इतिहास का सबसे काला दिन

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इतिहास का सबसे काला दिन 

इतिहास का सबसे काला दिन कोई और नहीं बल्कि 6 अगस्त 1945 है।

इसी दिन अमेरिका ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 06081945 को

जापान के शहर हिरोशिमा में दुनिया का पहला परमाणु बम गिराया था ।

इस बम का नाम लिटिल ब्वॉय था ।

इस बम का वजन 4400 किलोग्राम था।

इस बम की लम्बाई 10 फीट तथा इसका व्यास 28 इंच था।

इस बम के हमले में 1.29 लाख लोग मारे गए थे ।

इस बम के धमाके से 15 किलो टन टीएनटी जैसी ऊर्जा मुक्त हुई थी। 

गजब संयोग

गजब संयोग इस बात का है

क्योंकि जिस दिन दुनिया का पहला परमाणु बम मानवता को

नष्ट करने के लिए फेंका गया था ।

कभी इसी दिन यानी 6 अगस्त 1766 को ही दुनिया को पहली बार

परमाणु का विचार देने वाले महान वैज्ञानिक जान डाल्टन का जन्म हुआ था।

ब्रिटिश वैज्ञानिक और केमिस्ट जान डाल्टन का जन्म उसी दिन हुआ था

जिस दिन परमाणु बम धरती पर पहली बार गिराया गया था।

जान डाल्टन ने ही पूरी दुनिया को सबसे पहले यह बताया था कि

कोई भी पदार्थ बेहद छोटे छोटे कणों से बना होता है।इन कणों को ही परमाणु या एटम कहा जाता है।

यह वास्तव में बहुत बड़ी उपलब्धि थी अर्थात बहुत बड़ी खोज थी।

जान डाल्टन की मृत्यु 27 जुलाई 1844 में हुई थी।

जान डाल्टन ने जिस बात का खुलासा पूरी दुनिया के सामने किया था।

संयोग देखिए वही बात धरती की तबाही का मुकम्मल कारण बन गई । 

जापान की जहमत 

इतिहास का सबसे काला दिन ऐसे ही नहीं बना 6 अगस्त 1945।

द्वितीय विश्व युद्ध जब चल रहा था और जापान लगातार

यूरोपीय ताकतों का जानी दुश्मन बना हुआ था तभी अमेरिका ने

जापान के शहर हिरोशिमा में 6अगस्त 1945 को परमाणु बम से हमला कर दिया ।

इतना ही नहीं इसके तीसरे ही दिन यानी 9 अगस्त 1945 को अमेरिका ने

जापान के नागाशाकी शहर में दूसरा परमाणु बम गिरा कर

तबाही का कोहराम मचा दिया था । 

सच पूछिए तो अमेरिका द्वारा किया गया यह कार्य पूरी मानवता के खिलाफ था।

इतिहास का सबसे काला दिन पूरे इतिहास को काला करने वाला दिन था। 

ऐसा घृणित कार्य उसे किसी भी कीमत में नहीं करना चाहिए था ।

क्योंकि इसका सबसे बड़ा नुकसान सिर्फ जापान को भले ही भोगना पड़ था।

लेकिन इस बात से पूरी दुनिया इन्कार नहीं कर सकती कि

अमेरिका द्वार की गई मानवता के खिलाफ इस कार्यवाही ने

एक ऐसी राक्षसी प्रवृति को जन्म दिया था जिसकी वजह से

100 सालों बाद भी आदमी सुरक्षित नहीं है ।

और इतिहास का यह काला दिन और भी भयानक काला न हो जाए । 

आज 6 अगस्त को याद करने की जरूरत इस लिए नहीं है कि

  यह जापान की तबाही का दिन था

बल्कि इस लिए याद रखने की जरूरत है कि वर्तमान और भविष्य को

सुखमय बनाने की हमारी कोशिश कभी कमजोर न हो जाए।

और यह इतिहास का सबसे काला दिन और भी काला न हो जाए। 

 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 06082018

 

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