद चखने के बाद दुश्मन ने

इस वीर पुरुष को चुपके से चाकू से गोद डालने की साजिश ही कर डाली थी।

लेकिन यह हमारे चिर महान अटल जी का अटल व्यक्तिव ही था

कि दुश्मन को  चुन चुन कर मारने का आदेश देने के बाद भी

मानवता खंडित न हो यही अपेक्षा कर रहे थे।

कारगिल युद्ध भारत के इतिहास में जब भी याद किया जाएगा 

तो इस बात का उल्लेख किया अवश्य किया जाएगा कि

एक युद्ध संसार में ऐसा भी हुआ है जिसमें सैनिक और साजो सामान  ही नहीं

किसी का विराट व्यक्तिव भी विजयी हुआ है ।

आज की राजनीति और अटल जी 

 

आज की राजनीति की बात करें तो अटल जी के व्यक्तित्व वाले

राज नेता के दर्शन ही दुर्लभ हैं।

आज जिस तरह पक्ष विपक्ष को और बिपक्ष पक्ष को केवल और केवल

नीचा दिखाने की जुगत मे राजनीति की सारी मर्यादाओं का उल्लंघन

प्रतिपल करने से गुरेज नहीं करते

वही इस महान हस्ती ने आज की इस गरिमा हीन दुनिया में

अपने विरोधी को भी गले लगाने से गुरेज नहीं किया।

अटल जीवन की शुरुआत 

अटल जीवन की शुरुआत 25 दिसंबर 1924 को

तब हुई जब अटल जी का इस दिन ग्वालियर मध्य प्रदेश में जन्म हुआ था ।

इनके पिता का नाम कृष्ण बिहारी वाजपेयी और माता का नाम कृष्णा देवी था।

अटल बिहारी वाजपेयी राजनीति शास्त्र से MA किया था।

इनकी शिक्षा कानपुर के डीएवी कॉलेज और ग्वालियर के विक्टोरिया कालेज में हुई।

इन्होंने अपने जीवन की शुरुआत पत्रकार पेशे से 

की थी यह सामाजिक कार्यकर्ता का भी दायित्व निभा चुके हैं।

🔴अटल बिहारी वाजपेयी चार राज्यों से चार बार सांसद चुने गए।

🔴अटल जी के जीवन में 15 बार लोक सभा चुनाव हुए

उसमे अटल जी 10 बार सांसद चुने गए थे।

🔴राष्ट्र धर्म, पांच्य जन्य, वीर अर्जुन समाचार पत्रों का सम्पादन किया।

1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में जेल गए थे ।

🔴1975/77 के आपातकाल में जेल गए थे।

🔴अटल बिहारी वाजपेयी ने भारत में पहली बार शुद्ध गैर कांग्रेसी

सरकार पांच साल चलाई थी। 

अद्वितीय अटल

अद्वितीय अटल ने 1990 के दशक में भारतीय

जनता पार्टी को बुलंदियों में पहुचाने का काम किया था।

🔴वह भारत के 10 वें प्रधानमंत्री थे।

🔴वह भारत के तीन बार प्रधानमंत्री  बन चुके हैं।

🔴पहली बार 1996 में 16 मई से 1 जून तक ।

🔴दूसरी बार 1998 में 19 मार्च से 26 अप्रैल 1999 तक।

🔴तीसरी बार 13 अक्टूबर 1999 से 22 मई 2004 तक।

🔴आर एस एस के पूर्ण कालिक सदस्य रहे थे अटल बिहारी वाजपेयी जी 

🔴1952 में पहली बार लखनऊ से चुनाव लड़ किंकिंतु हार मिली थी।

🔴1957 में पहली बार बलरामपुर से यह लोक सभा सदस्य बने थे।

🔴अटल बिहारी वाजपेयी कुल 10 बार लोक सभा सदस्य चुने गए थे।

साथ ही दो बार राज्य सभा सदस्य भी चुने गए थे।

🔴अटल जी 1969 से 1972 तक पार्टी के अध्यक्ष रहे थे ।

🔴1977 में मोरारजी देसाई सरकार में पहली बार विदेश मंत्री चुने गए थे।

🔴2004 में राजनीतिक जीवन से सन्यास ले लिया था। 

 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 16082018

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