यूपी की शिक्षा व्यवस्था और राजनीति

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यूपी की शिक्षा व्यवस्था और घटिया राजनीति

यूपी की शिक्षा व्यवस्था और घटिया राजनीति से तात्पर्हां,

यूपी की घटिया बदहाल शिक्षा व्यवस्था से है जो अपने आप में,

भारत नहीं दुनिया का सबसे बड़ा मजाक बन गई है।

क्यों और कैसे मजाक बन गई है अगर आप यह जानना चाहते हैं तो,

आपको इस लेख को पूरा का पूरा ही पढना होगा।

मैं ने बहुत साल पहले पढा था कि जिस देश और राज्य में,

शिक्षा विशेष कर प्राथमिक शिक्षा का ख्याल रखा जाता है तो,

उस  राज्य और देश की  उन्नति को  खुद ब्रह्म भी नहीं रोक पाते।

काश ऐसा यूपी के किसी भी नेता या  शिक्षा के ही लिए जिम्मेदार लोगों में,

किसी ने भी  पढा होता तो देश में सबसे  मजाक,

और चौपट शिक्षा व्यवस्था का खिताब यूपी को इतनी आसानी से,

वह राज्य न  दे पाते  जो आज से पहले पढे लिखे राज्य तक नहीं माने जाते थे। 

यूपी की बर्बाद शिक्षा व्यवस्था और हम 

यूपी  की  बर्बाद  और चौपट शिक्षा  व्यवस्था की शुरुआत,

उसी  दिन  से मानी जा  सकती है, जब पहली बार इस प्रदेश के,

किसी करामाती नेता के मन में यह बात घुसी थी

कि सस्ती राजनीति के साथ साथ यहां पर लम्पट राजनीति भी की जा सकती है,

और वह भी उस शिक्षा व्यवस्था के साथ में जिस

पर हमारा ही नहीं हमारे देश का भी भविष्य टिका होता है।

यूपी के स्कूल या तो अध्यापक विहीन हैं या फिर

इसी घटिया राजनीति के कारण,बेहद ही घटिया लोगों से भरे पड़े हैं, 

जिसका परिणाम यह हुआ कि आज स्वयं सेवी संस्था प्रथम की,

रिपोर्ट के मुताबिक कक्षा 8 का बच्चा कक्षा पांच के स्तर का कुछ नहीं जानता।

यूपी की प्रा शिक्षा की बर्बादी की शुरुआत

वर्तमान में राजस्थान के महामहिम लेकिन1995/ 96 में, यूपी के, तथाकथित धाकड़, मुख्यमंत्री श्री

श्री कल्याण सिंह जी ने शिक्षार्थ आइए से्वार्थ ही

जाइए को अपनी तरह से परिवर्तित कर दिया।

सही मायने में यूपी की शिक्षा व्यवस्था को घटिया

से भी  घटिया बनाने  के लिए  हम सदैव कल्याण

सिंह को कोसते रहेंगे।

कल्याण सिंह ने अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने के

लिए घर में परचून की दुकान चला रहे,

तथाकथित बीएड पास काबिल लोगों को नौकरी बांट कर,

प्रा शिक्षा को बंटाधार करने की शुरुआत की थी।

यह नियुक्तियां विशिष्ट बीटीसी के नाम पर की गईं

और इसी के साथ एक ऐसी शुरु की गई जो इसके

बाद   बहुत  बड़ी बड़ी  राजनयिकों का  मुंह मीठा करती रही है।

पहले बीटीसी की एक जिला स्तर की परीक्षा होती

थी जिसमें,कुछ काबिल लोग नौकरी पा जाते थे।

लेकिन जब से विशिष्ट बीटीसी की शुरुआत हुई तो

कौशांबी वाले,सब कुछ लूट ले गए,

जो केवल चमचागिरी करके नम्बर बढवाने में माहिर थे,

आज वे कल्याण सिंह की वजह से मास्साब हैं।

जिनके शिक्षा में योगदान का तो पता ही नहीं पर

उनकी ऐंठ काबिले तारीफ है।

इन नाकारा लोगों का जब से कल्याण हुआ इनसे न तो चलते बनता है न बोलते बनता है। 

आई अब अंटी की बारी

चूंकि ये बहुतै बड़ी बुद्धिमान हैं,  इसलिए इन्होंने

यूपी की शिक्षा व्यवस्था को चौपट करने का भी

बड़ा भारी काम किया।

इन्होंने अपनी हद की भी हद करते हुए एक ऐसी हद को पार किया,

जिसको जितना भी घटिया कहा जाए वह उतना ही कम है।

इनके जमाने में 22 सौ पाने वाले शिक्षा मित्र बहुत

ही बड़ी शिक्षा क्षेत्र की हस्ती बन चुके थे।

इसलिए उन्हें न तो पद मंजूर था न ही कुल 2200 रुपल्ली।

इन्होंने बहन कुआंरी मायावती जी सेजब कहा कि पैसा बढाओ तो,

उन्होंने सीधा अध्यापक ही इन्हें बना डालने की कसम खा डाली।

मायावती  जानती थीं कि वह, यह काम नहीं कर पाएंगी,

लेकिन जनता के बच्चों की अच्छी शिक्षा व इनकी

तथाकथित गुड़वत्ता जाए भाड़ में।

इंटरपास गांव के सबसे संभावना शून्य और प्रधान

जी के  सबसे बड़े परम भक्त को,

शिक्षा मित्रई से आगे अध्यापक बनाने की प्रक्रिया चल पड़ी ।

यह कदम यूपी की शिक्षा को चौपट करने वाला

सबसे घटिया कदम था।

इनसे भी मिलते चलिए 

लीजिए अब इन श्री मान जी से मिलिए इन्होंने ही

अप्रैल 2005 में 28000 विशिष्ट बीटीसी के लोगों की भर्ती की थी।

इनसे हाईकोर्ट ने पूछा था यह विशिष्ट बीटीसी क्या है?

लेकिन चूंकि सबको बहती गंगा में हांथ धोने की

पड़ी थी इस लिए कोर्ट की बात आई गई हो गई।

इनकी एक और महान विशेषता है कि इनके पहले

यूपी बोर्ड का इंटर हाईस्कूल का रिजल्ट बमुश्किल

7%या 8%आता था।

इनके जमाने में यह बढकर  80, 90% हो गया था।

नकल के बादशाह इस महान संत नेता को मेरी भी तरफ  से शतशत नमन है।

आइए अब अपने बबुआ से मिलिए

अगर किसी एक व्यक्ति ने यूपी की शिक्षा को अकेले चौपट किया है,

तो वह महान हस्ती हैं श्री मान अखिलेश यादव।

वोट का लालच किस तरह सिर चढ़कर बोलता है

कोई इसे अपने फारेन रिटर्न बबुआ से पूछें।

मायावती जी के जमाने में यूपी में पहली बार एक टीईटी परीक्षा हुई थी।

इस परीक्षा में बीएड पास लोग शामिल हुए, साथ

ही कुछ और डिग्री वाले भी थे।

पेपर कठिन था इसलिए अच्छे पढने वाले बच्चे ही

बमुश्किल इसे पास कर पाए।

अमर उजाला 15 दिसम्बर की रिपोर्ट के मुताबिक

इस परीक्षा मे 97 अंक तक हासिल करने वालों के

लिए अध्यापक बनने के चांस थे।

इधर नियुक्ति की तैयारी चल रही थी कि अंटी जी लटक गईं।

बसपा सरकार चुनाव हार गई और बबुआ जी की लाटरी लग गई।

इसके बाद बबुआ ने वह खेल खेला कि ईमानदारी

से पढने वाले रह गए और उठाईगीर जी मास्टर बन गए। 

अखिलेश जी ने और क्या गजब किया 

इस महान हस्ती ने यूपी की शिक्षा व्यवस्था के लिए जो किया,

उसे सुुुप्रीम कोर्ट आफ इंडिया ने अवैध ही नहीं, 

असंवैधानिक, मनमाना और कानून के खिलाफ भी कहा था।

अखिलेश जी ने एक तरफ तो वोट बैंक के चक्कर

में निहायत मानक के बाहर वाले लोगों को रातों

रात अध्यापक बना दिया।

दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट के आदेश को कूड़े के ढेर में फेंक कर,

लाखों टीईटी 2011 के ईमानदार बच्चों का अपने

हाथ से भविष्य चौपट कर दिया।

साथ ही साथ यूपी की शिक्षा व्यवस्था के घटि पन

को और भी पैना करने का इंतजाम कर दिया। 

आज हाल यह है कि लाखों योग्य टीईटी सड़क पर लाठी खा रहे हैं

आज तारीफ के काबिल हैं ये लोग जो जिंदा रखे हुए हैं इस खो चुके मुद्दे को 

एक खो चुके मुद्दे को चंद्र शेखर सिंह, त्रिपुरेष जी पांडेय,

मनोज मौर्या, सीमा रानी, रुखसान खां, सुलतान भाई,

सुनील यादव. राम कुमार पटेल  कुछ नाम जो अभी बाकी  हैं क्षमा करें.

इन्होंने जान हथेली पर रखकर लखनऊ की सभी गलियों में, 

इतनी दहशत पैदा कर दी है कि चुप्पी साधे सोई

हुई योग ममहाराज की सरकार को भी जगा दिया है।

पूज्य महाराज योगी जी ने विधि सम्मत कार्य करने

का आश्वासन दिया है कि,

टीईटी 2011 के बच्चों का अनभला नहीं होने दिया जाएगा। 

यूपी की चौपट शिक्षा व्यवस्था का हाल यह है कि

जिनके टीईटी 2011 में 115 नम्बर हैं वो सड़क

पर लाठी खा रहे हैं,

और जिनके 83 /90 भी नहीं हैं वे मास्साब बन कर ऐंठ रहे हैं। 

बेरोजगार टीईटी 2011 की लड़ाई में बहनों ने अतु सहयोग दिया है, 

इसे कभी भुलाया नहीं जा सकता, क्योंकि यह जो

लाठी खाने वाली भीड़ है यह इन्हीं वीर बेटियों के

दम पर आधारित है। 

 

धन्यवाद

KPSINGH 08072018

 

 

 

 

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