भारत में तुर्कों का आक्रमण और महमूद गजनवी

1
233

भारत में तुर्कों का आक्रमण और महमूद गजनवी 

भारत में तुर्कों का आक्रमण और महमूद गजनवी इतिहास का वह सच है ,

जिसे हम किसी भी कीमत में अपनी आंखों से ओझल नहीं कर सकते ।

क्योंकि इस सच्चाई से केवल भारत में किसी विदेशी आक्रांता की,

कहानी पता नहीं चलती बल्कि इससे भारत की,

तत्कालीन दिशा और दशा का भी मूल्यांकन होता है ।

भारत में तुर्कों का आक्रमण भारतीय इतिहास को,बदलने वाला काल खंड है,

जिसे हम भारत वासी अपनी अपनी तरह से,

केवल इसलिए नहीं याद रखना चाहते कि इससे हमारे देश में,घुसपैठिए घुसे,

बल्कि हम इस काल खंड को इसलिए भी याद रखना चाहते हैं,

कि हममें से कितने गद्दार अपनी ही कब्र खोदने वाले तब मौजूद थे ।

भारत में तुर्कों का आक्रमण 

712 ई में भारत में अरबों के आक्रमणऔर उसकी प्रतिक्रिया स्वरूप ,

भारत में कई प्रभावशाली साम्राज्यों का उदय हुआ ।

हलांकि 300 वर्षों तक सिंहल द्वीप, जावा, सुमात्रा में शासन करने वाले सम्राट,

अपने आपसी संघर्ष, देश में एक केन्द्रीय शक्ति का अभाव ,

सत्ता लोभ के लिए तुर्कों की सहायता आदि के कारण

तुर्क मुसलमानों के आक्रमण को विफल करने में असफल रहे ।

कहा जा सकता है कि अरबों का प्रारंभ किया गया कार्य तुर्कों ने पूरा किया ।

याद रहे भारत में मुस्लिम शासन की स्थापना का श्रेय तुर्कों को जाता है ।

तुर्क मुसलमान 

●तुर्क चीन की उत्तरी पश्चिमी सीमाओं पर निवास करते थे ।

●यह एक लड़ाकू व बर्बर जाति थी ।●तुर्क उमैयया वंशी शासकों के सम्पर्क में आने के बाद इस्लाम धर्म के सम्पर्क में आए ।

●कालान्तर में इन्होने इस्लाम धर्म स्वीकार किया था ।

●इनका उद्देश्य एक विशाल मुस्लिम साम्राज्य स्थापित करना था ।

अलपप्त गीन

यह बुखारा के समानी वंश के शासक अब्दुल मलिक 954/961 ई का तुर्क दास था ।

बाद में इसकी योग्यता के कारण इसे 956 ई में खुरासान का राज्यपाल बना ।

961 में मलिक की मौत के बाद मलिक का भाई मंसूर सिंहासन पर बैठा ।

अलपप्प्त गीन इन्हीं परिस्थितियों में अपने 800 वफादार लोगों के साथ गजनी में बस गया ।

यहीं पर इसने स्वतंत्र गजनी वंश की स्थापना की थी ।

अलपप्त गीन की मौत के बाद इसका पुत्र इसहाक और फिर इसके भी बाद बल बलक्त गीन गद्दी पर बैठा ।

इसके बाद पीराई गद्दी पर बैठा ।

फिर इसे हटाकर सुबुक्त गीन गद्दी पर बैठा ।

सुबुक्त गीन की कहानी

सुबु क्त गीन पहले अलपप्त गीन का गुलाम था ।

गुलाम से प्रभावित होकर अलपप्त गीन ने इसे दामाद बना लिया था ।

सुबुक्त गीन ही वह प्रथम शासक था जिसने हिन्दू शाही शासक जयपाल को हराया था ।

सुबुक्त गीन की मौत के बाद इसका पुत्र महमूद गजनवी 998/1030 ई गद्दी पर बैठा ।

याद रखें भारत पर आक्रमण करने वाला प्रथम तुर्क शासक यानी मुस्लिम शासक सुबुक्त गीन ही था ।

महमूद गजनवी 

●सुबुक्त गीन की मृत्यु के बाद उसका बड़ा लड़का महमूद 998 में शासक बना ।तब इसकी उम्र 17 वर्ष थी ।

●महमूद ने 1000 से 1027 तक भारत में कुल 17 बार आक्रमण किए थे ।

●1001 में इसने जयपाल को हराया लेकिन धन लेकर छोड़ दिया ,

बाद में जयपाल ने अपने पुत्र आनंद पाल को गद्दी देकर आत्म हत्या कर लिया था ।●महमूद ने 1006 में आनंद पाल को हराया था।

●1014 में इसने थानेशवर पर हमला किया था ।

● 1018 कन्नौज पर हमला किया। ● भारत में महमूद गजानवी की सबसे खास हमला 1025/26 में सोमनाथ गुजरात का है।

उस समय पर भीम पहले का शासन था

● 1030 में महमूद की मौत हो गई थी

महमूद गाजनवी का मूल्यांकन 

इतिहास कार नेल पूल के अनुसार महमूद एक महान सेनापति है।

वह प्रशंसनीय, साहसी, अविजय राजा, मानसिक और शारीरिक ताकत रखने वाला था।

यह नई नियमों का निर्माता भी है।

हिन्दू धर्म की मूत्ति तोड़ने के कारण उसे मूर्ति भंजक, बुत शिकन कहा गया है।

यह कलाकारों का संरक्षक और भवन निर्माता था।

महमूद गजानवी ने सिक्का चलाए में एक तरफ अरबी में तो दूसरी तरफ संस्कृत में लेखन था।

● महमूद के दरबार में अलबुरनी, फिरदौसी, उबबी और फारुकी आदि विद्वान थे।

● इसी दरबार में फिरदौसी ने शाहनामा लिखी था।

किताब उल हिंद के लेखक अल्बुरनी यहीं था

 

धन्यवाद

लेखक: के पी सिंह

07042018

 

 

 

 

 

 

 

1 COMMENT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here