रूस अमेरिका चीन के बाद भारत जैसा कोई नहीं

3
205

रूस अमेरिका चीन के बाद भारत जैसा कोई नहीं

रूस अमेरिका चीन के बाद भारत जैसा कोई नहीं यह केवल भावनात्मक सच्चाई नहीं है
बल्कि यह बात तथ्यों और आंकड़ों से सिद्ध हो चुकी है कि
बैलगाड़ी पर चलने वाला भारत आज पूरी दुनिया में अंतरिक्ष  विज्ञान के क्षेत्र में अद्भुत
और अनोखा बन चुका है ।
भारत ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में कुछ ऐसे भी स्तंभ स्थापित कर चुका है
जिसे रुस अमेरिका और चीन भी हिलाना तो दूर छू तक नहीं पाए हैं।
आपको याद होगा जब भारत ने एक साथ 104 उपग्रह अंतरिक्ष में स्थापित किया था
तो रूस अमेरिका और चीन ने दातों तले उंगली दबाने के अलावा
कुछ भी नहीं कह पाए थे
बस खामोशी से हमारी अंतरिक्ष की उड़ान को देखते हुए आह भर रहे थे।
यह ऐतिहासिक कारनामा आज भी भारत के नाम दर्ज है।
104 उपग्रह एक साथ भेजने के पहले एक साथ 20 उपग्रह भी
भारत अंतरिक्ष में भेज चुका था।
हां इसके बाद रूस ने जरूर एक साथ 29 उपग्रह भेजकर कुछ समय के लिए
भारत का रिकार्ड तोड़ दिया था।
लेकिन भारतीय महान वैज्ञानिकों ने जल्द ही इस क्षेत्र की श्रेष्ठता
एक बार फिर से भारत के नाम अंतरिक्ष में एक साथ 104 उपग्रह
भेज कर अपने नाम कर लिया था। 

यह है भारत की नई उपलब्धि 

रूस अमेरिका चीन के बाद भारत जैसा कोई नहीं यह बात तो सौ फीसदी सच ही है

आपको ताज्जुब होगा कि भारत भविष्य में जिस उपलब्धि को हासिल करने वाला है

उसके आगे अमेरिका भी नतमस्तक है।

आपको बता दें कि इस समय दुनिया में केवल तीन देश ही ऐसे हैं

जो मनुष्य को अंतरिक्ष भेज चुके हैं।

यानी  अंतरिक्ष मे मानव अभियान सम्पन्न कर चुके हैं ।

भारत चौथा ऐसा देश बनने जा रहा है जो अंतरिक्ष में मानव

अभियान की घोषणा कर चुका है।

इस अंतरिक्ष मानव अभियान में अगर भारत

सफल होता है तो भारत अमेरिका से आगे निकल जाएगा ।

ऐसा इसलिए होगा क्योंकि तब भारत अपनी आजादी के सात दशक बाद ही

यह उपलब्धि हासिल करेगा। 

जब कि अमेरिका और चीन भी इस मामले में भारत से पीछे रहेंगे।

अपनी आजादी के बाद मानव अंतरिक्ष अभियान को सबसे पहले

और सबसे कम समय में रूस ने सम्पन्न किया था।

रूस ने यह उपलब्धि केवल 4 दशक में, अमेरिका 18 दशक में  चीन 9 दशक में

जब कि भारत आजादी के बाद केवल 7 दशक में यह उपलब्धि हासिल करने जा रहा है। 

किले की प्राचीर का किस्सा 

हमारे वर्तमान युग पुरुष और भारत के महानतम प्रधानमंत्री श्री

नरेन्द्र भाई दामोदर दास मोदी जी ने 72 वें स्वतंत्रता दिवस पर

लाल किले से राष्ट्र के सम्मुख अपना वक्तव्य देते हुए पूरे राष्ट्र को गौरवान्वित करते हुए

यह घोषणा की है कि 2022 के पहले हम किसी भारतीय को अंतरिक्ष भेजेंगे ।

भारत की ओर से राकेश शर्मा यद्यपि पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री बन चुके हैं

लेकिन यह अंतरिक्ष यात्री अलग बात है।

 

राकेश शर्मा सोवियत संघ के सोयूज टी-11 में 2अप्रैल 1984 में उड़न भरी थी ।

सरल शब्दों में कहें तो राकेश शर्मा एक सवारी मात्र थे

एक ऐसी बस की सवारी थे जो पता नहीं कहाँ से कहां जा रही थी। 

किसी ने रोका और बैठकर चल दिए, न बस अपनी, न कुछ भी अपना।

मोदी जी की घोषणा मानव सहित अंतरिक्ष जाने की बात से महत्वपूर्ण नहीं है

बल्कि यह इस लिए महत्वपूर्ण है कि ऐसा कारनामा

करने की घोषणा करने  वाले हम वह देश बन गए हैं

जिनकी आजादी को बहुत कम दिन हुए हैं ।

रूस ने अपनी आजादी के बाद केवल 4 दशक में यह कारनामा कर दिखाया था ।

रूस के बाद अपनी आजादी के बाद कम समय में

ऐसा करने वाले हम भारत के लोग इस मामले में दूसरे स्थान पर हैं।

भारत अगर यह कारनामा करता है तो वह अपनी आजादी के 7 दशक बाद

ऐसा कारनामा करेगा जबकि अमेरिका इस

कारनामा को करने मे 18 और चीन ने 9 दशक का समय ले चुके हैं। 

अंतरिक्ष और भारतीय उपलब्धियां 

हम भारत वाशियो के दिल और दिमाग में पुष्पक विमान की याद सदैव बनी रहती है,

सच कहें तो भारत और अंतरिक्ष की कहानी ही हमारी इसी

कल्पना के साथ आगे बढती है। 

शायद इसीलिए भारत की धरती में जब भी कोई आकाश मार्ग की कल्पना करता है

तो वह पुष्पक विमान के वर्णन से खुद को रोक नहीं पाता।

भारत की अंतरिक्ष उड़ान और भारत की अंतरिक्ष उपलब्धि का स्रोत

🔴हमारे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो

की स्थापना 1969 में हुई थी।

🔴हमारे देश भारत का पहला उपग्रह 1975 में रूस के

स्पेस लांच सेंटर वोल्वो ग्राड से अंतरिक्ष सेंटरसेसे भेजा गया था ।

भारत के पहले उपग्रह का नाम आर्यभट्ट था ।

🔴1983 में इसरो ने संचार क्रांति को ध्यान में

रखकर इनसेट नामक 9 उपगहों को लांच किया था।

🔴आंकड़ों की बात करें तो 1983 से अब तक इसरो

अपने पीएसएलवी से 40 देशों के 40 से ज्यादा उपग्रह अंतरिक्ष भेज चुका है।

🔴भारत ने 2008 मे अपना पहला चंद्र यान भेजा था  ऐसा करने वाला

भारत विश्व का छठवां देश है।

🔴2014 में भारत ने अपना पहला मार्स यान वह भी सफलता पूर्वक छोड़ा था ।

वह भी अमेरिकी खर्च की तुलना केवल 1/10 वें भाग में 

🔴2016 में दोबारा प्रयोग की जाने वाली स्पेस शटल वह्वीकल भारत ने लांच कर चुका है।

🔴इसका खर्च महज 95 करोड़ रुपए था।

भारत ने 2016 में एक साथ 20 उपग्रह लांच किया था।

🔴15 फरवरी 2017 को भारत ने 104 उपग्रह एक साथ लांच करके

विश्व भर में नाम कमा चुका है।

मजेदार बात यह रही कि इनमें 101 उपग्रह विदेशी थे। 

रूस अमेरिका चीन के अंतरिक्ष में मानव अभियान 

🔴आपको यह बात बताने की जरूरत नहीं है कि 1917 की रूसी क्रांति के बाद

30 दिसम्बर 1922 को सोवियत संघ की स्थापना हुई थी।

🔴1957 में रूस ने अपना पहला कृत्रिम उपग्रह  स्पूतनिक लांच किया था।

🔴अपनी आजादी के 39 साल बाद रूस ने 1961 में यूरीगागरिन को अंतरिक्ष में भेजा था।

🔴यूरीगागरिन विश्व के पहले व्यक्ति हैं जो अंतरिक्ष गए।

🔴गागरिन वोस्टाक – 1 में अंतरिक्ष भेजे गए थे।

 

🔴अमेरिका 4 जुलाई 1776 को आजाद हुआ था।

इसने अपनी आजादी के 185 साल बाद 5 मई 1961 को

प्रोजेक्ट मरकरी में एलन बी शेपर्ड को अंतरिक्ष भेजने में कामयाब रहा था।

20 जुलाई 1969 को नासा ने चंद्रमा पर पहला इंसान उतार कर

रूस से गागरिन वाला बदला लिया था।

🔴चीन में 1912 में किंग साम्राज्य का अंत हो गया था  तभी यहां गणराज्य की स्थापना हुई थी। 

🔴चीन ने अपनी आजादी के 91 वर्ष बाद 15 अक्टूबर 2003 को

शिंझोऊ-5 और उसमें यांग लिवेई को अंतरिक्ष भेजने में सफल रहा था 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 20082018

 

 

 

 

 

3 COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here