अगर आप खुद से नहीं हारे तो जरूर जीतेंगे

4
136

 

अगर आप खुद से    नहीं हारे तो जरूर    जीतेंगे 

अगर आप खुद से नहीं हारे तो जरूर जीतेंगे यह सुनने में जरा अजीब लगता है ।

लेकिन अगर हम इस बात पर विचार करें तो हमें इसका मतलब समझ में आ सकता है।

अगर आप खुद से नहीं हारे तो जरूर जीतेंगे ।

इसका मतलब यह है कि सबसे पहले आप को यह समझना होगा कि

जीत और हार के लिए कोई दूसरा जिम्मेदार नहीं है बल्कि सिर्फ आप जिम्मेदार होते हैं।

स्थितियां और परिस्थितियां तभी आपके लिए सकारात्मक और नकारात्मक बनती हैं

जब आप खुद अपने लिए सकारात्मक और नकारात्मक सोच पैदा करते हैं ।

दुनिया की कोई भी ताकत उस आदमी को कामयाब या विजेता नहीं बना सकती

जो खुद कामयाब और विजेता नहीं बनना चाहता ।

इसी प्रकार दुनिया की कोई भी हस्ती उस आदमी को कामयाब और विजेता बनने से नहीं रोक सकती

जिसने यह ठान लिया है कि उसे कामयाब होना ही है।

खुद का आसरा है  सबसे बड़ा 

अगर आप खुद से नहीं हारे तो जरूर जीतेंगे ।

इसका मतलब यह भी होता है कि आपकी प्रेरणा और संकल्प ही

आपकी सबसे बड़ी ताकत होती हैं।

और यह दोनों तत्व आपके लिए तभी कारगर साबित होंगे

जब आपके अंदर जीने की जिजीविषा के साथ साथ जीतने का जुनून और जज्बा होगा।

इसे आप इस तरह भी समझ सकते हैं।

जब आपके अंदर यानी शरीर में विटामिन अबजर्ब करने की ताकत नहीं होती

तो उस समय डाक्टर कोई ऐसी दवा नहीं लिखता ।

वह सबसे पहले शरीर के लिए वह दवाएं लिखता है

जो आपके शरीर को दवा स्वीकार करने की ताकत प्रदान करें।

यानी शरीर में ताकत वाली चीजें खाने की भी ताकत होना चाहिए।

वर्ना आप चाहें जितनी भी मंहगी और ताकतवर चीजों प्रयोग कर लें

परिणाम की जगह शून्य ही लिखा रहेगा। 

जीतने की जिद में

जुनून और जज्बा हो

तो दूर खड़ी मंजिल भी

पास नजर आती है।।

जीतने की हसरत में

अगर कहीं दहसत हो

तो पास खड़ी मंजिल भी

दूर चली जाती है ।। 

दोस्तों  जिंदगी का गणित बहुत सीधा होता है।

जिंदगी उसी को कामयाब बनाती है जो सच में काम होना चाहता है।

और कामयाब वही होना चाहता है जिसके अंदर जीतने की लालसा है।

और जीतने की लालसा उसी के पास होती है

जिसके अंदर प्रेरणा है।

और प्रेरणा उसी के पास होती है जिसे कुछ पाने की चाहत है।

जरा ठहरिए।।।

यहीं पर एक आम आदमी और खास आदमी में अंंत हो जाता है।

हालांकि दोनों जिंदगी बेहतर चाहते हैं लेकिन दोनों के बीच अंतर यह होता है कि

आम आदमी सिर्फ  बेहतर जिंदगी चाहता है

वहीं खास आदमी जिंदगी को बेहतर बनाता है। 

 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 06082018

 

 

 

 

4 COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here