कौन रोकता है हमें धनवान बनने से?

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कौन रोकता है हमें धनवान बनने से ?

कौन रोकता है हमें धनवान बनने से ?

यह एक ऐसा प्रश्न है, जिसका उत्तर हर व्यक्ति खोजना चाहता है।

कमाल की बात यह है कि इस सवाल का जवाब हर व्यक्ति  देता है,

लेकिन इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि वह जवाब बिल्कुल सत्य हो ।

अक्सर यह देखा गया है कि इस प्रश्न के उत्तर में ज्यादातर  जवाब गलत खोजे गए हैं।

कोई भी इस प्रश्न  के उत्तर को बताता है तो

 वह गलत बताता है ।

 

इसका जवाब जब भी कोई देता है तो कई बार अपनी गरीबी को बताता है।

तो सबसे मजेदार यह है कि कुछ लोग इसे भगवान की इच्छा भी बताते हैं संकोच करते हैं।

कुछ लोग तो ऐसे भी होते हैं कि पैसे के नाम पर ही नाक भुज सिक्का लेते हैं।

यह बात अलग है कि पैसे भी उन्हें चाहिए 

आओ विचार करें

हमें धनवान बनने से कौन रोकता है?

यदि हम इस प्रश्न के उत्तर में वारेन बफेट से पूछते हैं तो उनकी उत्तर दुनिया का सबसे सही जवाब है

वह बताता है कि लोग जितना भी उत्तर देते हैं, वे इस प्रश्न को देते हैं वे सभी गलत हैं

हकीकत यह है कि दुनिया जितने भी उत्तर देते हैं उनमें कमी यह होता है कि वे सभी मङ्गदंत अधिक होते हैं।

क्या कहते हैं वारेन बफेट?

हमें धनवान बनने से कौन रोकता है?

इस सवाल के जवाब में वारेन बफेट ही कहते हैं कि हम से धनी होना कोई और नहीं

बल्कि हमारे विरोधाभासी विचार ही रोकते हैं।

धर्म गुरुओं की सलाह मानकर हम धन की प्रति एक कठोर नकारात्मक छवि बनाई है,

यह उसी का परिणाम है कि हमारे विचार ही धनवान बनने से रोकते हैं।

कोई दूसरा नहीं रोकता है

क्या कहते हैं धर्मगुरु?

हमें धनवान बनने से कौन रोकता है?

इस प्रश्न की गहराई में जाना है तो हम पाते हैं कि हमें धनवान बनने से हमारी ही अपनी सोच को रोकना है,

जो हमारे धर्म गुरुओं ने हमें दिया है।

कमाल बात यह है कि दुनिया के सभी धर्म गुरु धन चाहते हैं,

लेकिन वह हमको धन से दूर रहने की सलाह हर समय देता है

धर्म गुरुओं ने धन के बारे में नकारात्मक छवि तैयार की है इसी कारण से दुनिया के सभी हिस्सों में गरीबी और भूखमरी का आलम है।

क्या कहते हैं मनोवैज्ञानिक?

हमें धनवान बनने से हमारा ही धर्म गुरुओं का विचार किस तरह रोकना है?

इस पर मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि अगर आप धन के बारे में सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं,

तो वह आप के रूप में स्थिति धन की ओर ले जाएगा

और हम अपनी आर्थिक परेशानी से उबरने की नहीं बल्कि आदित्य उससे तालमेल बिठा लेने की स्थिति में ढल जाते हैं।

सचमुच इस कारण है कि धन के बारे में जीन मुल्क में विरोधाभासी विचारों का बोलबाला है, गरीबी अधिक है

चिंतक जोसेफ मर्फी कह क्या है?

चिंतक जोसेफ मर्फी कहते हैं कि गफ़लत न पाल

जिस तरह से ईश्वर आप को सदाचारी रहने का आदेश दिया गया है, वैसे ही धनी होने का भी दिया गया है।

आप अपनी मानसिकता में समृद्ध और धनी होने का विचार रखते हुए धन की चेतना को विकसित कर सकते हैं।

और सच मानिए सिर्फ इतना करने के लिए आप के मध्य मार्ग तय हो जाएंगे

मर्फी आगे कहते हैं कि धन की भावना से धन अर्जित होता है।

हमारे अवचेतन मन एक बैंक की तरह है

यह हर उस चीज को बढ़ाता है जो जमा किया जाता है।

अब चाहे यह विचार धन का हो या फिर गरीबी का

क्या कहते हैं चार्ली चैप्लिन?

गरीबी में अपने बचपन के पास चार्ली चैप्लिन ने कहा था कि,

गरीबी एक मानसिक रोग है।

और यह गरीबी दुश्मन की भावना का न हो पागलपन है।

सच कहें तो धन कमाई से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है धन का दर्शन समझना,

महात्मा गांधी के इस सम्बन्ध में विचार गौर करने योग्य हैं

महात्मा गांधी के विचार क्या हैं?

महात्मा गांधी ने कहा है कि धनिक हमारे समाज के ट्रस्टी हैं।

गांधी जी की बात से जोसेफ मर्फी भी सहमत हैं और वारेन बफेट भी

क्योंकि सच्चाई यह है कि धनी होना तुम्हारा हक है और आपका धन दूसरे का काम आया यह हक धन का है।

निष्कर्ष यह है कि

हमें धनवान बनने से कौन रोकता है?

का जवाब यह है कि

हमें धनवान बनने से रोकना वाला कोई और नहीं,

बल्कि हमारे खुद वही विचार हैं जो हमें धन के प्रति

विरोधाभासी विचार रखने के लिए प्रेरित करना

धन्यवाद

लेखक:

के पी सिंह “किर्तीखेड़ा”

07032018 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

1 COMMENT

  1. धनोपार्जन के साथ हमें उसके सदुपयोग के प्रति भी सचेतन रहना चाहिए।

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