कामर्सियल पेपर क्या है?

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कामर्सियल पेपर क्या है? 

कामर्सियल पेपर क्या है? इस सवाल का जवाब आपको मिलेगा,

साथ ही साथ आपको यह भी यहां जानकारी दी जाएगी कि इसका उपयोग क्या है?

इसकी कब, क्यों और कैसी कैसी जरूरत होती है

इन सभी जटिल सवालों के यदि आसान जवाब च तो आइए इस लेख को पूरा पढिए।

दोस्तों, उधार कौन नहीं लेता? क्या राजा क्या रंक सभी उधार लेते हैं।

आधुनिक समय की बात की जाए तो बड़ी ही शर्म आती है इस बात पर कि,

जिसे गरीब कहा जाता है, वह कभी कर्ज न तो पाता है और न ही लेने का मन बनाता है।

पर जिसे रईस कहा जाता है वह अंदर से गले तक कर्ज में डूबा रहता है।

और ज्यादातर सक्षम रईस लोग कर्ज वापस न करके देश का नुकसान भी करते हैं।

लेकिन हां सभी बड़े और सक्षम लोग हराम का ही नहीं खाते।

कुछ अच्छे लोग भी होते हैं जो देश का कर्ज जरूर वापस करते हैं। 

आइए बात करें कामर्सियल पेपर की

 

कामर्सियल पेपर क्या है, या फिर कामर्सियल पेपर किस काम आता है?

दोस्तों, इस की कहानी, उधार पर टिकी हुई एक ऐसी कहानी है,

जहां पर अविश्वसनीय हरकत की कहीं कोई जगह नहीं होती।

बाजार से उधार लेने के लिए कंपनियां तरह तरह के तरीके अपनाती हैं।

जैसे :जब उन्हें लम्बी अवधि का कर्ज चाहिए तब वह बांड जारी करती हैं।

वहीं जब उन्हें अल्पावधि के लिए कर्ज चाहिए तो वह जिस तरीके को अपनाती हैं,

वह तरीका या उपाय ही कामर्सियल पेपर कहा जा सकता है।

कामर्सियल पेपर वह उपाय है जो कि कंपनियों

को बिना कुछ गिरवी रखे बाजार से धन उपलब्ध कराता है। 

कामर्सियल पेपर के मायने क्या हैं? 

कई बार हम यह देखते हैं कि कोई कंपनी अपने ही किसी ग्राहक को उधार सामान देती है।

कुछ दिन बाद वह ग्राहक अपना उधार चुका भी देता है।

लेकिन जब कंपनी सामान उधार देती है और जब अपना उधार दिया गया धन प्राप्त करती है,

तो इस बीच की अवधि में कंपनी अपना ही काम

चलाने के लिए बाजार से जो धन प्राप्त करती है वही कामर्सियल पेपर होता है।

दरअसल कामर्सियल पेपर यानी वाणिज्यिक पत्र मनी मार्केट का.

एक ऐसा प्रपत्र है जो वचन पत्र, प्रामिसरी नोट के तौर पर जारी किया जाता है।

यह अनसिक्योर्ड  यानी गारंटी रहित होता है, यानी इसका मतलब यह होता है कि,

इसके जरिए कंपनियों को पैसा उठाने के लिए

किसी भी तरह की कोई संपत्ति गिरवी रखने की जरूरत नहीं पड़ती है।

कामर्सियल पेपर कम से कम सात दिन  के लिए या अधिक से अधिक,

एक साल तक की अवधि के लिए जारी किया जा सकता है। 

भारत में कामर्सियल पेपर 

कामर्सियल पेपर की भारत में शुरुआत 1990 में हुई थी।

तब इसका मकसद ईमा और अच्छा प्रदर्शन करने वाली कंपनियों की मदद करना था।

बाद में प्राईमरी डीलर और अखिल भारतीय वित्ती य संस्थानों को भी,

कामर्सियल पेपर जारी करने की अनुमति प्रदान की गई थी।

जहां तक इस कामर्सियल पेपर में निवेश करने की बात है तो, 

इसमें आम आदमी से लेकर अनिवासी भारतीय तक निवेश कर सकते हैं।

इसमें अनिवासी भारतीय तथा विदेशी संस्थागत निवेशकों के लिए एक सीमा निर्धारित है।

इनकी निवेश की सीमा सेबी निर्धारित करती है।

इस निष्कर्ष यह है कि बड़ी कंपनी, प्राईमरी डीलर

और वित्तीय संस्थान कामर्सियल पेपर जारी करते हैं।। 

सब कोई कामर्सियल पेपर नहीं जारी कर सकता 

अगर आपको लगता है कि कामर्सियल पेपर सब कोई जारी कर सकता है, तो आप सही नहीं हैं।

कोई भी कंपनी तभी कामर्सियल पेपर जारी कर सकती है,

जब उसकी टेंजिबल नेटबर्थ कम से कम कुल चार करोड़ रुपये हो।

उस कंपनी की बैलेंस सीट में भी इस निवल संपत्ति का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए।

साथ ही साथ उस कंपनी को बैंकों और वित्तीय

संस्थानों से वर्किंग कैपिटल की सीमा भी मंजूर करानी चाहिए। 

जरा ध्यान दें

🔴आपको विशेष ध्यान रखने की भी जरूरत हैकि कंपनी जिस खाते में,

यह राशि बाजार से लेती है,उसे बैंक स्टैंडर्ड असेट के रूप में वर्गीकृत करते हैं।

कंपनी को क्रिसिल तथा फिच जैसी रेटिंग एजेंसी

से कामर्सियल पेपर जारी करने के पहले रेटिंग भी  लेनी होती है। 

 

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