भड़कते हैं लोग भड़काने वाला चाहिए

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भड़कते हैं लोग भड़काने वाला चाहिए

भड़कते हैं लोग भड़काने वाला चाहिए।

हो सकता है आप इच चंद शब्दों को किसी व्यंग की शुरुआत समझें,

या फिर किसी जोकर की डायरी का पहला पन्ना समझ बैठें।

पर हकीकत इससे कहीं अलग है।

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि यह न तो किसी व्यंग की लाइनें हैं

और न ही यह किसी जोकर की डायरी का पहला पन्ना है।

भड़कते हैं लोग भड़काने वाले चाहिए आज की सबसे बड़ी सच्चाई है।

थोड़ा और गहरे उतरने का कष्ट करें तो पता चलेगा कि यह संदर्भ सहित प्रसंग

भारत के वर्तमान राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद के 15 अगस्त 2018 की पूर्व संध्या में

देश के नाम किए गए संबोधन का मार्मिक रहस्य और सच्चाई है। 

भड़कते हैं लोग भड़काने वाला चाहिए।

इसकी सच्चाई अगर जानना है तो हमें अपने राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद जी के

15 अगस्त 2018 की पूर्व संध्या पर किए गए अपने राष्ट्र के नाम

संबोधन में ढूंढ सकते हैं।

राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद ने राष्ट्र के नाम जो संबोधन किया

उसमें उन्होंने पूरी तवज्जो के साथ इस बात  पर विशेष ध्यान दिया कि

लोग बहकावे का धंधा करने वालों की बातों में न आएं।

राष्ट्रपति महोदय ने इस बात की तरफ विशेष ध्यान दिया कि

लोक महत्व के सभी दृश्य हों और हां

गलती से भी वह दृश्य न हों

जिनकी बदौलत समय और समाज का सबसे।

खराब समाचार मिला करता है। 

राष्ट्रपति ने क्या कहा?

राष्ट्र पति के संबोधन में जो सबसे महत्वपूर्ण बात थी
वह यही थी कि 
आज भी लोग दूसरों की बातों मे आकर अपना
भारी से भारी नुकसान कर रहे हैं
लेकिन कभी यह सोचने की जरूरत नहीं महसूस करते कि
आखिर इस भड़काऊ खबर की सच्चाई क्या है।
कुल मिलाकर
आज हमारे देश में भड़काने का भी
धंधा काफी चमत्कृत ढंग से चल निकला है।
केजरीवाल के लोग भाजपा के खिलाफ
भाजपा के लोग केजरीवाल के खिलाफ
यही आइडिया काम कर रहा है। 

भड़कते हैं लोग भड़काने वाला चाहिए का मतलब यह है कि

सोशल मीडिया के इस युग में बहुत कुछ अफवाह से चलने लगा है

और ताज्जुब यह है कि लोगों को आप लाख समझाइए

लोग अफवाह से इतना घुल मिल जाते हैं कि उन्हें अफवाह के अलावा

कुछ भी सही नहीं लगता।

राष्ट्रपति जी ने साफ साफ कहा कि हम और हमारा भारत

आज नाजुक दोर से गुजर रहे हैं इसलिए यह हर भारतीय का कर्तव्य है

कि वह अफवाह के वसीभूत होकर कोई निर्णय न लें बल्कि

अपनी सोच विकसित करके किसी भी अफवह को

तर्क की कसौटी पर कसे तब इसके बाद उसकी तरफ ध्यान दें।

राष्ट्रपति जी ने समाज में झूठी खबरों से होने वाले नुकसान की तरफ भी ध्यान खींचा

और कहा कि अफवाह के फलस्वरूप उत्पन्न उन्माद बेहद जहरीला होता है

इसलिए किसी के बहकावे में आकर फैसला लेने का नहीं

अपनी तर्क क्षमता का प्रयोग करने के बाद किसी

निष्कर्ष पर पहुचने का अब वक्त आ गया है । 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 18082018

 

 

 

 

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