लिंगायत की लंगड़ी

5
27

 

लिंगायत की लंगडी  

 

लिंगायत की लंगड़ी समझें या जाने दें

आखिर इसका  क्या मतलब है?

ईश्वर झूठ न बुलाए लेकिन सच यही है कि आपके मन में इस समय ,

कुछ और नहीं बल्कि सिर्फ़ और सिर्फ़ यही सवाल चल रहा है।

कि इस लिंगायत की लंगड़ी को समझें या जाने दें का क्या मतलब है?

मेरी इन लाइनों के प्रिय पाठकों

हम इस लेख में इन्हीं सब सवालों की चर्चा करेंगे ।

आप निश्चिंत रहें बस थोड़ा धैर्य रखिए आपको ,

आपके इस लिंगायत की लंगड़ी से संबंधित सभी सवालों के जवाब मिलेंगे ।

फिर आप भी कहेंगे लिंगायत की लंगडी को समझें या आने दें। 

लिंगायत की कहानी 

लिंगायत हिन्दू धर्म के अंतर्गत शैव मत संबंधी सम्प्रदाय का एक प्राचीन अंग है ।

भारत के प्रमुख धार्मिक सम्प्रदायों में शैव सम्प्रदाय का प्रमुख स्थान है ।

यह सम्प्रदाय शिव को अपना ईश्वर मानकर उनकी आराधना करता है ।

 

शैव धर्म का प्रारंभिक रूप ऋग्वेद में रुद्र की कल्पना में मिलता है ।

प्रारंभ में शैव धर्म के केवल दो ही प्रमुख सम्प्रदाय माने जाते थे ।

पाशुपत तथा आंगमिक ।

फिर इन्हीं से कई उप सम्प्रदाय हुए ।

वामन पुराण में शैव सम्प्रदाय की संख्या 4  बताई गई है ।

🔴पाशुपत🔴कापालिक

🔴कालमुख🔴लिंगायत ।

पाशुपत सम्प्रदाय 

पाशुपत सम्प्रदाय शैवों का सबसे प्राचीन सम्प्रदाय है ।

इसके संस्थापक आचार्य लकुलीश थे ।पाशुपत सम्प्रदाय में अनुयायियों को पंचारथिक कहा गया है ।

पाशुपत सम्प्रदाय का आधार ग्रंथ महेश्वर द्वारा रचित पाशुपत सूत्र है ।

कापालिक सम्प्रदाय 

कापालिक सम्प्रदाय के ईषटदेव भैरव थे ।

इस सम्प्रदाय का प्रमुख केन्द्र शैल नामक स्थान था ।

कालामुख सम्प्रदाय 

कालामुख सम्प्रदाय के अनुयायियों को शिव पुराण में महावृतधर कहा गया है ।

इस सम्प्रदाय के लोग नर कपाल में ही भोजन करते हैं ।

जल और सुरापान भी इसी पात्र में करते हैं ,और शरीर पर चिता की भस्म लगाते हैं ।

लिंगायत सम्प्रदाय 

लिंगायत सम्प्रदाय दक्षिण भारत में काफी प्रचलित है ।

इस सम्प्रदाय के लोग शिव लिंग की उपासना करते हैं ।

तथा शिव लिंग को गले में धारण करते हैं ।

विदित हो कि शिव लिंग उपासना का प्रारंभिक पुरातात्विक साक्ष्य,

 हड़प्पा संस्कृति के अवशेषों में मिलता है।

लिंगायत की लंगड़ी  क्या है? 

आपने देखा कि हिन्दू धर्म के एक भाग के रूप में

लिंगायत हमारे समाज में सैकड़ों सालों से मौजूद रहा है ।

आज उसी लिंगायत की लंगडी की हम चर्चा कर रहे हैं। 

भले ही जीने का ढंग अलग हो लेकिन आप इसका मतलब यह नहीं लगा सकते

कि यह हिन्दू धर्म के अलावा कोई वस्तु है ।

कहने का मतलब यह है कि हमारी भारतीय संस्कृति की यह विशेषता रही है कि हम ,

अनेक होते हुए भी या अनेक प्रतीत  होते हुए भी नियामक संदर्भों में एक ही होते हैं।

लेकिन राजनीति इतनी घटिया हो सकती है यह किसी ने नही सोचा होगा ।

कर्नाटक में कांग्रेस भारत विरोधी अभियान का नेतृत्व करते हुए ,

इस लिंगायत सम्प्रदाय को हिन्दू धर्म से अलग मान्यता देने पर तुली है ।

और यह लगातार सिद्ध करने की गंदी कोशिश कर रही है कि,

किसी धर्म या सम्प्रदाय को अदालत या आयोग द्वारा बनाया या बिगाड़ा जा सकता है ।

लिंगायत की लंगडी को क्या उचित कहा जि सकता है? 

लिंगायत का निष्कर्ष 

यही है लिंगायत की असली लंगड़ी ।

जिसमें कांग्रेस को अपना भविष्य दिखाई देता है ।

घटिया राजनीति की मिसाल उर्फ कांग्रेस यह चाहती है कि,

लोग जब अपने को हिन्दू धर्म का अंग ही मानना छोड़ देंगे ।

तो फिर उनके सारे वोट तथाकथित  गैर हिन्दू या फिर

तथाकथित  सेकुलर की नानी बनाम कांग्रेस को इसका फायदा निश्चित है ।

लिंगायत की लंगडी के बारे में 

आप खुद सोचिए, क्या किसी राज्य दल को यह अधिकार है ,

कि वह किसी सम्प्रदाय को किसी धर्म से अलग करने की साजिश रचने के बाद,

आयोग बनाए और यह घोषणा कर दे कि फलां सम्प्रदाय फलां धर्म का अंग ही नहीं है?

नाश हो राजनीति को इतने घटिया और गंदे अंजाम तक ले जाने वालों की।

हिंदू धर्म के साथ ऐसा अन्याय करने वालों की कभी मनोकामना पूरी न हो। 

 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 31102018

 

 

5 COMMENTS

  1. भारत की कोई भी राजनीतिक दल घिनौनी राजनीति करने से बाज नहीं आते। इसका कारण हम सभी हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here