आधार के बदले वर्चुअल आई डी क्या है?

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आधार के बदले वर्चुअल आईडी क्या है?

आधार के बदले वर्चुअल आईडी क्या है? यह बहुत महत्वपूर्ण सवाल है।

लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण प्रश्न इस समय यह है कि,

आखिरकार आधार के बदले वर्चुअल आईडी में क्या आधार है?

क्यों कि आधार का बदला वर्चुअल आई डी की कल्पना और कामना है।

ध्यान देना बात यह है कि वर्चुअल आईडी का कल्पना करना 

आधार के विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

और यह सच है कि जब तक हमें,

आधार के बारे में पूरी तरह से जानकारी नहीं है, 

तो हम इसके विकल्प को शायद ही समझ पाएंगे।

तो दोस्तों, आईए वर्चुअल आई डी को जानने के पहले प्रयास करें

और जानते हैं   कि आखिर आधार किसका  का नाम है? 

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर 

आधार के बदले वर्चुअल आई  डी  क्या है? यह जानने के क्रम में,

यह जानना बेहद जरूरी है कि यह आधार कहां से आया? 

दोस्तों भारत सरकार ने पहली बार जनगणना 2011 अभियान के दौरान,

देश के लिए एक जनसंख्या रजिस्टर तैयार किया गया था।

यह रजिस्टर नागरिकता अधिनियम 1955 और,

नागरिकता (नागरिकों का पंजीकरण और राष्ट्रीय पहचान जारी करना)

नियमावली, 2003 के तहत तैयार किया गया था।

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर का उद्देश्य देश के सभी नागरिकों का 

व्यक्तिगत ब्यौरा  इकट्ठा करना और ग्रामीण और,

शहर में 15 से अधिक वर्षों के सभी लोगों के फोटोग्राफ और दस उंगलियों  के छाप लेना था ।

सोचा गया कि यह रजिस्टर एक व्यापक डाटाबेस तैयार करेगा ,

जिसमें 15 प्रकार की प्रश्नावली थी।

इसकी अधिकांश सूचनाएं गोपनीय रहेंगी यह   भी निश्चित था ।

केवल कुछ जानकारियां इलेक्टोरल राल या  टेलीफोन डायरेक्टरी,

के रूप में देखने के लिए प्रकाशित की जाएंगी ।

 जनसंख्या रजिस्टर से आधार तक 

विदित हो कि इस तरह के डेटाबेस तैयार करने के बाद,

15 से अधिक उम्र के हर भारतीय नागरिक को,

एक विशिष्ट पहचान नंबर यानी यूनीक आइडेंटिटी नंबर या यूआईडी जारी किया गया था।

लेकिन जल्द ही केंद्र सरकार ने विशिष्ट पहचान संख्या,

कार्यक्रम का नाम बदलकर आधार दिया  था।

आज यह कोशिश  आधार परियोजना के नाम से जानी जाती है।

आज यह विशिष्ट पहचान संख्या आधार संख्या कहलाती है।

आधार परियोजना के लोगो में चमकता पीला सूर्य और बीच में अंगुलियों के निशान बनाए गए हैं।

आधार संख्या जारी करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति की बायोमेट्रिक पहचान ली जाती है।

इस पहचान के लिए लगभग 10 फिंगर प्रिंट, एक फोटो और आइरिस स्कैन लिया जाएगा।

भारत का पहला आधार कार्ड 

भारत का पहला आधार कार्ड 29 सितंबर, 2010 को,

उत्तर महाराष्ट्र का नंदुरबार जिले में तेंभली गांव में,

महात्किंक्षी आधार परियोजना की शुरुआत की गई थी

इसी गांव की आदिवासी महिला रंजना सोनावणे, 

आधार कार्ड प्राप्त करने वाली भारत में पहली महिला और पहली व्यक्ति बनी।

इस आधार परियोजना के तहत बारह अंकों की एक विशिष्ट पहचान संख्या दी जाती  है।

इस संख्या के माध्यम से भारत के प्रत्येक नागरिक को एक विशेष संख्या वाला कार्ड दिया जाता है।

दोस्तों विदित हो कि हाल ही में जो भी कवायद आंगन से अदालत तक हुई है वह इसी संख्या के कारण हुई है।

क्योंकि यह पहचान संख्या बहुउद्देशीय है।

आज 2018 की स्थिति यह है कि 99% जनता को आधार कार्ड और संख्या दी गई है,

जो एक नहीं सैकड़ो जगह काम आती  है।

आधार के स्थान पर वर्चुअल आईडी 

सरल शब्दों में इसका मतलब यह है कि चूंकि आधार संख्या के साथ-साथ,

लोगों की और भी सभी सूचनाएं आधार कार्ड से जुड़ी होती हैं परिणाम स्वरूप,

कुछ ऐसी घटनाएं देश में देखी गई हैं कि व्यक्तिगत डेटा लीक हो गया है।

इसी के चलते कुछ लोगों का मानना ​​है कि यह आधार कार्ड गलत है।

इससे लोगों की निजता प्रभावित  होती है लेकिन ध्यान रहे,

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर आधार कार्ड रद्द किया गया या फिर 

नहीं  बनवाया  तो तमाम वंचित लोग कैसे राहत पाएंगे?

फिलहाल आधार कार्ड जारी करने वाली संस्था ने,

लोगों के समक्ष एक  पहल की है कि अब जरूरी जगह पर,

आधार नंबर की बजाय आभासी संख्या अर्थात् वर्चुअल आईडी संख्या दी जाएगी,

ताकि किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी से बचा जा सके।

क्या है आधार वर्चुअल आईडी 

आधार वर्चुअल आईडी एक प्रकार की आभासी  संख्या है।

इसमें सभी या संपूर्ण विवरण न होकर केवल कुछ साअंकेतिक विवरण होगा ।

यदि किसी व्यक्ति  को अपने आधार का कुछ विवरण देना है तो आधार संख्या

के स्थान पर   इसी संख्या का उपयोग हो सकता है।

ऐसे जेनरेट करें वी आई डी 

इसके लिए यू आई डी ए आई के होम पेज पर जाना होगा।

अपनी आधार संख्या दर्ज करें उसके बाद सिक्यूरिटी कोड डालें और ओटीपी पर क्लिक करें।

रजिस्टर्ड मोबाइल पर ओटीपी मिलेगा।

इसके बाद नया वी आई डी जेनरेट का विकल्प मिल जाएगा।

जब यह जेनरेटर हो तो मोबाइल पर वर्चुअल आईडी को भेजा जाएगा।

यानी 16 अंक का नंबर आता है और आपका काम पूरा हो जाएगा

धन्यवाद

लेखक: के पी सिंह

04042018 

 

 

 

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