कहानी पोस्टकार्ड की

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कहानी पोस्ट कार्ड की 

कहानी पोस्टकार्ड की यह है कि आज यह कहानी ही एक कहानी बन गई है

कभी जमाना ऐसा भी था कि इस छोटे कागज के टुकड़े पर,

दिल और दिमाग की ताम उलझन और हलचल को हम आसानी से उतार दिया करते थे

और अपने राजकुओं की इस पूंजी को बड़ी ही बचा,

अपनाने के लिए एक दूसरे को बचाए रखने के लिए कोई नहीं

आज यह कहानी केवल एक कहानी है।

क्योंकि इन्टरनेट के जमाने में चिट्टी की बात ही बेमानी है।

पहले जो पोस्ट मैन की प्रतीक्षा में भी कभी भी थकावट नहीं थे,

आज थकना तो दूर उसकी कल्पना ही बोरियत का समुंदर लगती है।

आज का जो कि पोस्टकार्ड के बारे में बात कर रहा है उसका इतिहास 150 साल का इतिहास है

इसलिए आइए, इस बारे में चर्चा करें ताकि इतिहास बनने के रास्ते पर जाए,

अग्रेषित इतिहास में हमारा भी इतिहास शामिल है।

दोस्तों इस छोटे से संदेश के समंदर अर्थात् 1 अक्टूबर 2017 को पोस्टकार्ड,

अपनी उपस्थित की 148 साल पूरे कर रहे हैं

हां यह बात जरूर है कि सोशल नेटवर्किंग का यह काल अमृत कांत का रजुआ भी अब इसका इस्तेमाल करता है,

न तो करे और न ही करना चाहता है

शायद इसीलिए आज इसका उपयोग बेहद न के बराबर हो गया है।

दुनिया का पहला पोस्ट कार्ड 

दुनिया के पहले पोस्टकार्ड का जन्म गांधी जी के जन्म के ठीक एक दिन पहले हुआ था।

जी हां दोस्तों कहानी पोस्ट की यह है कि 1 अक्टूबर 1869 को,

आस्ट्रिया में विश्व के पहले पोस्टकार्ड को जारी किया गया था।

कोलबाई स्टीयर नामक एक आस्ट्रिया प्रतिनिधि का मानना ​​है कि सबसे पहले पोस्ट का विचार आया था।

एक तथ्य के अनुसार सबसे पहले इसी व्यक्ति ने,

किसी पोस्टकार्ड जैसे वस्तु के बारे में सोचा था।

ताकि संदेश को आसानी से संप्रेषित किया जा सके।

कहा जाता है कि स्टीयर ने अपनी इस विचार को,

सैन्य अकादमी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर डाक्टर इमानैन ने कहा था।

यह विचार इमानुअल को इतना शानदार लग रहा है कि उन्होंने,

26 जनवरी 1869 में एक समाचार पत्र में प्रकाशित लेख।

लेख का प्रभाव 

 

पोस्ट की कहानी की कहानी यह है कि इमानुअल के लेख इतने प्रभाव में हैं,

आस्ट्रिया डाक विभाग इस विचार पर युद्ध स्तर से विचार-विचार लगा

और अंत में 1 अक्टूबर 1869 यानी महात्मा गांधी के जन्म के समय,

ठीक एक दिन पहले दुनिया के पहले पोस्टकार्ड की पहली प्रति जारी किया गया था।

और फिर यहीं से शुरू हुआ पोस्टकार्ड की सहाना सफर की

पहला पोस्ट कार्ड 

कहते हैं कि दुनिया के सबसे पहले पोस्टकार्ड का रंग पीला था।

पोस्टकार्ड की कहानी की कहानी यह है कि इसका आकार 122 × 85 मिलीमीटर था।

इसकी आकार प्रकार बिल्कुल आज के पोस्टकार्ड की तरह ही है।

अर्थात् एक तरफ पूरे भाग में संदेश लिखने के लिए स्थान होता है

इसके दूसरी ओर का पृष्ठ भूमि दो भागों में बंटी था

आधे भाग में पता लिखने की जगह निर्धारित है तो आधे भाग में,

पुनः संदेश के लिए स्थान छोड़ा गया था

इसकी लोक प्रियता 

इसकी 

कि पहले तीन महीनों में इसकी तीन लाख प्रतियों को बेचे गए थे

अस्ट्रिया हंगरी में पोस्ट की बढ़ती लोकप्रियता के कारण यह कई अन्य देशों ने भी शुरू किया था।

इंग्लैंड में यह पागलपन की हद तक लोकप्रिय है।

कहा जाता है कि इंग्लैंड में पोस्टकार्ड की पहली दिन बिक्री 5 लाख 75 हजार थी।

बात अगर भारत की करें तो भारत में पहली बार पोस्ट कार्ड 1879 में जारी किया गया था।

जिसकी कीमत कुल तीन पैसा थी और इसका रंग भूरा था।

इसमें ईस्ट इंडिया कंपनी भी लिखा हुआ था ।

 

धन्यवाद

KPSINGH 20042018

 

 

 

 

 

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