हमारी आजादी के महान नायक

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   हमारी आजादी के    नायक 

         हमारी आजादी के महान नायक कौन हैं?

अगर यह  सवाल आप का है तो मुझे अफसोस है।        मैं आपको उनके नाम नहीं बता पाऊंगा।

इसका भी एक कारण है और वह कारण यह है कि

 भारत की आज़ादी के लिए लङने वाले एक नहीं

अनेक लोग हैं।

हर धर्म,हर जाति,हर वर्ग भारत की आज़ादी का नायक है ।

इसीलिये मैं आपको कोई एक या दो नाम बताने में असमर्थ हूँ।

मैं आपको उन तमाम नायकों के बारे मेँ बताना चाहता हूँ,

जिन्होंने अपने-अपने खून या फिर तन मन धन से भारत की आज़ादी के वृक्ष को सींचा है।

तो आइए आज चर्चा करते हैं ऐसे ही भारत की आज़ादी के कुछ खास नायकों की 

   गुरुदेव रवींद्र नाथ     टैगोर 

भारत के महान मानवतावादी तथा अंतर्राष्ट्रीय प्रसिद्धि पाने वाले,

महान कवि टैगोर का जन्म 1861 में कलकत्ता में जोरांसके में हुआ था।

इनके पिता का नाम रवीन्द्रनाथ टैगोर था।

1913 में इनके काव्य संग्रह गीतांजलि के अंग्रेजी अनुवाद को

एशिया में पहली बार  नोबेल पुरस्कार मिला था।

1913 में। ही अंग्रेजी सरकार ने इन्हें सर की उपाधि प्रदान की थी।

रवीन्द्रनाथटैगोर ने अपनी इस उपाधि को 1919 में हुए,

जलियांवाला बाग कांड के खिलाफ वापस कर दिया था।

रवीन्द्रनाथ टैगोर ने 1901 में विश्व भारती नामक शिक्षण संस्थान की स्थापना की थी। 

 

  अरविंद घोष अमर रहें

अरविंद घोष हमारी आजादी के महान नायकों में एक हैं ।  

इनकी विचार धारा और यह स्वयं एक भी क्रांति कारी थे।

अरविंद घोष ने तत्कालीन ICS की भी परीक्षा पास की थी।

लेकिन घुड़सवारी के टेस्ट में असफल होने के कारण,

इन्होंने इसे ज्वाइन नहीं किया और इनका मन आजादी की  लड़ाई में लग गया।

यह 1906 में बंगाल नेशनल कालेज के बनने वाले प्रथम आचार्य थे।

अरविंद घोष ने पत्र पत्रिकाओं में उत्तेजक लेख लिखकर,

जनमानस को झकझोरने का महत्वपूर्ण कार्य किया था।

वन्दे मातरम् तथा कर्म योगी पत्रिकाएँ इन्होंने ही निकाला था।

भवानी मंदिर नामक एक पुस्तक भी लिखी थी।

अरविंद घोष कलकत्ता के अली पुर केस में 1908 में फ॔स गए थे।

लेकिन जब कि किसी तरह बरी हुए तो फिर पांडिचेरी चले गए।

यहां पर ओरविले में एक आश्रम की स्थापना की थी।

यहीं पर रहते हुए 1950 में इनकी मृत्यु हुई थी।

इनकी आत्म कथा डिवाइन लाइफ नाम से है ।

 नेता जी सुभाष चन्द्र बोस 

हमारी आजादी के महान नायकों में एक हैं सुभाष चन्द्र बोस।

जी हां दोस्तो सुभाष चन्द्र बोस हमारे देश के वह वीर  सपूत हैं,

जिनसे मिलने के लिए हिटलर भी तरसता था।

महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सुभाष चन्द्र बोस

का जन्म 23 जनवरी 1897 को कटक उड़ीसा में हुआ था।  

सन् 1920 में ICS की परीक्षा में सुभाष चन्द्र बोस

ने चौथी रैंक हासिल की थी।

लेकिन आपको आश्चर्य होगा कि इनहोंने  देश

सेवा के लिए इतनी बड़ी नौकरी  से तुरंत त्याग पत्र

दे दिया था।

1921 में सुभाष चन्द्र बोस पहली बार चितरंजन

दास के  संपर्क में आने के बाद स्वाधीनता  संग्राम

में शामिल हो गए थे।

1938 में हरिपुर अधिवेशन में  सुभाष चन्द्र बोस पहली बार कांग्रेस के अध्यक्ष  बने थे।

1939 में पुनः त्रिपुरी अधिवेशन में अध्यक्ष चुने गए थे ।

सनद रहे इसी बार गांधी जी इनके खिलाफ थे फिर भी यह अध्यक्ष बने थे ।

बाद में गांधी जी के महान सयापा के कारण इन्होंने खुद इस्तीफा दे दिया था।

द्वितिय विश्व युद्ध पर सुभाष चन्द्र बोस का विचार था,

कि अंग्रेजों की स्थिति का हमें फ़ायदा उठाना चाहिए।

1939 में इनहोने फॉरवर्ड ब्लाक की स्थापना की थी।

1940 में सुभाष चन्द्र बोस को नज़र बंद कर दिया गया था,

लेकिन 1941 में यह देश से निकल गए थे।

 काबुल,सोवियत रूस,होते हुए यह जर्मनी पहुँचे थे।

जर्मनी में रिबेनटाप यानी हिटलर के प्रमुख सहायक ने नेता जी का स्वागत किया था।

यहां पर ही इन्हें नेता जी की उपाधि मिली थी।

1943 में नेता जी सिंगापुर गए थे।

अक्तूबर 1943 में इन्होने सिंगापुर में आज़ाद हिंद फ़ौज की अस्थाई सरकार बनाई थी। 

 महात्मा गांधी अमर रहें   

 

 

हमारी आजादी के महान नायकों में एक हैं महात्मा गाँधी।

लेकिन अद्भुत बात यह है कि महात्मा गांधी एक होने के बाद भी,

सैकड़ों नहीं लाखों ‘करोड़ों के सदैव बराबर थे।

मोहन दास करमचंद गांधी का जन्म गुजरात के पोरबंदर मे 2/10/1869 को हुआ था।

1891 में इनहोने इंग्लैंड में वकालत पास की और 1893 में,

एक भारतीय व्यापारी का मुकदमा लङने के द्वारा दक्षिण अफ्रीका गए थे।

बीस साल तक अफ्रीका में रहकर इन्होंने सत्याग्रह किया।

टालस्टाय फार्म तथा फीनिक्स फीनिक्स फार्म की स्थापना की थी।

1894 में इनहोने दक्षिण अफ्रीका में नेटाल इंडियन कांग्रेस की स्थापना की थी।

विदित हो कि गांधी जी 9 जनवरी 1915 को भारत वापस आए थे।

1917 में ऐतिहासिक चम्पारन सत्याग्रह ने इन्हें हीरो बना दिया था।

सच कहे तो 1947 में मिली आजादी में गांधी जी का  सबसे बड़ा हाथ था। 

 

दादा भाई नौरोजी 

हमारी आजादी के महान नायकों में अगर हम दादा भाई नौरोजी का नाम न लें,

तो यह हमारी  सबसे बड़ी भूल साबित हो सकती है।

दादा भाई नौरोजी का जन्म बम्बई के एक रईस पारसी परिवार में 1825 में  हुआ था।

इनहोने भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन के प्रारंभिक दौर का नेतृत्व किया था।

कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में 1886 में  यह अध्यक्ष बने थे।

बाद में 1893 और 1906 में  भी अध्यक्ष बने थे। 

ब्रिटिश संसद के लिए चुने जाने वाले पहले भारतीय थे। 

स्वामी विवेकानंद अद्भुत शक्ति 

स्वामी विवेकानंद जी हमारी आजादी के महान नायकों में एक हैं।

यह अंतर्राष्ट्रीय प्रसिद्धि पाने वाले वह महान संत थे,

जिन्होंने अपनी हर सांस में केवल और केवल आजादी की ही बात की है।

12 जनवरी 1863 को नरेंद्र नाथ दत्त अर्थात

स्वामी विवेकानंद जी का जन्म कलकत्ता में हुआ था।

1893 में अमेरिका में विश्व धर्म समेलन में इन्होंने  भारतीयों का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया था।

1897 में इनहोने बेलूर मैं राम कृष्ण मिशन की स्थापना की थी।

इनका दूसरा मठ अल्मोडा के मायावती में स्थित है।

गरीब और गरीब रोगियों की सेवा करना इनका मुख्य उद्देश्य था। 

बाल गंगाधर तिलक अमर रहें

हमारी आजादी के महान नायकों में एक हैं बाल गंगाधर तिलक।

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में लाल बाल पार  नामक तिकङी बाल यही हैं।

बाल गंगा धर तिलक का जन्म 1857 में बम्बई के रत्नागिरी में,

एक चितपावन ब्राहमण परिवार में हुआ था।

मराठा तथा केसरी समाचार पत्रों का संपादन किया था।

1897 में केसरी में लिखे लेख पर इनके ऊपर राजद्रोह का मुकदमा क़ायम हुआ था।

इसमे इनको जेल हुई थी।

1907 कीं सूरत कांग्रेस की फूट में इनका योगदान रहा था।

1916 में इनहोने होम रूल सोसायटी की स्थापना की थी।

गीता रहस्य तथा आर्यन नामक इनकेप्रसिद्द  ग्रंथ हैं।

1920 में इनकी मृत्यु हुई थी। 

 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा KPSINGH08052018

 

 

 

 

 

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