महाराष्ट्र में क्रांतिकारी आंदोलन

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महाराष्ट्र में क्रांतिकारी आंदोलन 

महाराष्ट्र में क्रांतिकारी आंदोलन के बारे में कुछ जानने के पहले

मैं चाहता हूं आप इन पंक्तियों को दुहरा लें ।

दिल से निकलेगी न मरकर भी वतन की उल्फत। मेरी मिट्टी से भी खुशबू ए वतन आएगी ।। 

दोस्तों, यह महज कागज में लिखीं पंक्तियां महज नहीं हैं

बल्कि, यह उन महान आत्माओं की आवाज है

जो खामोश कर देने के बाद भी

खामोश नहीं है।

उल्लेखनीय है कि यह नज्म भगत सिंह, सुख और राजगुरु ने

23 मार्च 1931 को फांसी के फंदे को गले में डालते वक्त गाया था। 

क्रांति और क्रांतिकारी आंदोलन 

सम्मानित दोस्तों, क्रांति एक सामाजिक घटना है जो

अत्याचार, शोषण तथा अन्यायपूर्ण वितरण से पैदा होती है।

सच कहें तो भारत में अंग्रेजी राज ने इन्हीं प्रवृतियों को जन्म दिया था।

परिणाम स्वरूप भारत में एक नहीँ अनेकों ऐसी घटनाओं की परणति हुई

जो इतिहास में क्रांतिकारी आंदोलन के नाम से जानी जाती हैं।

आज हमारी इस पोस्ट का यही मकसद है कि आपको

भारत में घटी सभी महत्वपूर्ण क्रांतिकारी घटनाओं के बारे में बताया जाए।

 

दोस्तों, हम चाहें तो अपनी सुविधा के लिए

भारत के क्रांतिकारी आंदोलन को दो भागों में बांट सकते हैं।

इसका प्रथम भाग प्रारंभ से 1917 तक और दूसरा भाग 1924 से 1934 तक।

दोस्तों, यह भी जान लीजिये कि इन दोनों चरणों में कुछ मूलभूत अंतर भी हैं

जैसे प्रथम चरण में क्रांतिकारियों में आध्यात्मिक पुट भी हाजिर था

जबकि दूसरे चरण में सशस्त्र विद्रोह हुए थे। 

क्रांति कारी आंदोलन और महाराष्ट्र 

भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन में सबसे पहले क्रांतिकारी गतिविधियां

महाराष्ट्र और बंगाल से प्रारंभ हुई थीं ।

 1897 में पूना में दामोदर हरि चापेकर तथा बालकृष्ण हरि चापेकर ने

व्यायाम मंडल की स्थापना की थी ।

इस मंडल का उद्देश्य नौजवानों को प्रशिक्षण देना था ।

चापेकर बंधुओं ने बम्बई में विक्टोरिया की मूर्ति में कालिख पोत कर

अपना आक्रोश भी व्यक्त किया था।

22 जून 1897 को इन्हीं बंधुओं ने पूना में रैंड तथा एयट्रर्स नामक

दो अंग्रेज अधिकारियों की हत्या की थी ।

18 अप्रैल 1818 को दामोदर हरि चापेकर को फांसी दी गई थी। 

अभिनव भारत 

1889 में नासिक में मित्र मेला नामक एक क्रांतिकारी संस्था की स्थापना हुई थी। 

1907  में इसी का नाम अभिनव भारत हो गया था।

इसके संस्थापक गणेश सावरकर तथा विनायक सावरकर थे।

यहां युवकों को क्रांतिकारी प्रशिक्षण दिया जाता था ।

अभिनव भारत ने पांडुरंग महादेव बापत को

बम बनाने की तकनीक सीखने के लिए रूस भेजा गया था।

बाद में इस संस्था ने बम के कई गुप्त कारखाने स्थापित किया था।

महाराष्ट्र के गणेश दामोदर सावरकर को 9 जून 1909 को

उत्तेजना पूर्ण कविता लिखने के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

बाद मे 21 दिसंबर 1909 को गणेश को सजा सुनाने वाले मजिस्ट्रेट

जैक्सन को अनंत लक्ष्मण कन्हारे ने गोली मारी थी ।

इसी के लिए नासिक षडयंत्र केस चला था।

37 लोग इसमें गिरफ्तार थे

इसी केस में कन्हारे, कृष्णा जी गोपाल कर्वे को फांसी तथा विनायक

दामोदर सावरकर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

इसके बाद महाराष्ट्र की क्रांति कारी गतिविधियों में विराम लग गया था। 

सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है जोर कितना बाजु- ए- कातिल में है

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 14082018

 

1 COMMENT

  1. नमस्कार सर आप का बहुत बहुत धन्यवाद करता हूँ सर आप ने बहुत बढ़िया तरीके से समझाया है

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