किसे कहते हैं एक्सचेंज रेट?

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किसे कहते हैं एक्सचेंज रेट? 

किसे कहते हैं एक्सचेंज रेट? का जवाब जानने केपहले आपको कुछ याद करना होगा ।

जी हां, दोस्तों, जरा अपने दिमाग में जोर डालिए शायद आपको सब कुछ याद आ जाएगा। 

याद कीजिए उस पुराने अखबार को जिसमें आपने  हमने पहली बार पढा था कि 

डालर के मुकाबले रुपया कुछ मजबूत हुआ है याफिर डालर के मुकाबले रुपया कमजोर हुआ है। 

इतना ही नहीं जब आपको अपने देश से बाहर भीकहीं जाने की जरूरत होती है।

तो भी आप किसी फारेक्स डीलर की शरण में  ही

जाते हैं और अपनी जरूरत की विदेशी मुद्रा प्राप्त करते हैं।

आपको यह भली भांति पता होगा कि एक्सचेंजरेट हर दिन का घटता बढता रहता है। 

जिस मूल्य या दर पर एक देश की मुद्रा दूसरे देश

की मुद्रा से बदली  जाती है उसे ही, एक्सचेंज रेट कहा जाता है।

अधिकांश देशों में एक्सचेंज रेट को दशमलव के

बाद चार अंकों तक लिखते हैं।

जैसे 8 जून 2018 को एक डालर का मूल्य 6?.5228 था ।

किसी भी देश की करेंसी का मूल्य बाजार में उस

की मांग और आपूर्ति पर निर्भर करेगा ।

जैसे एक साधारण व्यापारी सामान की खरीद

फरोख्त करता है।

वैसे ही फारेन एक्सचेंज मार्केट में विदेशी मुद्रा का

क्रय विक्रय किया जाता है। 

फारेन एक्सचेंज मार्केट 

फारेन एक्सचेंज रेट वास्तव में दो प्रकार का होता है।

पहला     है  स्पाट रेट तथा    दूसरा है    फारवर्ड रेट जिसमें, 

स्पाट रेट का मतलब है आज के दिन किसी विदेशी मुद्रा का मूल्य।

वहीं फारवर्ड रेट का मतलब है कि भविष्य में आगेकिसी तारीख के लिए एक्सचेंज रेट।

असली बात यह है कि एक्सचेंज रेट में दो करेंसी होती हैं ।

बेस करेंसी तथा काउंटर करेंसी।।

बेस करेंसी तथा काउंटर करेंसी  को हम दो तरह से व्यक्त करते हैं । 

बेस करेंसी तथा काउंटर करेंसी 

बेस करेंसी तथा काउंटर करेंसी को को व्यक्त करने के दो तरीके हैं। 

पहला तरीका यह है कि इसमें बेस करेंसी किसी

अन्य देश की होती है यानी डालर की तुलना में

भारत के रुपये की कीमत।

इसमें डालर बेस करेंसी है, क्योंकि यहां,,आपके

रुपये की कीमत डालर की  तुलना में बताई जा रही है।

इसी तरह आपको यहाँ पर यह ध्यान देना होगा कि

आपका रुपया यहां काउंटर करेंसी है।

काउंटर करेंसी और बेस करेंसी इसी तरह आसानीसे समझा जा सकता है ।

इसे समझने का एक दूसरा तरीका भी है जिसे हम

इस प्रकार सेससमझ सकते हैं।

इसमें घरेलू मुद्रा बेस करेंसी होती है और विदेशीमुद्रा काउंटर करेंसी होती है ।

ध्यान देने की बात है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में,, 

हम यह देखते हैं कि ज्यादातर एक्सचेंज रेट व्यक्त

करते समय डालर को ही बेस करेंसी माना जाता है। 

फ्लोटिंग या फिक्स रेट 

 

 

एक्सचेंज रेट या तो फ्लोटिंग रेट होते हैं या फिक्स रेट होते हैं।

फ्लोटिंग का मतलब यहां पर रेट के घटने बढने से है।

यानी रेट जब बाजार की स्थिति से घटते बढते हैं तो उसे फ्लोटिंग रेट कहा जाता है।

जब कि कुछ देशों में सरकार ही एक्सचेंज रेट तय

करती है जिसे फिक्स्ड एक्सचेंज रेट कहा जाता है।।

आपको बताते चलें कि साउदी अरब की मुद्रा रियाल की कीमत खुद तय करती है।  

धन्यवाद

KPSINGH 16072018 

 

 

 

 

 

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