लाल किला की अकथ कहानी

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हमारे लाल किला की अकथ कहानी

हमारे लाल किला की अकथ कहानी यह है कि जब हमारा देश
भारतआजाद हुआ था तो
15 अगस्त 1947 से यह अबाध गति से जाारी है
कि हमारे देश के 
हर प्रधानमंत्री 15 अगस्त को लाल किले से ही सम्बोधित करते रहे हैं  ।
लाल किला हमारी गौरव गाथा का प्रतीक है इसी लिए इसकी गाथा
हम सबके लिए महत्वपूर्ण है ।

यह बात अलग है कि आज अतिरिक्त सुरक्षा के चलते लाल किले में
आम आदमी का प्रवेश बंद है लेकिन इसका यह कतई मतलब नहीं है कि
इसकी गरिमा और गौरवगाथा में रत्तीभर भर फर्क पड़ने वाला है।
हमारे लाल किला की अकथ कहानी 15 अगस्त 1947 से लगातार जारी है
और इसकी यह कहानी आगे भी जारी रहेगी।
आइये लाल किला की अकथ कहानी को आगे बढाते हैं कुछ इस तरह से , 

 

लाल किले का निर्माण कब हुआ था 

लाल किला की अकथ कहानी यह है कि इसका निर्माण

पांचवें मुगल बाद शाहजहां ने 1638 से 1649 के बीच कराया था ।

इसका निर्माण बलुआ पत्थर से जरूर हुआ था

लेकिन यह अपनी भव्यता के लिए पूरे विश्व में विख्यात है ।

वास्तव में इसका निर्माण जब हुआ था तब इसे

मुगलों की नई राजधानी शाहजहांना बाद के महल के रूप में किया गया था ।

 

254.67 एकड़ में फैले लाल किला की अकथ कहानी यह भी है कि

इसके निर्माण में कुल आठ साल दस महीना 25 दिन लगे थे।

छ मुख्य दरवाजों वाले लाल किला में एक साथ

तीन हजार लोगों के रहने की व्यवस्था बनाई गई थी।

लाल किला में एक दर्शनीय वस्तु तख्ते ताउस था जिसमें

जडे कोहिनूर हीरा के कारण इसका नाम विश्व विख्यात रहा है। 

बहुत कुछ सहा है इसने 

लाल किला की अकथ कहानी यह भी है कि अपने निर्माण के साथ ही साथ

अपने नष्ट होने का नजदीकी डर भी इस लाल किला ने देखा है ।

1739 में जब नादिर शाह नाम के एक कुख्यात लुटेरे ने दिल्ली में आक्रमण किया था तो

उस समय दिल्ली में मुगल बादशाह मुहम्मद शाह आलम का शासन था।

नादिर शाह ही  शाह आलम को हराकर  लाल

किले से तख्ते ताउस और कोहिनूर हीरा ले गया था।

लाल किले ने एक या दो नहीं बल्कि सैकड़ों हमले झेले हैं

यह भी लाल किला की अकथ कहानी का ही हिस्सा है । 

अंगेजों के समय लाल किला 

यह 1857 के बाद की हकीकत है कि

अंग्रेजों ने लाल किले को नष्ट करना प्रारंभ कर दिया था।

अंग्रेजों ने रंग महल का बागीचा,, रायल स्टोर रूम, किचेन आदि में बदल दिया था।

1911 में भारत की राजधानी कोलकाता से दिल्ली बदली गई थी।

जिसका उद्देश्य भारत की जनता को यह बताना था कि

अब भारत मुगलों नहीं अंग्रजों के कब्जे में है ।

सच कहें तो लाल किले की अकथ कहानी का सार यह है कि

साल दर साल बदलते रहे हैं लेकिन इसकी शान और भव्यता में

कहीं कोई कमी नहीं आई है और आज यह भारत की पहचान का प्रतीक है।

लाल किला की अकथ कहानी का सार तत्व यह है कि लाल किला

भारत की उन  चुनिंदा इमारतों में शामिल है जिन्होंने भारत के हर दौर को देखा है।

क्रूरता भी देखी है तो सहनशीलता भी देेखी है ।

भारत की उन्नति भी देखी है तो भारत की अवनति भी देखी है।

2007 में यूनेस्को ने अपनी सूची में शामिल किया था।

यह भी एक इतिहास का तथ्य है कि लाल किले को 2007 में

यूनेस्को ने अपनी सूची में शामिल किया था।

1857 में हमारी आजादी के प्रतीक रहे लाल किले

को बहादुर शाह की गिरफ्तारी के लिए भी जाना जाता है।

यहीं से 7 अक्टूबर 1858 को बहादुर शाह जफर को रंगून निर्वासित किया गया था। 

नेता जी बोस और लाल किला

1940 में रंगून को आजाद हिंद फौज का मुख्यालय बनाने की
जब पेशकश हुई थी नेता जी को तभी उन्होंने दिल्ली चलो का नारा दिया था ।
इसका उद्देश्य लाल किले को हासिल करना था। 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 16082018

 

 

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