सर्वश्रेष्ठ कैसे बनें How to be best

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क्या आप को पता है आप भी सर्वश्रेष्ठ बन सकते हैं

सर्वश्रेष्ठ कैसे बनें : भला कौन सा ऐसा व्यक्ति है इस संसार में जो स्वयं सर्वश्रेष्ठ नही बनना चाहता? शायद हम, आप,सब सर्वश्रेष्ठ ही बनना चाहते हैं . असली समस्या सर्वश्रेष्ठ बनने की इच्छा या कोशिश की नही, बल्कि प्रयास की होती है । क्योंकि यह तो सब को पता होता है कि उसे सर्वश्रेष्ठ बनना है |

लेकिन बहुत कम लोगों को पता होता है कि कोई सर्वश्रेष्ठ कैसे बन सकता है ।आज आपको यहां यही बताया जाएगा कि सचमुच यदि आप सब में श्रेष्ठ बनना ही चाहते हैं तो वह सूत्र और उपाय क्या हैं?

 

पहले अपनी पहचान खुद करें 

 

इस संसार मे कुल तीन प्रकार के लोग होते हैं ।एक वे जो किसी काम को सुनते ही यह कहने लगते हैं कि यह काम तो होगा ही नही ।इतना कहने के बाद वह हाथ पर हांथ रखे बैठे भी रहते हैं और किसी दूसरे की राह ताकते रहते हैं ताकि कोई अन्य व्यक्ति आए और उनका काम करके अपना रास्ता नापे।

 

दूसरे वे लोग होते हैं जो अपना काम करना तो चाहते हैं और शुरू भी खुद करते हैं लेकिन काम के रास्ते में आई हल्की सी भी दिक्कत को देखकर अपने तीर कमान त्याग देते हैं इतना ही नही वह पीछे भी लौट आते हैं बिना यह जाने कि इस तरह पीछे लौटने का आखिर अंजाम क्या होगा ।

 

तीसरे व्यक्ति वे होते हैं जो काम शुरू करने के पहले दस बार सोचते हैं लेकिन अंततः जब उस काम को करने की सोच लेते हैं तो फिर काम खत्म करके और उसका परिणाम प्राप्त करके ही दम लेते हैं इस तरह के लोगों को दशरथ  माझी के चरित्र से समझा जा सकता है क्योंकि इस तरह के लोगों की राह में रोड़ा भी खूब आते हैं|

लेकिन यह पीछे हटने या काम टालने की सोच भी नही सकते ।इन्हें ही सर्वश्रेष्ठ कहा जाता है ।इन्हें तीनों प्रकार के व्यक्तियों में प्रमुख स्थान प्राप्त है ।

 

ऐसे लोग भी सामान्य जन होते हैं 

 

ऐसे लोग भी सामान्य जनजीवन में ही मिलते हैं ।यह किसी दूसरे ग्रह के प्राणी नही होते मगर हां इनसे खुद स्वयं भगवान् भी पूछते हैं कि बताओ आप की इच्छा क्या है? मैं उसे पूरी करना चाहता हूं ।हलांकि इस तरह का इन्सान बनना आसान नही है लेकिन असम्भव या नामुमकिन भी नही है ।यह लोग सच कहें तो खुद अपना महत्व बखूबी समझते हैं इसीलिए इन्हें पता होता है कि संसार में कोई भी सच्चाई के साथ किया गया कार्य सुखद परिणाम अवश्य देता है।

यह इस विचार धारा के भी होते हैं कि किसी के सहारे रहने से अच्छा है किसी का सहारा बना जाए ।ऐसे लोग अपनी जिन्दगी में न केवल खुद को उंचाई पर ले जाते हैं बल्कि अपने आसपास के लोगों का भी विकास करते हैं या फिर उनके विकास में अपनी समझ और बुद्धि का योगदान करते हैं ।

 

अपनी शक्ति को पहचानने की कोशिश करते हैं 

 

आपने देखा होगा कुछ लोग मुहल्लेभर की ही नही ,पूरे गांव की भी जानकारी रखते हैं ।आप किसी के भी बारे में कुछ भी पूछ लो इन्हें सब कुछ पता होता है बस एक बात के अलावा ।और वह सबसे खास बात यह है कि इन्हें खुद अपने बारे में कुछ भी पता नही होता ।लोग यह करें तो यह होगा इस तरह की बातें तो कर सकते हैं लेकिन अपनी ताकत को पहचान कर, अपने हुनर को जानकर उसी के अनुसार काम नही करते ।

जबकि श्रेष्ठ लोग सबसे पहले अपनी स्थिति को समझते हैं और फिर अपनी ताकत को पहचान कर उसी के अनुसार काम करते हैं और एक दिन अपने आप को संसार के समक्ष सिद्ध कर देते हैं ।ऐसे लोग सबसे पहले इस बात की भी गांठ बांध लेते हैं कि कोई कुछ भी कहे उन्हें अपने बनाए मार्ग पर बस चलते जाना है ।

 

निष्कर्ष रूप में यही बात सौ बात की एक बात प्रतीत होती है कि दुनिया में जिन्हें हम श्रेष्ठ या सर्वश्रेष्ठ कहते हैं वह अंतरिक्ष से अलग से धरती नही भेजे जाते बल्कि वह हम सब साधारण इन्सान की तरह ही साधारण इन्सान के साथ ही फलते-फूलते हैं ।इसलिए हमें भी इस तथ्य की सच्चाई को स्वीकार करना चाहिए और सदैव यह सोचना चाहिए कि इस संसार में हमारा भी बेहद महत्वपूर्ण स्थान है यदि नही है तो हमे अपनी कोशिश से उसे हासिल करना चाहिए ।

 

धन्यवाद

लेखक :के पी सिंह

24022018

 

 

 

 

 

5 COMMENTS

  1. अगर हमने इंसान योनि में जन्म लिया है तो हम श्रेष्ठ तो पहले से हैं | केवल आत्मविश्वास के बल से हम सर्वश्रेष्ठ बन सकते हैं |

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