ईज आफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग

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ईज आफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग 

ईज आफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग क्या है, इस लेख का मुख्य विषय यही है।

दोस्तों राजनीति और आर्थिक चर्चाओं में आप अक्सर इस रहस्य मयी,

अर्थात ईज आफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग का नाम सुनते होंगे यह रैंकिंग क्या होती है?

इसमें उतार चढ़ाव कब और कैसे आता है?

इसमें आने वाले उतार चढ़ाव का क्या मतलब होता है?

इन सभी कौतूहलों की चर्चा करना ही इस लेख का मकसद है।

ईज आफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग का मतलब 

ईज आफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग का सरल से सरल

शब्दों में मतलब यह होता है कि किसी भी देश में आप कारोबार कितनी सरलता से कर सकते हैं?

या किसी भी देश में व्यापार शुरू करने में कितीनी

कम या कितनी ज्यादा दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है?

ईज आफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग को हर साल विश्व बैंक जारी करता है।

इसके लिए विश बैंक अपने 10 मानक या पैमानों का प्रयोग करता है।

और फिर इसी पैमाने के आधार पर पूरी दुनिया के 190 देशों को रैंकिंग  प्रदान करता है।

इस रैंकिंग को ही ईज आफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग कहा जाता है।

इसका मकसद यह जानना होता है कि किसी देश

में कारोबार करना कितना आसान और कितना कठिन है? 

क्या हैं रैंकिंग के पैमाने?

विश्व बैंक ईज आफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग जारी करने के लिये,

जिन 10 आधार या पैमानों का प्रयोग करता है उनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं,

🔵बिजली कनेक्शन लेने में लगने वाला वक्त या फिर इस काम में होने वाली कठिनाई।

🔵कांट्रैक्ट लागू करना।

🔵बिजनेस शुरू करना। 

🔵प्रापर्टी रजिस्ट्रेशन। 

🔵दिवा पन के मामले सुलझाना। 

🔵कंस्ट्रक्शन सर्टिफिकेट। 

🔵लोन लेने में लगने वाला समय। 

🔵माइनॉरिटी इन्वेस्टर्स के हितों की रक्षा करना। 

🔵टैक्स पेमेंट और ट्रेडिंग अक्रोस बार्डर सीमा पार व्यापार शामिल हैं । 

11वां पैमाना भी होता है

जी हां मेरे दोस्तों ईज आफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग

में एक 11 वां पैमाना, “श्रम बाजार के नियम” भी होता है।

लेकिन सत्य यह भी है कि देशों की रैंकिंग को  तय करते वक्त इसके मूल्य को नहीं जोड़ा जाता।

मोटे तौर पर किसी देश की ईज आफ डूइंग बिज नेस रैंकिंग तय करते वक्त,

यह देखा जाता है कि किसी देश में नया कारोबार

शुरू करने में कुल समय कितना लग रहा है? और क्यों लग रहा है?

कंस्ट्रक्शन परमिट लेने में कितना समय लग रहा है।

बिजली कनेक्शन पाने में कितने दिन लग रहे हैं? 

कौन तैयार करता है यह रिपोर्ट? 

ईज आफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग को तैयार कौन क रता है?

यानी इस रैंकिंग बिजनेस की रिपोर्ट को कौन कौन या किस किस प्रकार के लोग तैयार करते हैं।

इस सवाल का जवाब यह है कि ईज आफ डूइंग

बिजनेस रैंकिंग तैयार करने वाली टीम सरकारी

अधिकारियों, कारोबारियों, शिक्षाविदों, चार्टर्ड

अकाउंटेंट फर्म से फीड बैक लेकर इस डाटा को जुटाती है। 

कब हुई शुरुआत इसकी

अगर आप यह जानना चाहते हैं कि विश्व बैंक ने इसकी शुरुआत कब की?

तो इस सवाल का उत्तर यह है कि ईज आफ डूइंग

बिजनेस रैंकिंग की शुरुआत विश्व बैंक ने 2003 में की थी।

यहां पर यह बात याद रखने लायक है कि प्रारंभ में

विश बैंक ने ईज आफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग जारी करने के लिए,

केवल 5 आधार या पैमानों का प्रयोग किया था।

उस वक्त देशों की कुल संख्या भी 190 की जगह केवल 133 ही थी। 

क्या कहती है हालिया रिपोर्ट? 

ईज आफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग की नवीनतम रि पोर्ट पिछले साल अक्टूबर 2017 में आई थी।

जिसमें 190 देशों की सूची में भारत को 100 वां स्थान प्राप्त हुआ था।

भारत सरकार ने इससे उतसा होकर आगामी वर्षों में इसे 50 करने का संकल्प भी लिया था।

इस रिपोर्ट को तैयार करने का सबसे साधारण तरीका यह भी है कि,

लक्षित देश के किसी एक सबसे बड़े व्यापारिक शहर से इस तरह के आंकड़ों को जुटाया जाता है।

एक तथ्य यह भी है कि 10 करोड़ से अधिक

जनसंख्या वाले देशों जैसे,

भारत, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, ब्राजील, चीन,

नाइजीरिया, रूस, पाकिस्तान, मैक्सिको, जापान,

अमरीका में इस तरीके के अलावा भी अन्य तरीके अपनाए जाते हैं। 

धन्यवाद

KPSINGH 29052018

 

 

 

 

 

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