सात नुस्खे हार न मानने के

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सात नुस्खे हार न  मानने के

 

सात नुस्खे हार न मानने के सिर्फ एक हेडिंग या शीर्षक मात्र नहीं है, 

बल्कि इसे आप ध्यान से पढेंगे तो निश्चित ही आपको इसमें कामयाबी के सूत्र मिलेंगे ।

क्योंकि “हार न मानना “जैसे जुमले बहुत घिसे-पिटे फार्मूले लगते हैं ।

लेकिन इन्हें बार बार दोहराए बिना काम  भी नहीं चलने वाला,

क्योंकि यही एक मात्र वह तरीका है, जिससे आप जिन्दगी में आगे बढ़ सकते हैं ।

जरा सोचिए, देश को आजादी यूं ही नहीं मिली बल्कि सच कहें तो, 

इसमें जिजीविषा के धनी लोगों के प्रयास शामिल हैं ।

आजादी के दीवानों के सामने कई बाधाएं आईं ,लेकिन आजादी के दीवानों ने हार नहीं मानी, 

और वे अंत में अपने इसी नजरिये की बदौलत हमारे नायक बन गए ।

सच बताना, क्या आप भी अपने पथ पर अडिग रहने की कला में महारत हासिल करना चाहते हैं?

अगर हां, तो यहां दी गई कुछ बातों को अपनी जीवन शैली बनाने को तैयार हो जाएं, ,,

रुकें जरूर लेकिन भाग खड़े न हों

किसी भी प्रयास में अगर अपने कदम थोड़ा वापस खींच लें, 

तो समस्या के नए पहलू भी दिखाई देने लगते हैं ।

इससे आप को एक नई रणनीति बनाने के लिए सही तथ्य और समझ मिलती है ।

इस अल्प विराम से आपको अपनी समझ और दम,

दोनों एक साथ फिर से इकट्ठा कर एक और, कदम रखने की हिम्मत मिलती है ।

सच कहूं तो थोड़ा थमना भी एक हथियार है, जिसे अधिकतर योद्धा इस्तेमाल करना भूल जाते हैं ।

जिन्दगी हमारे हिसाब से नहीं चलती ।

कभी-कभी तो ऐसा भी होता है कि सब कुछ गड़बड़ दिखाई देने लगता है ।

ऐसे मौकों में थम जाना कोई बुरा नही है ।

थोड़ा भावनात्मक तथ्यों में कहूं तो जब हमें बाधा मिलती है,

तो निराशा में रोने, चिल्लाने में भी कोई बुराई नहीं है ।

पर इसका मतलब यह भी नहीं कि रो दिया तो सब खत्म ।

इसके बाद खुद को संभालना चाहिए और फिर आगे बढ़ना चाहिए ।

हमें इस जगह इस बात को जरूर दोहराना चाहिए

विजेता कभी खेल नहीं छोड़तेऔर खेल छोड़ने वाले कभी विजेता नहीं बनते “

अपने लिए और दूसरों के लिए सच्चे रहें

अक्सर लोग प्रयास छोड़कर भाग खड़े होते हैं क्योंकि वे न तो अपने प्रति,

न ही आसपास के दूसरों के प्रति ईमानदारी बरतते हैं ।

झूठ या गलतफहमी को ही सच मानकर अपने चारों तरफ एक दीवार खड़ी कर लेते हैं ।

आप जो हैं, जो चाहते हैं, और जो महसूस करते हैं ,उसे पहले उसकी सच्चाई के साथ खुद स्वीकार करें ।

अपनी गलतियों को समझें और स्वीकार करें और उन्हें सुधारने की कोशिश करें ।

क्योंकि अगर आप अपनी गलती छिपाते रहेंगे तो आगे बढना मुश्किल ही नहीं असम्भव भी हो जाएगा ।

सकारात्मक और सरल बनें

हार न मानने के सात नुस्खे में अगला विचार है कि हमें सकारात्मक होना चाहिए ।

सनक भरी इस दुनिया में सकारात्मक होना बेहद फायदेमंद होता है ।

दरअसल संपत्ति के लिए यह एक चुंबक की तरह काम करता है ।

इसका मतलब यह भी नहीं है कि आप आखें बंद कर लें और बस प्रसन्न रहें ।

इसका मतलब है कि भले ही आपके चारों तरफ हाय-तौबा मची हो,

आप अच्छी चीजों पर ध्यान केंद्रित रखें ।

आपने नकारात्मकता को यदि हावी होने दिया तो सब कुछ छोड़कर भागने का मन होने लगेगा ।

जिजीविषा के धनी लोगों के साथ रहें 

सात नुस्खे हार न मानने की अगली खास बात यह है कि

“आप उन पांच लोगों का औसत होते हैं जिनके साथ आप अपना अधिकतर समय बिताते हैं “।

अगर आप खेल को बीच में छोड़कर भागने वालों के साथ समय बिताते हैं, 

तो फिर आप छोड़कर भागने की कला में निपुण हो जाएंगे और जिन्दगी भर यही करते रहेंगे ।

आप खुद विचार करें कि आप किसके साथ अपना समय बिताते हैं,

यदि आप भगोड़े लोगों की सोहबत में हैं तो इसे बदल डालें,

और कोशिश करके ऐसे लोगों का साथ करें तो डटे रहना ही बस जानते हों ।

ऐसे लोग सकारात्मकता ऊर्जा से लबालब होते हैं, आपको इन्ही का साथ पकड़ना चाहिए ।

अपनी प्रेरणा कम न होने दें

सात नुस्खे हार न मानने की अगली सीख है कि आप खुद को हर दिन प्रेरित करते रहें ।

अपने मन और मस्तिष्क को ऐसी खुराक दीजिए कि आप हर पल प्रेरणा प्राप्त करें ।

महान लोगों की जीवनयापन की कहानी इसका सरल और अचूक निशाना है ।

खुद के आसपास ऐसी चीजें रखें जो आपको बार-बार यह याद दिलाती रहें कि प्रयास कभी छोड़ना नही है ।

एक बड़ा उद्देश्य बनाकर रखें 

एक ऐसा उद्देश्य आपको बना कर रखना चाहिए जो आप से भी बड़ा हो ।

सात नुस्खे हार न मानने की सीख में यही अगली कड़ी है ।

इसका मतलब यह है कि आप के पास ऐसा उद्देश्य होना चाहिए जिससे मानवता का विकास हो ।

जरा ठहरिए ऐसा उद्देश्य आपको खुद ही ढूंढना होगा जो आपकी अपनी आत्मा को छूता हो ।

क्योंकि

“एक नायक वह है, जो अपना जीवन खुद से ज्यादा बड़े किसी उद्देश्य के लिए समर्पित कर देता है “।

हार न मानें यही है सातवां नुस्खा

हार न मानने का अंतिम और लाजवाब नुस्खा है ।

हार न मानना ।यह जितना उलझन भरा है उतना ही सरल है ।

सबसे पहले आप अपनी शब्दावली से “छोड़ना “शब्द ही हटा दीजिए,

और इसे किसी तरह का अपना विकल्प ही न बनाएं ।

जब कभी भी हार मिले तो बस एक बात याद रखें कि

हार आपके काम करने के तरीके को मिली है आपको हरगिज नहीं ।

इसके बाद आप इस बात की पड़ताल करें कि आप

अपने इस तरीके में कहां और कैसे बदलाव करें ताकि अगली बार परिणाम कुछ और ही हो ।

और हां मेरी आखिरी राय आपके लिए यही है कि जब

तक दिल की धड़कन बरकरार है तो आपके लिए शुरुआत का एक सुअवसर है ।

निष्कर्ष यही है कि आप यदि सचमुच कुछ हासिल करने की इच्छा रखते हैं,

तो आपको इस बात की गारंटी खुद लेनी होगी कि आपको केवल और केवल जीतना है ।

हार की हद तक बस हार नहीं मानना है ।

धन्यवाद

KPSINGH 04032018

 

 

 

 

 

 

 

 

7 COMMENTS

  1. बहुत ही सुंदर सूत्र आपने अपनी इस पोस्ट में बताए हैं।
    वास्तव में
    “हार की हद तक भी हमें हार नहीं माननी है”
    फिर चाहे वो कोई भी क्षेत्र हो।

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