विश्व जल दिवस :जल है तो कल है

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 विश्व जल दिवस हम क्यों मनाते हैं? 

विश्व जल दिवस हम क्यों मनाते हैं? इसका जवाब सबको पता है ।

क्यों कि दुनिया का हर संवेदनशील प्राणी बिना जल के नहीं रह सकता।

सरल शब्दों में कहें पानी संसार की वह अमूल्य धरोहर है जिसके बिना ,

कोई भी संसार का जीवित प्राणी अपनी सांसों की कल्पना तक नहीं कर सकता ।

कहने का मतलब यही है कि हम,

विश्व जल दिवस सिर्फ यह याद रखने के लिए मनाते हैं कि हम यह कभी न भूलें कि विज्ञान के इस युग में भी हम बिना प्राकृतिक जल के जीने की कल्पना तक नहीं कर सकते ।

प्रथम विश्व जल दिवस 

हम विश्व जल दिवस क्यों मनाते हैं? इसका उत्तर जानने के बाद ,

बारी आती है विश्व जल दिवस की शुरुआत की ।

तो सच्चाई यह है कि दुनिया का पहला जल दिवस 1992 में ,

ब्राजील के खास शहर रियो डे जेनेरियो में आयोजित ,

संयुक्त राष्ट्र की पर्यावरण और विकास पर आधारित बैठक में

“एजेंडा 21 “के तहत पहली बार विश्व जल दिवस मनाए जाने का प्रस्ताव रखा गया था ।

1998 में संयुक्त राष्ट्र आम सभा ने पहले विश्व जल दिवस की घोषणा की थी ।

ध्यान रहे प्रत्येक वर्ष मनाए जाने वाले विश्व जल दिवस की थीम अलग अलग होती है ।

विश्व जल दिवस और विश्व जल की स्थिति 

धरती पर स्वच्छ जल की उपलब्धता बेहद सीमित है ।

बावजूद इसके हकीकत यह भी है कि फिर भी हम पानी को बर्बाद करने से खुद को रोक नहीं पाते ।

संयुक्त राष्ट्र संघ के मुताबिक दुनिया में घरों से निकलने वाला 80 %दूषित जल स्वच्छ पानी के स्रोत में मिला दिया जाता है ।

परिणामस्वरूप एक बड़ी आबादी के सामने उसके जीवन का ही संकट बन जाता है ।

जरा सोचिए अगर इस दूषित पानी को संशोधित कर के ,

दुबारा प्रयोग लायक बना दिया जाए तो करोड़ों लोगों के लिए जल उपलब्ध हो सकता है ।

पानी की किल्लत का असली दोषी 

पानी की किल्लत का असली दोषी सिर्फ और सिर्फ मनुष्य है ,

और उस मनुष्य की तमाम आदतें भी दोषी हैं ,जो  नीम चढे करेले को सिद्ध करती हैं ।

हम हर दिन तमाम दिवसों की भांति इस दिवस को भी मनाने लगे हैं ,

लेकिन हमारा विश्व जल दिवस मनाना तभी सही साबित होगा।

जब हम संयुक्त राष्ट्र संघ की इस चेतावनी पर भी विचार करेंगे ।

संयुक्त राष्ट्र संघ की चेतावनी 

विश्व जल दिवस पर हर वर्ष कुछ बहस होतीं हैं कुछ चेतावनी दी जाती हैं ,

लेकिन यहां कुछ ऐसी चेतावनी संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा दी गई हैं कि,

जिन्हें नजरअंदाज ही नहीं किया जा सकता ।

संयुक्त राष्ट्र संघ ने आगाह किया है कि यदि हमने पानी को बर्बाद करते रहेंगे,

तो वह दिन दूर नहीं जब दूध, घी से भी महंगा पानी हो जाएगा ।

समुद्री जीवन पर संकट

संयुक्त राष्ट्र संघ ने पूरी दुनिया को आगाह किया है कि सीवेज के गंदे पानी में शैवाल काफी रफ्तार से उगते हैं ।

परिणाम स्वरूप समुद्र के  अंदर वाले जीवों को पर्याप्त रोशनी नहीं मिल पाती और उनका बेहतरीन  ,

जीवन नष्ट हो जाता है इस लिए इस पर पूरी दुनिया को चिन्ता करनी चाहिए कि हमारे साथ ही साथ समुद्री जीवों का भी कल्याण होना सुनिश्चित हो ।

कुछ आंकड़े पानी के

●66 करोड़ ऐसी वैश्विक आबादी है जिसे स्वच्छ पानी उपलब्ध नहीं है।

●दुनिया भर में दूषित पानी पीने को मजबूर लोगों की कुल संख्या लगभग दो अरब है ।

●साढे आठ  लाख लोग प्रतिवर्ष दूषित पानी की बीमारियों से मरते हैं ।

●अनुमान है कि 2030 तक विश्व जल मांग मे 50%तक इजाफा हो सकता है ।

●धरती में  पानी की उपलब्ध कुल मात्रा का 70 %हम खेती में बर्बाद कर देते हैं ।यहां बर्बाद का मतलब जरूरत से ज्यादा पानी खर्च करने से है ।

●इससे बड़ी कोई और बात क्या हो सकती है कि दुनिया के प्रत्येक 10 लोगों में 4 लोग दूषित पानी की समस्या से प्रभावित हैं ।

●पूरी दुनिया में प्रति वर्ष करीब चार लाख बच्चे डायरिया से मर जाते हैं जिनकी उम्र पांच साल से कम होती है ।

धन्यवाद

लेखक : के पी सिंह

23032018

 

 

 

6 COMMENTS

  1. कुछ दिनों पहले इसी समस्या से सम्बन्धित मैनें एक विडियो देखा था जिससे हर व्यक्ति को पानी की कीमत का अन्दाजा लग जाता | उस विडियो में दिखाया गया था कि आने वाले समय में बहु बेटियाँ अपनी आबरु एक बोतल पानी के बदले बेचेंगी |यदि हम अभी से सतर्क नहीं हुए तो ये कल्पना साकार भी हो सकती है |

  2. छत का पानी जमीन में सीधे पहुंचे इसके लिए देश की सभी पंचायतों,नगर पालिकाओं, म्युनिसिपल कारपोरेशन को चाहिए कि वे प्रत्येक घर में छत से आने ड्रेन पाइप को जमीन के अंदर करीब 10 से 12 फुट तक बोर (पाइप के लिए गढ्ढा )करवाएँ इससे छत में बारिश से एकत्रित जल जमीन के अंदर जाकर जल संग्रहण के स्तर में वृद्धि करेगा तथा नालियों व सड़कों पर बारिश के पानी की उपलब्धता कम करेगा जिससे बाढ़ जैसी स्थिति निर्मित नहीं होगी तथा बारिश के पानी सही सदुपयोग होगा।

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