कैसे बनें बहस के बाजीगर?

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कैसे बनें बहस के  बाजीगर? 

कैसे बनें बहस के बाजीगर?

कहा जाता है अगर कोई सकारात्मक बहस करता है

तो लोग उससे बिना प्रभावित हुए नहीं रहते,

लेकिन अगर कोई नकारात्मक बहस करता है तो

लोग उसको बिना मजा चखाए नहीं रहते।

अब फैसला आप पर है।

इतिहास गवाह है कि कि चाहे सावित्री यमराज की बहस हो या

फिर नचिकेता और मृत्यु के बाद क्या होता है इसकी बहस हो।

सभी सफल और सकारात्मक बहसों ने व्यक्तित्व में इजाफा ही किया है ।

इसीलिए आज इस पोस्ट का उद्देश्य यही रखा गया है कि

एक सफल और सकारात्मक बहस कैसे की जाए कि आपको लोग

बहस का बाजीगर ही कहने लगें। 

 

बहस के बाजीगर 

बहस के बाजीगर का मतलब बेमतलब की बहस में पारंगत होना नहीं है,

बल्कि बहस के बाजीगर का मतलब यह है कि यदि कोई

बेमतलब की बहस करना भी चाहे तो आप उसे ऐसा खत्म करने से रोक दें।

एक बहुत प्रसिद्ध कहावत है कि मूर्ख व्यक्ति से बहस करना

यही साबित करता है कि मूर्ख एक नहीँ दो हैं।

इस लिए याद रखें कभी मूर्ख व्यक्ति से बहस न करें

और कभी बेमतलब बहस न करें।

वैसे बहस शूरू होने के घर बाहर कई तरह के कारण हो सकते हैं,

इसलिए कोशिश यही करें कि जब भी बहस करें तो कारण स्पष्ट होना चाहिए। 

आप बहस के बाजीगर सिर्फ कहने या सोचने मात्र से नहीं बन सकते

इसके लिए आपको कुछ आचरण भी विजेता वाला बनाना होगा। 

बहस कैसे करें? 

प्रभावी बातचीत के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले 

राब केंडल कहते हैं कि छोटी छोटी बातों पर बहस करने का मतलब है

कि आप में समझदारी की कमी है ।

राब केंडल ने इसी विषय को अपनी किताब

“ब्लेमस्टार्मिंग वाई कन्वेंशंस गो रांग एंड हाऊ फिक्स देम” में उठाते हैं। 

इनके अनुसार बहस जब बढ जाती है तो दोनों पक्ष,

कोई समाधान तलाशने की जगह एक दूसरे पर आरोप लगाने लगते हैं।

इसका प्रमुख कारण यह होता है कि दोनों ही खुद को सही साबित करना चाहते हैं।

हद तो तब हो जाती है जब कोई भी पक्ष किसी भी तरह का

कोई किंतु, परंतु तक छोड़ने को तैयार नहीं होते। 

बहस से बचना   चाहिए, डरना नहीं चाहिए 

बनें बहस के बाजीगर इसका मकसद यह नहीं है कि या तो आप बहस से डरते रहें

और न ही इसका मतलब यह है कि आप बहस से लिपटते ही रहें ।

कैसे बनें बहस के बाजीगर??

का सच यह है कि आप बहस से केवल बचें आप बहस से डरें कतई नहीं।

बहस से बचने का आशय यह कतई नहीं है कि आप

गलत बात भी मानें या अपने सम्मान से समझौता करें।

बचने का मतलब है कि बहस करते वक्त आप समाधान नजर रखें ।

अधिकतर समाधान दोनों पक्षों के बीच से निकलता है।

कई बार विवाद को सुलझाने का रास्ता जीत में नहीं हार में छिपा होता है । 

रिलेशनशिप एक्सपर्ट डॉ जान गेटमैन कहते हैं कि 96% मामलों में

बहस के शुरूआती तीन मिनट यह बता देते हैं कि बहस करना कितना सार्थक रहेगा। 

नोबेल पुरस्कार विजेता आमर्त्य सेन का विचार है कि अगर

आप से कोई असहमत है तो भी आपको गुस्सा नहीं करना चाहिए।

क्योंकि हरेक व्यक्ति की अपनी सोच होती है । 

शुरुआत में की गई विवेक पूर्ण बातचीत बहस को बढने नहीं देती ।

बहस के बाजीगर बनें मगर कैसे? 

कैसे  बने बहस के बाजीगर सवाल का

जवाब है कि बहस का बाजीगर बनना इतना आसान नहीं है।

अगर आप सचमुच बहस के बाजीगर बनना चाहते हैं तो

🔴आपको बहस की शुरुआत में ही यह समझना होगा कि

बहस व्यक्तिगत न हो तथा संकीर्ण उद्देश्य के लिए भी न हो।

🔴बहस तभी करें जब आपको विषय का ज्ञान हो सुनी सुनाई बातों पर

पागल भी समय नष्ट नहीं करते।

🔴हो सके तो बहस करने के बीच पूर्वाग्रहों को इस मे न शामिल करें। 

कैसे बनें बहस के बाजीगर?इस पोस्ट की यही सीख है  

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 24072018

 

 

 

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