जलियांवाला बाग हत्या कांड

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जलियांवाला बाग हत्या कांड 

जलियांवाला बाग हत्या कांड भारतीय राजनीति   व इतिहास का वह अध्याय है,

जिसे कभी भुलाना तो दूर भुलाने के बारे में सोचा तक नहीं जा सकता है।

आप इसकी प्रबलता और प्रासंगिक को केवल इस बात से समझ सकते हैं,

कि फरवरी 2013 में इस दुखद घटना के94 साल

बाद डेविड कैमरन जलियांवाला बाग हत्या कांड

में मारे गए शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने गए थे।

याद रखें कि ऐसा करने वाले वह पहले ब्रिटिश प्रधानमंत्री मंत्री हैं।

इतना ही नहीं उन्होंने भी इस घटना को शर्मनाक बताया था। 

जलियांवाला बाग की प्रष्ठभूमि

 

मार्च 19 19 में ब्रिटिश सरकार ने जब अपने सबसे

खराब कानूनों में भी  सबसे  ज्यादा  खराब कानून

यानी रौलेट एक्ट को पास किया, तो भारतीय जन बौखला गए।

क्योंकि इस कानून में सरकार के खिलाफ षडयंत्र

करने वालों के लिए सख्त कार्रवाई की शिफारिस थी।गांधी जी ने इसे काला कानून कहा था। 

अंग्रेजी चालाकी और धूर्तता 

इसका जमकर साधारण भारतीय लोगों ने  विरोध

किया, खास लोग तो अंग्रेज़ी तलवे चाटने के आदी थे।

इस कानून का यद्यपि पूरा देश विरोध कर रहा था

लेकिन पंजाब में इसका सबसे भयंकर विरोध हो रहा था।

अंग्रेजी सरकार ने इस बढते आक्रोश को दबाने के

लिए उसी वक्त पंजाब के दो बड़े नेताओं को बड़ी चालाकी और धूर्तता से गिरफ्तार कर लिया।

इन दोनों नेताओं के नाम सत्य पाल और सैफुद्दीन किचलू थे।

चूंकि यह नेता वाकई जनता के बीच सम्मानित थे

इस जनता के बीच बेहद कूतूहल था कि न जाने ये अंग्रेजी सरकार इनके साथ क्या करेगी।

इनकी गिरफ्तारी के विरोध में 13 अप्रैल 1919

को अमृतसर के जलियांवाला बाग नामक स्थान में लोग आम सभा कर रहे थे।

चूंकि यह दिन वैसाखी का था इसलिए बहुत बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।

इतिहास का सबसे कायर सैनिक 

जब जनरल डायर को इस बात की सूचना मिली

तो वह अपने सिपाहियों के साथ इस भीड़ को ही चारों तरफ से घेर कर गोली चलवा दी।

इस जलियांवाला बाग नामक स्थान में केवल एक ही निकलने का रास्ता था।

फलस्वरूप लोग भाग नहीं पाए और हजारों लोगों को उस डायर ने भून डाला।

यही है जलियांवाला बाग हत्या कांड जिसे कोई कभी नहीं भूल सकता। 

कायर डायर का तांडव 

इतिहास की हकीकत यह है कि करीब 10 मिनट तक अंधाधुंध फायरिंग होती रही।

करीब 1650 राउंड गोली चली थी जिसमें 1000 से ज्यादा लोग मारे गए थे।

इसमें घायलों की संख्या 1100 थी,

लेकिन डायर की कायरता की हद यह थी कि

इसमें महिलाएं और बच्चे अधिक मारे गए थे।

पंजाब के तत्कालीन लेफ्टिनेंट गवर्नर माइकल ओ डायर ने डायर की कायरता को सही ठहराया था।

ध्यान देने की बात यह है कि दोनों अधिकारियों का नाम डायर था इसलिए भ्रमित न हों। 

जलियांवाला बाग हत्या कांड के सरकारी आंकड़े 

जलियांवाला बाग हत्या कांड के सरकारी आंकड़ों की बात करें तो यह निहायत झूठे हैं।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार कुल 379 लोग मारे गए तथा 1000 घायल थे।

इस घटना के बाद गोलीकांड करने वाले डायर को हटा दिया गया था।

लेकिन 1927 में मरने वाले तथा गोली चलवाने

वाले डायर का उसके देश में भव्य स्वागत हुआ था।

गोली कांड की तारीफ करने वाले लेफ्टिनेंट गवर्नर

डायर को 1940 में ऊधम सिंह ने मारा था।

ऊधम सिंह को लेफ्टिनेंट गवर्नर डायर को मारने

के बदले फांसी की सजा सुनाई गई थी। 

धन्यवाद

KPSINGH 30052018

 

 

 

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