प्राम्ट करेक्टिव एक्शन क्या है?

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प्राम्ट करेक्टिव एक्शन क्या है? 

प्राम्ट करेक्टिव एक्शन क्या है? यह थोड़ा विचित्र सवाल लग रहा है।

लेकिन अगर आप धैर्य रखें और इसे समझने की कोशिश करेंगे तो यह विचित्र नहीं लगेगा।

बल्कि यह एक बेहद महत्वपूर्ण ऐसा जरूरी शब्द लगेगा कि इसके बिना सब बेकार महसूस होगा।

हाल ही के एक समाचार  की बात करें  तो रिजर्व

बैंक आफ इंडिया ने 11 सहकारी बैंकों को प्राम्ट करेक्टिव एक्शन PCA में रखा है।

आप कहेंगे या फिर सोचेंगे कि यह क्या है और रिजर्व बैंक को इसकी जरूरत क्यों पड़?

तो आइए जानते हैं तमाम इसी तरह के जरूरी सवालों के जवाब। 

प्राम्ट करेक्टिव एक्शन 

आप सभी लोग भलीभांति जानते हैं कि रिजर्व बैंक आफ इंडिया बैंकों को लाइसेंस देता है।

रिजर्व बैंक आफ इंडिया बैंकों के लिए नियम भी बनाता है।

बैंक ठीक से काम करें इस बात की निगरानी भी करता है।

आप यह भी जानते हैं कि बैंक कारोबार करते हुए वित्तीय संकट में भी फंस जाते हैं।

बैंकों को ऐसे संकट से निकालने के लिए रिजर्व बैंक आफ इंडिया,

समय समय पर दिशा निर्देश जारी करता है और फ्रेम वर्क बनाता है।

प्राम्ट करेक्टिव एक्शन PCA इसी तरह का एक फ्रेमवर्क है।

जो किसी बैंक की वित्तीय सेहत का पैमाना तय करता है।

यह फ्रेम वर्क समय समय पर हुए बदलावों के साथ दिसम्बर 2002 से चल रहा है।

 यह सभी व्यावसायिक बैंकों सहित छोटे बैंकों

तथा भारत में शाखा खोलने वाले विदेशी बैंकों पर भी लागू है। 

बैंकों को क्यों रखा जाता है PCA में?

आरबीआई को जब लगता है कि किसी बैंक के

पास जोखिम का सामना करने लायक पर्याप्त पूंजी नही है,

उधार दिए गए धन से आय नहीं हो रही है तो उस बैंक को PCA में डाल देता है।

ताकि उसकी वित्तीय हालत सुधारने के लिए तत्काल कदम उठाए जा सकें।

कोई बैंक कब इस स्थिति से गुजर रहा है यह

जानने को आरबीआई ने कुछ इंडिकेटर्स तय कर रखे हैं।

जिनमें उतार चढाव से इस बात का पता चलता है।

जैसे: CRR, नेट एनपीए और रिटर्न आन एसेट।

 

धन्यवाद

KPSINGH24052018

 

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