क्या दो टुकड़ों में बंट जाएगा अफ्रीका महाद्वीप ?

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क्या दो टुकड़ों में बंट  जाएगा अफ्रीका महाद्वीप? 

क्या अफ्रीका महाद्वीप दो टुकड़ों में बंट जाएगा ?

यह सवाल सुनकर या पढ़कर  शायद आप चौंक जाएं,

 लेकिन जनाब यह चौंकने का समय नहीं है।

बल्कि यह समय इस विचार को गहराई से समझने का है कि,

क्या वास्तव में भविष्य में दो टुकड़ों में बंट  जाएगा अफ्रीका महाद्वीप?

हमें यह भी  विचार करना है कि क्या दुनिया का नक्शा,

एक बार फिर से बदल सकता है?

दोस्तों इस तरह के और भी बहुत सारे सवाल आपके मन में  हो सकते हैं ,

जिनके जवाब तलाशने के लिए ही यह लेख लिखा गया है।

दोस्तों ,यदि आप को सचमुच इस सवाल का जवाब चाहिए कि,

क्या भविष्य में दो टुकड़ों में बंट  जाएगा अफ्रीका महाद्वीप?

तो बने रहें मेरे साथ ।

मैं आपको इस तरह के सभी प्रश्नों के कारण और निवारण ,

की तरफ ले कर जाना चाहता हूं।

क्या कहते हैं भूगर्भ शास्त्री? 

भूगर्भ शास्त्रियों की मानें तो अफ्रीका महाद्वीप दो टुकड़ों में बंट जाएगा ।

अगले एक करोड़ वर्षों में इन दोनों हिस्सों में एक महासागर आ जाएगा।

 इसकी शुरुआत की तो  प्रक्रिया  भी शुरू हो गई है।

दक्षिण पश्चिम  केन्या में मीलों लम्बी और काफी चौड़ी दरार हो चुकी है।

इतना ही नहीं ,

सबसे खास बात यह है कि लगातार उसका आकार भी बढ़ रहा है।

यहां पर नैरोबी  हाइवे पूरी तरह से तहस-नहस हो चुका है।

और तो और यहां पर,

 भूकंप की गतिविधियां भी तेज हो गई हैं।

फॉल्ट डायना मिक्स  रिसर्च ग्रुप लंदन रायल होलोवे के,

 लुसिया पेरेज डियाज़ ने इसके कारण बताए हैं।

असल में क्या हुआ है? 

क्या दो टुकड़ों में बंट  जाएगा अफ्रीका महाद्वीप?

इस प्रश्न के उत्तर में हमें यह भी जानना जरूरी है कि,

दो टुकड़ों में बदलते दरार के आखिर कारण क्या है?

भूगर्भ शास्त्रियों के अनुसार धरती का लिथो स्यफ़र,

अर्थात् क्रस्ट और मैटल का ऊपरी भाग कई टेक्नॉ टिक प्लेट्स में बंटा होता है।

ये प्लेटें स्थिर नहीं हैं।

अलग अलग गति से ये एक दूसरे की तरफ बढ़ती रहती हैं ।

ये ज्यादा  चलायमान  एसथेनो  स्फेयर के ऊपर सरकती रहती हैं ।

माना जाता है कि एसथेनो सफ़ेयर के बहाव और,

प्लेटों की बाउंडरी से पैदा हुए बल  इन्हें गतिमान बनाए रखते हैं ।

यह ताकतें प्लेटो को सामान्य रूप से चलाती ही नहीं,

बल्कि  कभी-कभी ये प्लेट्स को भी तोड़ देती हैं ।

इस से पृथ्वी में दरार पैदा होती है।

और एक  नई प्लेट बाउंड्री के निर्माण की स्थिति बनती है ।

पूर्वी अफ्रीकी दरार

ईस्ट अफ्रीकन रिफट घाटी उत्तर में लंदन की खाड़ी से लेकर,

दक्षिण में जिम्बाब्वे तक के 3000 किलो के दायरे में फैली है ।

ये अफ्रीकी प्लेट को दो असमान हिस्सों में बांटती है ।

इस वैली के पूर्वी हिस्से यानी इथियोपिया, केन्या तंजानिया में भूगर्भ हलचल तेज है ।

लिहाजा दक्षिण पश्चिम केन्या में धरती में मीलों लम्बी चौड़ी दरार दिखाई देने लगी है। 

पूर्व की घटना

धरती में चौड़ी दरारों का बनना किसी महाद्वीप के विभाजन की शुरुआत होती है ।

अगर यह प्रक्रिया सफल रहती है ।तो इसके फल वहां एक नया महासागर बेसिन तैयार हो जाता है ।

13 करोड़ 80 लाख साल पहले इसी प्रक्रिया के तहत,

दक्षिणी अमेरिका और अफ्रीका महाद्वीप अलग हुए थे ।

आज भी दोनों महाद्वीपों के तटीय क्षेत्रों की समानता इसकी पुष्टि करती है ।

 

बड़े बदलाव

अफ्रीकन रिफट वैली की पूरी सतह ज्वाला चट्टान से बनी है।

इस कारण यहां लिथो परत बेहद पतली हो गई है ।

इसी वजह से इसके दो टुकड़ों में बंटने की सम्भावना बहुत ज्यादा है ।

जब ऐसा होगा तो खाली स्थान में नया महासागर बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है ।

करोड़ों साल बाद समुद्र तल बढ़कर पूरी दरार को अपने में समाहित कर लेगा ।

महासागर का आकार बढेगा और अफ्रीका महाद्वीप छोटा हो जाएगा ।

हार्न आफ अफ्रीका समेत इथियोपिया और सोमालिया के हिस्सों से हिंद महासागर में एक आईलैंड भी बन जाएगा।

धन्यवाद

लेखक: के पी सिंह

03042018

 

2 COMMENTS

  1. सर अच्छी जानकारी लेकर आये हैं |सर आपके कमेंटस का इन्तजार कर रहा हूँ – पुरानी यादें पोस्ट का

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