जीतने से जरूरी है जीतने की इच्छा होना

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जीतने से जरूरी है   जीतने की इच्छा   होना 

जीतने से जरूरी है जीतने की इच्छा होना।

आप इस लाइन को पढ कर कहेंगे हद है यार! 

यदि जीतने से भी ज्यादा

महत्वपूर्ण जीतने की इच्छा होती है तो फिर जीतने की जरुरत क्या है?

जीतने की इच्छा तो सभी करते हैं हारने वाले भी और जीतने वाले भी 

फिर भी कोई हारता है तो कोई जीतता है।

ऐसे में यह कैसे संभव है कि आप जीतने की पुरजोर कोशिश

करने की बजाय केवल जीतने की इच्छा करेंं?

दोस्तों, पहली नजर में यह बात कि जीतने से जरूरी है जीतने की इच्छा होना

अतार्किक लगती है लेकिन गहराई से विचार करें तो निहायत ही सत्य प्रतीत होती है।

मगर कैसै?

जीतने से जरूरी है जीतने की इच्छा होना

क्या यह बात सत्प और तार्किक है?इसे आप कुछ यूं समझ लीजिए।

एक लड़का है जिसने अभी अभी गांव के इंटर कालेज से इंटर पास किया है।

उसके बाकी साथियों ने भी वही किया है।

सबसे सब के मां बाप पूछते हैं कि बेटा आगे क्या करोगे?

सब गोल मोल अस्पष्ट जवाब देते हैं लेकिन एक लड़का है जो कहता है कि मैं इलाहाबाद जाऊंगा ।

वहीं से बीए और फिर पीसीएस की तैयारी करूंगा। 

उसके मां बाप सलाह देते हैं कि बेटा हमारे पास इतना

धन नहीं है कि हम तुम्हें इलाहाबाद भेज सकें

इस लिए यहीं घर पर रह कर पढाई कर लो तो ज्यादा अच्छा है।

उस लड़के ने कहा आप लोग चिंता मत करिए मैं वहां ट्यूशन पढा लूंगा।

अंतत:वह इलाहाबाद जाता है और पढाई करता है फिर बहुत मेहनत से एक नौकरी पा जाता है ।

दोस्तों वह नौकरी पीसीएस की होती है ।

आप खुद विचार करें क्या कभी ऐसा हुआ है या हो सकता है कि आप

अचानक कहीं पहुंच जाएं या कुछ पा जाएं वह भी बिना इनके बारे में सोचे समझे ।

कब जरूरत पड़ती है हमें जीतने की इच्छा  की? 

इस तस्वीर को ध्यान से देखिये, इसे कहते हैं गटर की जिंदगी ।

बावजूद इसके एक मां अपनी बिखरी हुई जिंदगी में

अपनी बच्ची से चूल्हा चौका या घरों में झाड़ू पोछा करवाने की बजाय स्कूल भेज रही है ।

क्योंकि इस मां के अंदर तमाम परेशानियों के बावजूद जिंदगी को

पटरी पर लाने की इच्छा कम नहीं हुई बल्कि बखूबी बरकरार है।

सच कहें तो इस वक्त यही जीतने की इच्छा जीत से भी जरूरी होती है।

इस लेख के आरंभ में अगर आपने यह सोचा हो कि मेरे कहने का मतलब

यह है कि आप जीतने का प्रयास न करो सिर्फ जीतने की इच्छा करो सब काम हो जाएगा

तो जरा ठहरिए, आप गलत सोच रहे हैं ।

मेरे कहने का वास्तविक मतलब जीतने के लिए जीत की इच्छा होने से है।

न कि केवल कोरी इच्छा। 

 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 28072018

 

 

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