हमें देश भक्त क्यों बनना चाहिए?

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हम देश के भक्त क्यों बनना चाहिए?

हम देश के भक्त क्यों बनना चाहिए

हम देश के भक्त क्यों बनना चाहिए?

अंतर्राष्ट्रीयता के  वर्तमान युग में यह सवाल कि हमें  देश भक्त क्यों  बनना चाहिए बेकार लग रहा है।

कुछ लोग इसे निश्चित ही संकुचित मन की बात कह सकते हैं।

लेकिन जो सचमुच देश भक्ति का मतलब जानते हैं उन्हें पता है कि “विश्वकमान” की दृष्टि से देश भक्ति एक अनिवार्य स्थान है।

इसे हम पंडित मदनमोहन माल्वीय जी के कथन से समझ सकते हैं,

“देश भक्ति का संचार हमारे दिल से स्वस्थ परता को निकालता है फेंटा है।

“हम दूरदर्शी, परमार्थी, सत्यनिष्ठ और दृढता प्रिय आत्माओं की भांति असंख्य कष्ट उठाने भी वही करते हैं जिससे देश का भला हो”

ऐसा शक्ति हमें देश भक्ति के कारण ही प्राप्त होता है।

इसके साथ ही हमें यह भी याद रखना चाहिए कि

विश्व परिवार में देश की इकाई का वही महत्व है जो समाज में व्यक्ति या शरीर में किसी अंग का होता है।

देश भक्ति से पहले एक सवाल

हम देश के भक्त के बनना चाहते हैं, इस बात की पड़ताल करने से पहले आइए कुछ और तथ्यों पर विचार करें।

हम 1 9 47 में आजाद हो गए थे यह सच है

लेकिन विचारणीय यह है कि जिन कारणों से हमें एक हजार साल तक विदेशी दासता ढोने पर मजबूर किया गया था।

क्या वे उन कारणों से आजाद हो गए हैं?

या फिर यह हमारा खुश फहीम सिर्फ है कि हम आजाद हैं?

सच्चे अर्थों में हम कहीं भी भी गुलाम मन की शिकार शिकार तो नहीं हैं? 

देश की मिट्टी से प्यार और देश भक्ति

हम देश के भक्त के बनना चाहते हैं यह महत्वपूर्ण प्रश्न है

लेकिन इससे भी पहले हमें देश की मिट्टी और जमीन से प्यार होना चाहिए यह बेहद जरूरी है।

भारत माता का अंग चरित पर्वत, वन, नदियों, हमें यह सीख देना है कि पर्याप्त हैं

हम देश के लिए बलिदान होने के लिए तत्पर रहना चाहिए

लेकिन असली ताज़जुब यह है कि खुद को शर्म आती है सोच रहा है कि

क्या जो जिम्मेदार हैं वह आज़ादी के इतने साल बाद भी यह अद्भुत जज़बा पैदा हो रहे हैं?

देश की प्रगति और देश भक्ति

हमें देश के भक्त को ऐसा नहीं होना चाहिए  कि यह एक गौरव प्राप्त करने वाला उपाधि है

बल्कि हम देश के भक्त को ऐसा करने के लिए केवल यही एक सत्य है

जो हमें अपनी स्वयं की प्रगति में अद्भुत सहायता करता है

देश के भक्त कौन बन सकता है

हम देश के भक्त क्यों बनना चाहिए? इस प्रश्न के बाद एक बेहद महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि

देश भक्त कौन बन सकता है?

देश के भक्त होने का अर्थ अपनी जान गंवाना नहीं है

बल्कि आप देश के लिए अपनी खेत में अच्छे फसल तैयार करके भी देश के भक्त बन सकते हैं।

अपने देश की प्रगति में रत्तीभर का योगदान भी आप देश के भक्त को बना सकते हैं

इसलिए देश के भक्त देश का हर व्यक्ति बन सकता है

शर्त सिर्फ यह है कि उसे अपनी तन, मन, धन से कोई विचार और आचरण से भी देश के प्रति सहनशीलता दिखाना चाहिए।

देश भक्त न पढो लिखा चरवाहा भी हो सकता है, तो देश के संविधान का शपथ लेने वाले नेता, अधिकारी भी देश के भक्त नहीं बन सकते हैं

यदि आप देश के प्रति जिम्मेदार हैं तो आप देश के भक्त हैं

और यदि देश के प्रति आस्था नहीं तो आप देश के दुश्मन हैं 

देशभक्त और देश के गद्दार कौन?

हम देश के भक्त तो होना चाहिए

लेकिन हम देश के भक्त और गद्दार के निजी लक्षणों से भी परिचित होना चाहिए

आइए इस क्रम में देश के गद्दार और देश के वफादार के लक्षणों को पहचानने के लिए, 

यह लक्षण गद्दारों के हैं

जो भी व्यक्ति अपनी कर्तव्य का पालन नहीं करता वह गद्दार है

यह साफ-साफ इस तरह से समझें।

यदि आप किसान हैं, छात्र हैं, अध्यापक हैं जो भी हैं जहां भी हैं जो भी काम के लिए नियुक्त किए गए हैं

यदि वह काम आप ईमानदारी से नहीं करते तो आप देश के भक्त नहीं हैं

यदि आप को देश की चिन्तता से पहले अपनी निजी स्वस्थ की चिन्ता है

तो आप देश भक्त नहीं हैं

यदि आप को देश के सम्मान के लिए कुछ भी करने में सोचो तो आप देश भक्त कतिई नहीं हैं।

देशभक्त के लक्षण

देश के भक्त वह वह नहीं है जो बार्डर पर जान की बाजी लगाए है

बल्कि देश भक्त वह है, जो अपने तन मन धन से देश में कहीं भी रहना देश के कल्याण की सोचता है।

देश के भक्तों को अपनी कर्तव्य से सच्चाई से पूरा कर रहे हैं

वह मटरगश्ती का भरपूर मौका मिलने के बाद भी सच्चाई से काम पूरा कर रहे हैं, मस्ती नहीं है।

वह कुछ भी करता है पहले मनुष्य और देश के लिए सोचने के लिए लेकिन खुद के लिए कभी नहीं सोचें

निश्चय ही यही है कि हमारे देश के भक्त, देश के लिए नहीं बल्कि अपने लिए होना चाहिए

क्योंकि जब हमारा देश खुशहाल होगा तो हम भी खुश होंगे लेकिन अगर हमारा देश दुखी हो तो

मैं सुखी हो नहीं सकता है।

कुल मिलाकर यह सच है कि हम अपने और अपने आने वाले जन्मों की खुशहाली के लिए देश के भक्त होना ही चाहिए

धन्यवाद

लेखक

के पी सिंह “किर्तीखेड़ा”

05032018 

 

 

 

 

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