बदलाव के बाद एन पी एस योजना

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बदलाव के बाद एन पी एस योजना 

बदलाव के बाद  एन पी एस योजना ,का अर्थ  यह है कि सरकार ने पिछले दिनों,

इस योजना मेंं जो बदलाव किए हैं वह क्या हैं तथा कैसे हैं?

अगर सचमुच आपको भी इन बदलावोंके बारे में कुछ,

जानने समझने की इच्छा है तो आपका स्वागत है।

दोस्तों इस प्रस्तुत लेख में यही बताने की कोशिश की गई है कि ,

सरकार ने MPS system में कौन कौन से विशेष परिवर्तन किए हैं।

इनका इस योजना में क्या फर्क पडेगा?

यही मूल प्रश्न है जिसका जवाब तलाशने की कोशिश मैं यहाँ करने वाला हूं। 

क्या है एन पी एस योजना

क्या है एन पी एस योजना का जवाब यह है कि ,

एन पी एस योजना मध्यम वर्ग के लिए रिटायरमेंट का एक बेहतरीन विकल्प है ।

सरकार ने इस योजना में निवेश का आकर्षक बढ़ाने के लिए कुछ बदलाव किए हैं।

इसके तहत निजीक्षेत्र में काम करने वाले निवेशक अब शेयर बाजार में 75%तक निवेश कर  सकेंगे।

साथ-साथ उच्च शिक्षा जैसे जरूरी कार्यों के लिए समय  से पहले निकासी भी की जा सकती है।

टारगेट प्लानिंग हमारे जीवन का अहम् हिस्सा है ।

इसके बिना रिटायरमेंट को बेहतर बनाना मुश्किल होता है,

कयोंकि कई ऐसी मुश्किलें होती हैं जिनका

समाधान रिटायरमेंट के समय से पहले ही तलाश

करना जरूरी होता है।

सच कहें तो नेशनल पेंशन स्कीम इसी सच्चाई को ध्यान में रखते हुए कीं गई थी।

सरकार ने इसमें समय-समय पर कई ऐसे बदलाव किए हैं,

ताकि इस योजना को आकर्षक बनाया जा सके।

तोआइए जानते हैं कि इस योजना में बदलाव के बाद क्या फायदा होना  संभव हुआ है 

निकासी की वयवस्था 

मझधार

किसी निवेश को जरूरत पङने पर कब कितना और किस तरह ,

इस्तेमाल किया जा सकता है यह उस निवेश का सबसे महत्वपूर्ण पहलू होता है ।

देखा जाए तो ईपीएफ का निवेश इसीलिए लोकप्रिय है,

कयोंकि सभी जानते हैं कि जरूरत पङने पर बच्चों की पढ़ाई,,

बीमारी का ईलाज,घर खरीदने आदि में इसे इस्तेमाल किया जा सकता है।

अभी एनपीएस में इन सुविधाओं की कमी है जिसे तत्काल पूरा करने की जरुरत है।

हालाकि पेंशन नियामक PFRDA ने निकासी का एक विकल्प लागू किया है। 

क्या है विकल्प 

बदलाव के बाद एन पी एस योजना का क्या रूप है?

इसका जवाब यही है कि इसमें निकासी का एक विकल्प लागू किया गया है,

जिसके अनुसार अगर निवेशक उच्च शिक्षा के लिए,

या कोई व्यापार शुरू करना चाहता है तो इस

विकल्प के आधार पर निवेशक कुछ धनराशि निकाल सकता है।

इसके तहत शिक्षा का उददेश्य विकल्प होना चाहिए। 

शेयर बाज़ार निवेश 

निवेशक अपनी धनराशि के ज्यादा बङे हिस्से को अब शेयर बाजार में लगा  सकता है।

इसके तहत अभी तक निजी कंपनियों में काम करने वाले लोगों को,

अधिकतम 50%ही शेयर बाजार में निवेश का हक़ था। अब इसे 75% कर दिया गया है।

लेकिन यह विकल्प केवल 50 साल की उम्र तक ही लागू होता है।

यानि पचास साल वाले 50%ही निवेश कर सकेंगे।

देखा जाए तो यह बदलाव ज़यादा बङे नहीं लगते लेकिन फ़िर भी बेहतर विकल्प हैं।

निष्कर्ष रूप में यही कहा जा सकता है कि

प्राकृतिक रूप  से निवेश का अलसी अर्थ यही है

कि आपका पैसा आपके काम आ जाए तो इससे अच्छा कुछ भी नहीं। 

धन्यवाद

■KPSINGH ■

09052018

 

 

 

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