जातिवाद ने भारत को क्या दिया?

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जातिवाद ने भारत को क्या दिया? 

जातिवाद ने भारत को क्या दिया? यह बड़ा ही महत्वपूर्ण प्रश्न है। 

 मेरा दावा है,यदि आप भारत के निवासी हैं यानी भारत में रहते हैं, 

तो पहले आप इस हेडिंग को देखकर थोड़ा रुकेंगे, फिर मुहं  बनाकर  चलते बनेंगे ।

क्या आपको यह बात पता है कि आप ऐसा क्यों करेंगे? 

क्योंकि हम भारत के निवासियों की यह सुतुरमुर्गी आदत रही है कि, 

जब भी कोई समस्या हमारे सामने आई है तो हम वही करते हैं,

जो किसी समस्या को देखकर एक सुतुर मुर्ग कर सकता है।

जरा  सोचिए, इक्कीसवीं सदी का भारत विश्व गुरु क्या खाक बनेगा? 

जब उसने  आज तक इस सच्चाई को समझने की कोशिश ही नहीं की है,

कि पूरी दुनिया में कहीं भी कोई जाति श्रेष्ठता नहीं है, बावजूद इसके भारत में यह फलफूल रही है। 

1954 के काहिरा सम्मेलन में पूरी दुनिया द्वारा यह स्वीकार करने के बाद भी,

हम यह सच्चाई नहीं समझते हैं कि पूरी दुनिया में कहीं कोई,जाति भेद नहीं है।

केवल प्रजाति के भेद ही इस आधुनिक संसार में मान्य हैं।

जातिवाद किसे कहते हैं? 

जातिवाद ने भारत को क्या दिया?

अगर हम यह सचमुच ही जानना चाहते हैं तो पहले हमें,

जातिवाद को समझना चाहिए कि आखिर जातिवाद क्या है?

जातिवाद की सरल परिभाषा यह है कि जब दो या दो से अधिक लोग,

पूरी तार्किक वैज्ञानिक समानता के बावजूद,

एक-दूसरेको कुल गोत्र, पवित्र अपवित्र, ऊंचे-नीच, आर्य अ नार्य की,

विभाजन कारी भावना से सम्बोध करें  

तो यह जातिवाद कहा जा सकता है।

जाति या जातिवाद की सबसे बड़ी विशेषता यह है,

कि जाति का निर्धारण जन्म से होता है

तुमने एक बार किसी निम्न जाति, कुल, गोत्र में जन्म लिया।

तो तुम मरोगे फिर भी जाति का ख़त्म नहीं होगा।

जाति की जकड़न का आलम यह है कि क्या पढ़ा लिखा है, क्या वैज्ञानिक, क्या डॉक्टर? 

क्या शहरी कि गांव सभी जाति की खुशबू से भरे और दमकते रहते हैं

कहने का तात्पर्य यह हुआ कि आदमी ही जब आदमी को अपनी तरह का इंसान ना समझे, 

बल्कि किसी जानवर की तरह समझने लगे तो यह अमानवीय व्यवहार और,

भावना ही जाति का लक्षण और प्रतीक है

जातिवाद की देन   

यूं तो जातिवाद ने भारत को क्या-क्या दिया है इसका हिसाब लगाना काफी कठिन काम है,

लेकिन फिर भी हम यहां जातिवाद का कुफल को 

रेखांकित करने की कोशिश करना 

जैसे:

आपसी मन मुटाव और जाति वाद

जातिवाद के जहर ने हम भारतीयों को आपसी मनमूटव की उस,

पूंजी प्रदान की है जिसके कारण आजादी की 70 साल बाद भी,

हम सभी भारतीय भयंकर मनमुटव की स्थिति में रहते हैं

ऊंचे-नीच के अंतराल ने हमारे बीच भारतीय होने का, 

अहसास की जगह भव्य मनमुटाव पैदा किया है

परिणामस्वरूप किसी भी विदेशी ताकत हमें नुकसान पहुंचाने की स्थिति में हमेशा रहा है।

भयंकर नफरत और जाति वाद 

जातिवाद का एक और नायब तोहफा यह है कि हम भारतीय लोगों के लिए,

कि हम आप में भयंकर नफरत की शिकार हैं

यह नफरत इतना बढ़िया है कि इस देश में कभी जाति के नाम पर,

तो कभी कुल गोत्र के नाम पर बहुत खून के नदियों में बहती रही है।

और हम अपने ही भाइयों को मौत के घाट उतारकर खुशियाँ मना रहे हैं

आपसी विद्वेष और जाति 

जाति विवाद ने हम भारत वासियों को आपसी विद्वेष की,

वह आग प्रदान की है कि समय समय पर हम खुद,

भारत के परस्पर एकता को आग में झांकते रहे हैं

आपसी विद्वेष की ही वजह से हम अपने ही लोगों की दुर्दशा पर,

ताली बजाकर खुश होने का भयंकर अपराध करता है

और कभी भी रत्ती भर भर भी अफसोस तक स्पष्ट रूप से करने के लिए,

बमते भी न उठे हैं

आपसी फूट आपसी संघर्ष

आपसी फूट और आपसी संघर्ष के कारण ही आज तक हम,

गुलामी की मानसिकता को ढो हो रहा है

हमारे समाज का अमानवीय बंटवाड़ा इसी जातिवाद का एक दान है।

जिसकी वजह से हम नारा तो कईता में एकता के लगाए हैं,

लेकिन असलियत कुछ और ही है

दूरियां ही दूरियां प्रगति में बाधा

जातिवाद का एक और महान दान यह है कि हमारे देश,

तोकथित एक समाज में असलियत में दूरियां ही दूरियां हैं

जिसके परिणाम यह हुआ कि इन दूरियों ने,

हमारे सामने प्रगति के रास्ते में पग-पग बाधा उत्पन्न हुआ है।

उन्नति में अवरोध सामाजिक विखंडन और भी नहीं जानते कि कितने हकीकतों हैं और केवल जाति की देन हैं

धन्यवाद

KPSINGH0504052018

 

 

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