प्रत्यक्ष विदेशी निवेश क्या है

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प्रत्यक्ष विदेशी निवेश क्या है?

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी एफ डी आई क्या है ?

अगर आपको इस सवाल का जवाब चाहिए तोआपको याद करना होगा,

पिछले दिनों की वह घटना जिसमें कहा गया था कि वालमार्ट और फ्लिपकार्ट की डील से, 

भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बढेगा।

जी हां दोस्तों, इसके आगे यह भी कहा गया था कि भारत की अर्थव्यवस्था के लिए,

बेहद जरूरी है देश में भरपूर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश

तो आइए दोस्तों विस्तार से जानकारी प्राप्त करें

 

कि  आखिर यह प्रत्यक्ष विदेशी निवेश अर्थात ये एफडीआई क्य है। 

एफडीआई कोसमझें 

एफडीआई को यदि आप समझना चाहते हैं तो जरा गौर फरमाइए।

किसी विदेशी व्यक्ति या कंपनी द्वारा किसी

भारतीय कंपनी में लगने वाले पैसे को विदेशी निवेश कहा जाता है।

विदेशी निवेशक अपना पैसा कंपनी में लगाने के

लिए कंपनी के शेयर खरीद सकता है, बांड खरीद सकता है। 

या फिर खुद ही कोई नया कारखाना लगा सकता है।  

लेकिन यह पूंजी निवेश रिपार्टिएबल बेसिस पर ही होता है।

इसका मतलब यह है कि विदेशी निवेशक ने यहां जो भी पूंजी निवेश किया है,

उसे वह निकालकर वापस स्वदेश ले जा सकता है

विदेशी निवेश के प्रकार 

विदेशी निवेशक हमारे देश में दो तरह से निवेश कर सकते हैं।

🔴प्रत्यक्ष विदेशी निवेश या FDI

🔴विदेशी पोर्ट फोलियो निवेश FPI

किसी भी दूसरे देश की कंपनी या परियोजना में किया जाने वाला निवेश एफडीआई है।

दरअसल यह सीधा निवेश होता है, और आमतौर पर दीर्घकालिक होता है।

विदेशी कंपनी इसके जरिए मेजबान देश की कंपनी में,

अहम हिस्सेदारी खरीदकर अपनी उपस्थिति दर्ज करती है।

विदेशी निवेशक सूची बद्ध और गैर सूची बद्ध भारतीय कंपनियों में निवेश कर सकते हैं।

लेकिन सूची बद्ध कंपनी में न्यूनतम 10 फीसदी

हिस्सेदारी लेने को एफडीआई की श्रेणी में रखा जाता है।

एफडीआई के तहत निवेशक पूंजी ही नहीं प्रौद्योगिकी भी लाते हैं।

यही वजह है कि एफ को परिसंपत्ति सृजक माना जाता है।

सरकार ने अलग अलग क्षेत्रों में एफडीआई की सीमा भी अलग अलग तय कर रखा है।

सरकार समय समय पर इस सीमा की समीक्षा भी करती है। 

एफ पी आई 

दूसरी ओर जब विदेशी निवेशक शेयर बाजार में

सूचीबद्ध भारतीय कंपनी के शेयर खरीद कर कुल

10%से कम की हिस्सेदारी खरीदता है तो उसे ही एफ पी आई कहते हैं।

यह निवेश शेयर और बांड के रुप में होता है।

वैसे जब कोई विदेशी निवेशक 10% से अधिक

लेता है तो उसे फिर एफडीआई ही माना जाता है।

विदेशी पोर्ट फोलिव निवेश आम तौर पर

अल्पावधि के लिए किया जाता है।

यह परोक्ष निवेश होता है।

एक पोर्टफोलियो निवेशक अपने फायदे और नुकसान को देखते हुए,

अचानक भारतीय शेयर या बांड बेंचकर यहां से

चला जाता है।

इसीलिए इसे धन सृजन के रूप में भी जानते हैं।

एफ आई आई 

परोक्ष निवेश की इस श्रेणी में एफ आई आई भी आते हैं।

एफ आई आई का मतलब भारत से बाहर स्थापित

उन संस्थाओं और कंपनियों से है जो भारत शेयर बाजार में निवेश करना चाहते हैं।

ऐसे निवेशक FII के रूप में सेबी के पास पंजीकृत होते हैं।

विदेशी पेंशन फंड, म्यूच फंड और बैंक इसके उदाहरण हैं। 

 

धन्यवाद

KPSINGH 23052018 

 

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