मुस्लिम बहु विवाह और हलाला

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मुस्लिम बहुविवाह और हलाला 

 

 

मुस्लिम बहु विवाह और हलाला की हकीकत सच में अगर जानना है 

तो आइए पहले इन के बारे में जानकारी प्राप्त करें कि आखिरकार,

मुस्लिम बहु विवाह और निकाह हलाला किसे कहते हैं? 

 निकाह हलाला 

इस प्रथा में तलाकशुदा महिला को अपने पति के साथ,

फिर से रहने के लिए यानी दोबारा अपने पति के साथ रहने के लिए,

पहले किसी दूसरे पुरुष से एक, दो दिन या कुछ दिन के लिए निकाह करना पड़ता है। 

फिर उसके साथ कुछ दिन गुजारने के बाद उसे,

तलाक देकर फिर से अपने पहले पति से शादी करने की इजाजत मिलती है। 

ध्यान देने की बात यह है कि यह विवाह हलाला ज्यादातर मुल्ला मोलवियों के साथ होता है।

यानी इसके पीछे छिपी आशिकी को समझा जा सकता है ।

वास्तव में यह क्या प्रथा है, और क्या तरीका है इस पर विचार करें तो पता चलता है कि यह

धर्म के नाम पर महज यौन शोषण से ज्यादा कुछ भी नहीं है। 

यह व्यवस्था रत्ती भर भी न तो तर्किक है और न ही किसी तरह से मानवीय है। 

कुल मिलाकर मानव की गरिमा को लूट कर नीचा दिखाने वाली  यह प्रथा बंद होनी चाहिए।

बहुविवाह के बारे में   जानें 

मुस्लिम बहुविवाह एक ऐसी परंपरा है जिसके अनुसार 

किसी भी मुस्लिम पुरुष को चार शादी करने की इजाजत है। 

लेकिन मुस्लिम महिला को सिर्फ एक ही शादी की इजाजत दी गई है। 

मजेदार बात यह है कि जिस 

पवित्र ग्रंथ कुरान की इज्जत पूरी दुनिया करती है

उसमें यह घटिया बातें कतई नहीं हैं। 

यह सब  बनावटी बातें केवल मुसलमान पर्सनल ला उर्फ शैतानों के खास दिमाग में हैं। 

यह फालतू बकवास बातें किसी भी  सामान्य महिला का जीवन नरक बनाने के लिए पर्याप्त हैं । 

पवित्र कुरान में केवल एक विवाह करने की बात कही गई है। 

लेकिन अपनी बदनीयत से मजबूर कुछ मुल्ला मौलवियों ने,

इसे अच्छा खासा औरत के शरीर को नोचने के लिए रामबाण उपाय मान लिया है। 

हालिया ममसला   क्या है? 

अभी आजकल हलाला और बहु ​​विवाह से संबंधित बातें सुप्रीम कोर्ट में बहस का विषय बनी हुई हैं। 

इस बहस के सार तत्व को जानने के लिए पहले हमें यह समझना चाहिए कि,

सुप्रीम कोर्ट इन घटििया प्रथाओं की पड़ताल यूं ही नहीं कर रहा है। 

सुप्रीम कोर्ट में चार लोगों ने एक जनहित याचिका दर्ज की है और 

सुप्रीम कोर्ट ने यह कहने की कोशिश की है कि 

यह प्रथा बराबरी के मौलिक अधिकारों के विरुद्ध है।

अत: इसे समाप्त करने के लिए देश के संविधान को आगे आना चाहिए। 

याचिका में यह भी कहा गया है कि मुस्लिम पर्सनल ला की 1 9 37 धारा 2 को,

समाप्त किया जाना चाहिए। 

क्यों कि यह मन मानी पर आधारित है । 

साथ ही यह संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकारों के विरुद्ध भी है। 

इस याचिका में कहा गया है कि निकह हलाला और बहुविवाह,

शान्ति व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक है

याचिका के अनुसार निर्वाचन हलला पर भी सती प्रथा की तरह रोक लगना चाहिए

शारिआट कानून की धारा 2 अकादमी हलाला और बहु ​​विवाह को मान्यता दी गई है

याचिका में इस बात का उल्लेख किया गया है कि भारतीय दंड संहिता 1860 का प्रावधान सभी भारतीयों को लागू होते हैं।

यह महिला से उसके पति या उसके संबंधियों द्वारा क्रूरता के खिलाफ है

यह नहीं निकला हलाला धारा 375 के तहत बलात्कार है

सुप्रीम कोर्ट ने क्या किया? 

सुप्रीम कोर्ट ने नादह हलाला और बहुविवाह के खिलाफ सुनवाई करते हुए यह संकेत दिया कि,

याचिकाकर्ता ने सही प्रश्न पूछे हैं तो इनका जवाब देना चाहिए

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह खुद पर इस मुद्दे पर,

यह देखने की कोशिश करता है कि यह कितना सही और कितना गलत है

धन्यवाद

KPSINGH 27032018 

 

8 COMMENTS

  1. मुस्लिम महिलाओं के कष्ट निवारण के लिए ओर उनमे जागरूकता लाने के लिए सही वक्त पर आपने लिखा। धन्यवाद।

  2. मुल्ला लोग जो अपने घर गृहस्ती को छोड़ कर मुल्ला बनकर मस्जिदों में रहने लगते हैं और ऐसे वारदात की तलाश में रहते हैं। मेरे तो विचार है कि वो पहले तो पुरुष को भड़का कर तलाक के लिए प्रेरित करते हैं फिर महिला को समझा कर वापिस उसी पुरुष से निकाह करवाने को तैयार करते हैं।

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