महाभारत एक महा ग्रंथ

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महाभारत एक महा ग्रंथ 

महाभारत भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति का प्रतीक ग्रंथ,

होने के साथ ही साथ आज पूरी दुनिया में प्रसिद्ध महा ग्रंथ है ।

महाभारत का वास्तविक नाम आज महाभारत ही है ,

लेकिन इसका प्रारंभिक नाम जय संहिता अथवा भारत था ।

महाभारत के कुछ अन्य नाम भी हैं, जैसे काष्ण वेद, पंचम वेद, शत् साहस्री संहिता आदि ।

महाभारत के रचनाकार 

महाभारत एक महान ग्रंथ के रचनाकार वेद व्यास हैं ।

व्यास का वास्तविक नाम द्ववैपायन या कृष्ण द्वैपायन था ।

इनका एक अन्य  नाम बादरायण भी है ।

वेद व्यास इनका नाम वेदों के विभाग या विस्तार करने के कारण पड़ा था ।

वेद व्यास का जन्म स्थान बसाना गांव करनाल माना जाता है ।

इनके पिता का नाम पाराशर था ।

तथा माता का नाम सत्यवती था ।

कहते हैं बहुत छोटी उम्र में ये  मां से आज्ञा लेकर तपस्या करने वन चले गए थे ।

भागवत पुराण में वेद व्यास को विष्णु का 17 वां अवतार माना जाता है  ।

महाभारत के शान्ति पर्व में इन्हें नर नारायण स्वरूप कहा गया है ।

वेदों का विस्तार करने, मीमांसा करने, आदि का श्रेय वेद व्यास को ही जाता है ।

इनके प्रमुख शिष्य हैं सुमंतु, जैमिनी ,पैल ,वैशमपायन, शुकदेव आदि ।

महाभारत का नाम करण

महाभारत में पांडवों की विजय का वर्णन के कारण इसका प्रारंभिक नाम “जय”  था।

महाभारत में जय शब्द 18 बार आया है ।

महाभारत में 18 का विशेष महत्व है ।

जैसे 18 पर्व या अध्याय, 1

8 अक्षौहिणी सेना ,

18 वर्ष तक युधिष्ठिर का शासन,

18 दिन तक महाभारत का युद्ध चलना ।

महाभारत के मंगला चरण में 18 श्लोकों का बार-बार आना ।

श्री मद भगवद् गीता के अध्यायों की संख्या भी 18 है ।

महाभारत के विभाग

महाभारत एक महा ग्रंथ में कुल 18 विभाग या अध्याय हैं ।

महाभारत की अद्वितीय कथा काव्य शैली में इन्हीं 18 भागों में समाहित है।

इन 18 अध्यायों का वर्णन निम्न लिखित है ।

आदि पर्व:

इसमें महाभारत की आरंभिक कथा समाहित है ।

सभा पर्व:

राज्य सभाओं आदि केन्द्रित कथा वस्तु महाभारत में समाहित है ।

अरण्य पर्व:

इसमें निर्वासन की कथा समाहित है ।

विराट पर्व:

इसमें भारत वंशी विभिन्न राजाओं की अंतर कलह है ।

उद्योग पर्व:

इसमें विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन की कथा समाहित है ।

भीष्म पर्व:

इसमें युद्ध की आरंभिक कथा है ।

द्रोण पर्व:

इसमें युद्ध वर्णन है 

कर्ण पर्व:

इसमे युद्ध वर्णन है ।

शल्य पर्व  :इसमें युद्ध वर्णन है ।

सौपतिक पर्व:इसमें जनसंहार का चित्रण है ।

स्त्री पर्व:

इसमें जनसंहार के बाद का क्रंदन है ।

शान्ति पर्व

अनुशासन पर्व:

इसमें शान्ति जन्य तथ्य हैं ।

अश्व मेधित पर्व:

इसमें घटित तथ्यों का सामान्यीकरण है ।

आश्रम वासिक  पर्व:

इसमें वैराग्य प्रवृत्ति का वर्णन है ।

मौसल पर्व:इसमे विनाश के तथ्यों का वर्णन है ।

महा प्रस्थानिक पर्व:

इसमें महाभारत की विषयवस्तु समाप्ति की ओर अग्रसर है ।

स्वर्गारोहण पर्व :

इसमें महाभारत कहानी समाप्त हो जाती है ।

धन्यवाद

लेखक: के पी सिंह

19032018 

 

 

 

 

 

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