संकल्प की ताकत अद्भुत है

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संकल्प की ताकत अद्भुत है

संकल्प की ताकत अद्भुत है।

अगर आप इसे जानना और पहचानना चाहते हैं तो आप का स्वागत है इस लेख में ।

दोस्तों संकल्प की ताकत अद्भुत है।

इस पर विचार करने के पहले आइए एक अद्भुत किस्से पर गौर करें ।

दोस्तों, एक बहुत ही दुर्व्यसनी व्यक्ति था। 

शराब और सिगरेट का सेवन हद से ज्यादा करता था ।

सच तो यह है कि वह अपनी इस आदत से स्वयं परेशान था।

कई बार उसे खुद अपने आप से घृणा होने लगती थी।

लेकिन ताज्जुब यह था कि उसे जैसे ही शराब की बोतल या सिगरेट का पैकेट दिखता

तो वह अपना होसोहवास खो देता था और वह खुद को रोक नहीं पाता था।

एक दिन यही आदमी बस टाइम पास करने के अंदाज से

एक किताब के पन्ने पलट रहा था तभी अचानक उसने एक वाक्य पढा  ।

जो इस प्रकार है, 

” संकल्प में बहुत शक्ति है, इसका अभ्यास शुरू तो करो फिर देखना इसका चमत्कार। ” 

उस व्यक्ति ने इस पर विचार प्रारंभ किया ।

कई दिनों तक उसका विचार मंथन चलता रहा ।

हां और न के ही बीच वह भटकता रहा।

 

वह यह तय नहीं कर पा रहा था कि वह इसकी शुरुआत कैसे करे ?

न सिगरेट छूट रही थी न शराब।

एक दिन सड़क पर चलते चलते उसने सोचा

अच्छा चलो,, आज से सड़क पर चलते चलते सिगरेट नहीं पीऊंगा।

वह इस बात का मन ही मन ख्याल रखने लगा।

उसके मन ने कई बार लुभाया लेकिन उसके दिमाग ने हर बार

उसके संकल्प की याद दिलाता रहा।

और वह अंतत:रुक गया।

वह अब लम्बी लम्बी दूरी पैदल ही तय करने लगा और उसने सिगरेट नहीं पी।

उसे अपनी इस सफलता पर बडी़ खुशी हुई।

अब वह आगे बढने लगा।

उसने अब तय किया कि वह सुबह केवल दो सिगरेट पिएगा ।

इसे भी वह पूरा करने में सफल रहा।

सारांश यह है कि वह लगातार अपनी सिगरेट पीने

की आदत को कम करता गया और उसे सफलता मिलती गई।

एक ऐसा भी दिन आया जब उसने पूरी तरह से

सिगरेट छोड़ दिया और पूरी तरह से मुक्ति हासिल कर ली।

संकल्प शक्ति के चमत्कार ने उसका साहस बढा दिया ।

अब वह शराब की तरफ ध्यान देने लगा  तो यहां

भी उसे अपने मन के प्रलोभनों ने पहले रोकने की कोशिश की।

लेकिन चूंकि उसके मस्तिष्क के संकल्प ने उसे

पूरी तरह से जगा दिया था सो वह शराब से भी मुख मोडने में पूरी तरह  कामयाब रहा।

इसके बाद हुआ यह कि वह व्यक्ति संकल्प शक्ति

का न केवल भक्त बना बल्कि उसका प्रचारक भी बन गया था।

उसे देखकर सभी लोग भी संकल्प की ताकत को मानने पर मजबूर थे ।

संकल्प शक्ति क्या  है?? 

संकल्प शक्ति वास्तव में वह मंत्र है जो आपको जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफलता दिला सकती है।

वैज्ञानिकों , चिकित्सकों तथा मनोवैज्ञानिकों ने भी संकल्प शक्ति की प्रसंसा की है।

सच ही है क्योंकि इससे बड़े बडे़ चमत्कार होते देखे गए हैं।

एक चिकित्सक ने लिखा है कि, 

“सच्चाई यह है कि  मनुष्य की सूक्ष्म ऊर्जा जिसे प्राण ऊर्जा भी कहते हैं, 

जिसमे इतनी सामर्थ्य  है कि उसके सहारे न केवल खुद को रोग मुक्त किया जा सकता है

बल्कि दूसरों की रोग व्याधियों पर भी निमंत्रण पाया जा सकता है।

संकल्प शक्ति से हम जो प्राण ऊर्जा पैदा कर सकते हैं

वह हमें सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है । हमारा मनोबल बढाती है।

हमारे अंदर विश्वास की ज्योति जलाती है ।

संकल्प शक्ति हमें बड़ी से बड़ी बाधा पार करने के लिए

अंतत:जोश जज्बा और जुनून देती है।

यही संकल्प की अद्भुत ताकत है। 

विद्वानों की नजर में संकल्प शक्ति 

संकल्प की ताकत अद्भुत है इसे और भलीभांति समझने के लिए,

आप चाहें तो कुछ खास लोगों की संकल्प के बारे में राय ज्ञात कर सकते हैं।

एक विद्वान संकल्प शक्ति के बारे में लिखते हैं कि इसे

प्रारंभिक तौर पर इच्छा शक्ति के रूप में अनुभव किया जा सकता है ।

जब आप किसी काम को करने की ठान ही लेते हैं तो सबसे पहले

एक पक्का संकल्प लेना होता है।

इसके बाद आपकी इच्छा शक्ति बलवती होने लगती है।

यहीं पर एक करंट का काम करती है संकल्प शक्ति।

जिसके दम पर आप अंतत:विजेता बनने की राह में अग्रसर होने लगते हैं।

इस लिए हम कह सकते हैं कि संकल्प की ताकत अद्भुत है। 

संकल्प को समझिए इस तरह 

संकल्प की ताकत के बल पर दुनिया में अनेकों लोगों ने इतिहास रचाई है।

आखिर धनुर्धर एकलव्य की कहानी किसे नहीं पता।

हमारे सामने दशरथ माझी, मैरीकाम, पीटी ऊषा भी संकल्प की साक्षात प्रतिमूर्ति हैं।

मार्को पोलो को कोन नहीं जानता जिसने सैकड़ों कठिनाइयां झेलने के बाद भी

दुनिया को चीन, रूस, बर्मा, जावा, सुमात्रा,

श्री लंका, मेडागास्कर के बारे में जानकारी दी।

कोलम्बस ने वेस्टइंडीज के अलावा अमेरिका की भी खोज की थी ।

वास्कोडिगामा ने पूरी दुनिया को भारत जाने का रास्ता बताया था।

यह जेम्स क्रुक के संकल्प की अद्भुत ताकत का ही परिणाम है कि

उसने पूरी दुनिया के लिए पूर्वी आस्ट्रेलिया, ताहिती द्वीप  न्यूजीलैंड की खोज की थी ।

क्या आपको पता है कि विश्व का सबसे बड़ा  रेगिस्तान सहारा रेगिस्तान है,

जिसे ह्यूक्लैपरटन ने अकेले दम पर पार किया था।

इसे ही कहते हैं संकल्प की ताकत अद्भुत है।

इसे महात्मा गाँधी जी के शब्दों में कहें तो महात्मा गांधी यह सदैव कहते थे कि,

“दृढ़ संकल्प एक गढ़ के समान है जो कि भयंकर प्रलोभनों से आपको बचाता है।

दुर्बल और डावांडोल होने से भी हमें बचाता है हमारा खुद से किया गया संकल्प ।

कहते हैं कि सत्य संकल्प ईश्वर के प्रति निष्ठा के समान है  ।।।। 

 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 01082018

 

 

 

 

 

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