भारतीय संविधान में अनुच्छेद 370 क्या है?

4
154

भारतीय संविधान में अनुच्छेद 370 क्या है? 

अनुच्छेद 370 क्या है?

यह प्रश्न और इसका उत्तर दोनों चर्चा में हैं

क्योंकि यह वह अनुच्छेद है, जिसके कारण से इस देश में एक संविधान के बावजूद दूसरा संविधान है।

एक ध्वज के बव़ुडद दूसरे ध्वज में है

एक अखिल भारतीय नागरिक के बावजूद दोहरी नागरिकता है

कहने का मतलब इस अनुच्छेद के कारण भारत जैसे स्वतंत्र और संप्रभु देश में भी नहीं,

कई प्रकार की दिक्कतों और परेशानी अपने ही देश के निवासियों के सामने मौजूद हैं।

भारत का संविधान क्या कहता है? 

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 1 में, जम्मू-कश्मीर,

भारत संघ का एक संवैधानिक राज्य है।

इसके सीमाएं भारतीय सीमाओं का एक भाग है

दूसरा परिप्रेक्ष्य में संविधान के भाग 21 के अनुच्छेद 370 में यह एक विशेष राज्य का दर्जा दिया गया है।

इस विशेष राज्य के स्तर के अनुसार भारतीय संविधान के सभी उपबंधों को इस पर लागू नहीं किया जाएगा।

यह भारतीय संघ में नेहरू जी की कृपा से केवल एक ही राज्य है, जिसका अपना अलग संविधान है

संविधान के तहत भाग 21, भारतीय संघ के 12 अन्य राज्य भी विशेष राज्य के स्तर की लाभ उठाने हैं लेकिन बस अल्प मात्रा में

दूसरी ओर जम्मू-कश्मीर विशेष राज्य के दर्जे का जो लाभ उठाता है वह अतुलनीय है ।यहां विशेष ध्यान देने की बात यह है कि यद्यपि जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ 11 और राज्य विशेष दर्जा प्राप्त हैं ,

लेकिन उनमें और जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे में अंतर है ।

ध्यान दें जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा अनुच्छेद 370 से मिला है ,

तो बाकी राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा अनुच्छेद 371 से मिला है ।

अनुच्छेद 371 के द्वारा विशेष राज्य का दर्जा पाने वाले राज्य हैं :

●महाराष्ट्र, गुजरात अनुच्छेद 371

●नागालैंड अनुच्छेद 371 क

●असम 371 ख

●मणिपुर 371 ग

●आंध्रप्रदेश अनुच्छेद 371 घऔर 371 ड•

●सिक्किम अनुच्छेद 371 चीन ●मिजोरम 371 छ

●अरुणाचल 371 ज

●गोवा 371 झ कर्नाटक 371 ञ ।

जम्मू-कश्मीर की ऐतिहासिक कहानी 

ब्रिटिश प्रभुत्व की समाप्ति के साथ ही जम्मू-कश्मीर राज्य 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ ।

प्रारंभ में इसके शासक महाराजा हरि सिंह ने यह फैसलाकिया कि वे भारत या पाकिस्तान में शामिल नहीं होंगे।

लेकिन जब 20 अक्टूबर 1947 को पाकिस्तानी सेना ने,

भेष बदलकर जम्मू-कश्मीर में बुरी नीयत से हमला कर दिया

तो हरि सिंह ने अपने राज्य जम्मू-कश्मीर को भारत में विलय कर दिया ।

26 अक्टूबर 1947 को जम्मू-कश्मीर विलय पत्र में हरि सिंह तथा जवाहर लाल नेहरू ने हस्ताक्षर किए थे ।

इसके अंतर्गत राज्य ने  केवल 3 विषयों रक्षा ,विदेश ,संचार पर अपना अधिकार छोड़ा था ।

भारत की ओर से यह भी कहा गया कि इस राज्य के लोग ,

अपने स्वयं के संविधान द्वारा इस राज्य के आंतरिक संविधान तथा राज्य पर

भारतीय संघ के अधिकार  क्षेत्र की प्रकृति तथा प्रसार को निर्धारित करेंगे ।

तथा राज्य विधान सभा के फैसले तक भारत का संविधान राज्य के संबंध में केवल अंतरिम व्यवस्था कर सकता है ।

इसी आश्वासन के परिणाम में भारत के संविधान में अनुच्छेद 370 सम्मिलित किया गया ।

इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर से संबंधित उपबंध केवल अस्थायी हैं ।

स्थाई नही हैं ।

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 सत्रह  नवंबर 1952 से संचालित है ।

इसके प्रावधान निम्न हैं ।

अनुच्छेद 370 में क्या लिखा है? 

ऐतिहासिक अनुच्छेद 370 में जो लिखा है वह इस प्रकार है:

●अनुच्छेद 238 के उपबंध जम्मू-कश्मीर राज्य में लागू नही होते ।

●मूल संविधान 1950 में जम्मू-कश्मीर राज्य वर्ग ख के अंतर्गत था ।

● राज्यों के पुनर्गठन के बाद 7 वे संवैधानिक संशोधन इसे हटा दिया गया था। ● भारतीय संसद में केवल रक्षा विदेश संचार वित्त में ही कानून बनाने का अधिकार है।

● अन्य कानूनों के अनुसार राज्य सरकार से अनुमोदन करना आवश्यक है

● भारतीय संसद राज्य की सीमाएं कम नहीं हुईं

● तिरंगे के अलावा जम्मू-कश्मीर का अपना अलग झंडा है

● भारत के दूसरे राज्यों के रहने वाले यहां जमीन नहीं खरीद सकते हैं

● जम्मू-कश्मीर के लोगों के पास दोहरी नागरिकता है

यहां पर विधान सभा का कार्यकाल 6 साल का होगा।

● भारत की संविधान में किसी प्रकार का संशोधन जम्मू-कश्मीर लागू नहीं है,

● जब तक कि उसे भारत के राष्ट्रपति द्वारा विस्तारित नहीं किया जाना चाहिए।

● राज्य से संबंधित किसी भी प्रकार की संधि या समझौता,

● भारत सरकार बिना राज्य विधानमंडल की अनुमति स्वतंत्र रूप से कर सकते हैं

 

धन्यवाद

लेखक: के पी सिंह

28032018 

 

●●●

 

 

 

4 COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here