सोच कर सोचें :नोट पर गांधीजी के बाद कौन?

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सोच कर भी सोचें नोट पर गांधी जी के  बाद कौन?

सोच कर सोचें :गांधी जी के बाद नोट में कौन?

इस सवाल का मतलब यह है कि, क्या आप ने कभी सोचा है कि हम ,

भारतीय नोट में गांधी जी के अलावा कौन है वह जिसकी तस्वीर देखना चाहते हैं ?

सोच कर सोचें गांधी जी के बाद नोट में कौन?

यह एक ऐसा भी सवाल है जो हमें यह सोचने पर मजबूर कर रहा है कि हम ऐसे किस व्यक्ति का चित्र अपनी कागजी मुद्रा यानी नोट पर छापें?

गांधी जी नोट पर कब आए? 

सोच कर सोचें गांधी जी के बाद नोट पर कौन?

इस सवाल का सटीक उत्तर आप तभी दे सकते हैं जब आप को

यह पता होगा कि आखिरकार हमारी भारतीय कागजी मुद्रा में

गांधी जी की पहली बार तस्वीर कब अंकित की गई?

इस सवाल का उत्तर यह हैकि भारत में नोटों पर गांधी जी की

पहली बार तस्वीर सन 1996 में छापी गई थी ।

इससे पहले किसी भी व्यक्ति विशेष की फोटो की बजाय

अशोक स्तंभ तथा दूसरे प्रतीक चिह्न छापने की परम्परा थी ।

शायद लोग जानते होंगे कि गांधी जी के पहले नोट में गांधी जी के स्थान पर

अशोक स्तंभ का कब्जा था ।

आपको बता दें जब भारत में पहली बार पांच सौ का नोट

1987 में प्रचलित हुआ तो पहली बार गांधी जी के वाटर मार्क का प्रयोग हुआ था ।

गांधीजी की वह तस्वीर 

जी हां दोस्तों, यहां वह तस्वीर का तात्पर्य है उस तस्वीर से जो ,

नोटों में अंकित की जाती है ।

नोट पर गांधी जी की जो तस्वीर छापी जाती है वह तस्वीर

किसने खींची थी यह किसी को नहीं पता।

लेकिन हां यह तस्वीर गांधी जी की ओरिजिनल फोटो है ।

बर्मा और भारत के तत्कालीन ब्रिटिश सेक्रेटरी पैथिक लारेंस से,

गांधी जी ने जब मुलाकात की थी यह फोटो उसी समय की है ।

गांधीजी के पहले

सोच कर सोचें नोट पर गांधी जी की तस्वीर 1996 से छप रही है ,

लेकिन इससे पहले नोट पर किसकी तस्वीर होती थी ।

यह रोमांचक सवाल है ।

पहले नोटों पर किसी मनुष्य के चित्र की बजाए अशोक की लाट का चित्र

तथा विकास संबंधी चित्र होते थे ।

जैसे एक रुपए के चित्र पर बाम्बे हाई का चित्र या फिर,

दो रुपए के नोट में छपे भारतीय उपग्रह तथा रायल बंगाल का अद्भुत चित्र ।

ट्रैक्टर चलाता किसान या धान रोपती महिलाएं ।

यह सभी चित्र वास्तव में विकास की यात्रा के गवाह और हम सफर रहे हैं ।

नोट पर गांधी जी के बाद कौन 

नोट पर गांधी जी के अलावा किस महापुरुष की तस्वीर छापी जाए ,

यह  चर्चा आजकल बड़ी चर्चा बनती जा रही है ।

नरेंद्र जाधव जो योजना आयोग के सदस्य रह चुके हैं ,

उनका मत है कि नोटों पर स्वामी विवेकानंद जी के साथ ही साथ

अम्बेडकर जी का चित्र भी छापा जाए ।

कुछ लोग इनमें सरदार पटेल का भी नाम बताते हैं ।

वहीं  कुछ लोग देश के क्रांतिकारी वीरों के सम्मान में इनकी फोटो भी

नोट पर छापने की वकालत कर रहे हैं ।

 

धन्यवाद

के पीसिंह,किर्तीखेड़ा  12032018

3 COMMENTS

  1. बहुत सोचने के बाद निष्कर्ष ये निकला कि किसी की भी तस्वीर नही होनी चाहिए।क्योंकि ये तस्वीर साम्राज्यवाद की प्रतीक हैं। पहले राजा महाराजा अपने राज्य को इंगित करने के लिए मुद्रा पर अपना चित्र लगते थे। अब अगर लगाना जरूरी ही हैं तो उनकी लगाए जिनकी देश की संप्रभुता बचाने में जीवन होम दिया। किसी राजनीतिक पार्टी से संलग्न या प्रेरित न हो जैसे जो भी राष्ट्रपति जब देश का प्रथम नागरिक बनता है तो वो किसी भी पार्टी से संलग्न नही माना जाता।अतः जितने भी अबतक राष्ट्रपति रहे हैं उन सबका चित्र लगना चाहिए। इसमे सभी समाज ,सभी वर्ग, सभी धर्म के व्यक्ति आ जाये हैं। सराहनीय देश भक्त आर्मी जनरल भी इसके हकदार हो सकते हैं , उच्च पदक प्राप्त वीर सिपाही जिनकी वजह से युद्ध विजयी किये गए।

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