मुस्लिम विवाह : एक परिचय

4
73

मुस्लिम विवाह : एक परिचय 

 

मुस्लिम समाज में विवाह को निकाह कहा जाता है ।

मुस्लिम विवाह हिन्दू विवाह की भांति एक संस्कार न होकर एक संविदा या समझौता मात्र है ।

मुस्लिम विवाह का उद्देश्य केवल घर बसाना, संतानोत्पत्ति करना,

एवं उनको वैध घोषित कराना होता है ।

मुस्लिम समाज में ,

अरबी शब्द निकाह से वैवाहिक संगम या शादी मुराद ली जाती है ।

निकाह क्या है विद्वानों की नजर मे

मुस्लिम विवाद या निकाह क्या है?

आइए कुछ विद्वानों की नजर से देखें :

●बैली के अनुसार विवाह एक समझौता है ,जो अपनी संरचना या उद्देश्यों में आनंद का अधिकार ,

और बच्चों के लालन-पालन को शामिल किए हुए है ।

●जस्टिस महमूद के अनुसार विवाद एक नागरिक समझौता है ।

जिसके प्रस्ताव व स्वीकृति के पूरे होने पर सभी अधिकार व जिम्मेदारियां तुरंत और एक साथ लागू हो जाती हैं ।

●डी एफ मुल्ला के अनुसार विवाह को  एक समझौते के तौर पर परिभाषित किया जाता है ।

जिसका उद्देश्य संतानोत्पत्ति व बच्चों को वैधता प्रदान करना है ।

●जंग के अनुसार विवाह यद्यपि आवश्यक रूप से एक समझौता है लेकिन यह भक्ति क्रिया भी है ।

जिसका उद्देश्य समाज के हित में आनंद का अधिकार,

संतानोत्पत्ति और सामाजिक जीवन को नियमित बनाना है ।

मुस्लिम विवाह की शर्तें 

 

सामाजिक समझौता होने के कारण निकाह का ,

कानूनी वैध होना आवश्यक है ।जिसकी कुछ खास शर्तें निम्नलिखित हैं :

विवाह की क्षमता

क्षमता का अर्थ यह है कि जो मुस्लिम पुरुष या स्त्री निकाह करना चाहते हैं ,

उन्हें मानसिक रूप से स्वस्थ होना चाहिए और बलूगत की आयु पूरी कर ली हो ।

इमाम अबू हनीफा के अनुसार यह 19 वर्ष है ।

प्रस्ताव की स्वीकृति

एक वैध निकाह के लिए आवश्यक है कि एक पक्ष प्रस्ताव दे ,

तो दूसरा पक्ष उसे स्वीकार कर ले।

प्रस्ताव व स्वीकृति काजी और दो वकील के सामने होनी चाहिए ।

एक बैठक

प्रस्ताव व स्वीकृति एक ही बैठक में होनी चाहिए ।

अलग अलग बैठक नहीं होना चाहिए ।

कानूनी मान्यता

इसका मतलब है कि विवाह मुस्लिम पर्सनल ला के खिलाफ ,नहीं होना चाहिए ।मुस्लिम ला में निकाह से संबंधित निम्न प्रतिबंध हैं; 

संख्या

एक मुस्लिम एक समय में केवल चार पत्नियां ही रख सकता है ।

वह इससे आगे नहीं जा सकता ।

वहीं एक मुस्लिम महिला एक समय में केवल एक पति ही रख सकती है ।

ध्यान रखें यह नियम कुरान का नहीं है ।यह कानून पर्सनल ला का है ।

 

 

धर्म में अंतर

एक मुस्लिम पुरुष केवल मुस्लिम महिला से या ,

अहले किताब की श्रेणी में आने वाली महिला से ही शादी कर सकता है ।

लेकिन एक मुस्लिम महिला केवल एक मुस्लिम पुरुष से ही शादी कर सकती है 

 

रक्त संबंध

इस्लाम में रक्त संबंध से जुड़े लोगों के बीच विवाह वर्जित है ।

दूध संबंध

एक ही मां से यदि लड़का लड़की ने दूध पिया है तो इनकी शादी नहीं होती ।

दो बहनें

एक मुस्लिम एक समय में दो सगी यानी दूध शरीक बहनों से ,शादी नहीं कर सकता ।

पत्नी की  बहन से शादी तलाक या उसके न रहने पर ही हो सकती है ।

इदत

जो महिला इदत से गुजर रही हो उससे शादी नहीं हो सकती ।

गौरतलब है कि एक मुस्लिम महिला को दूसरा विवाह करने से पहले,

तलाक की स्थिति में तीन माह,

विधवा होने पर चार माह दस रातें,

पति के गुमशुदा होने पर एक साल तक इंतजार करना होता है ।

इसे ही इदत कहते हैं ।

अन्य प्रति बंध भी हैं ,

जैसे मक्का मदीना की यात्रा के दौरान विवाह नही हो सकता ।

गर्भवती महिला चाहे तलाक शुदा हो या विधवा विवाह नहीं कर सकती ,

जब तक बच्चे को जन्म न दे दे ।

धन्यवाद

लेखक केपी सिंह

18032018 

 

4 COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here