प्लास्टिक पर नहीं आदतों पर लगाइए प्रतिबंध

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प्लास्टिक पर नहीं आदतों पर लगाइए  प्रतिबंध

प्लास्टिक पर नहीं आदतों पर लगाइए प्रतिबंध ।

क्यों कि कानून और दिल की सच्चाई जुदा जुदा होती है।

आप कुछ भी कर लीजिए,

आप किसी का भी डर दिखा दीजिए

आखिर में होता वही है जो जिसको करना होता है। 

देखा तो यहां तक गया है कि कभी-कभी कानून और बंदूक की गोली भी

जो काम नहीं कर पाती वह मन की सच्ची लगन कर डालती है ।

जो काम बड़े बड़े आह्वान नहीं कर पाते वह काम आपकी आत्मा की पुकार कर डालती है ।

मेरे कहने का कुल जमा मतलब बस इतना ही है कि

आजकल जो उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश आदि में

प्लास्टिक की थैली के स्तर की प्लास्टिक की बनी चीजों पर

मनाही या प्रतिबंध लागू किया गया है।

यह तो एक कानूनी डंडे की कहानी है, जबकि असली और

दमदार कहानी तभी बनती है जिसमे हमारी

आत्मा की सच्ची भागेदारी होती है। 

प्रतिबंध मगर किस पर

प्लास्टिक पर नहीं आदतों पर लगाइए प्रतिबंध का असली मकसद

यह समझाना है कि आप सोच रहे हैं कि बस फरमान 

जारी किया और हो गया काम।

हकीकत यह है कि हमें सिर्फ प्लास्टिक पर नहीं बल्कि हमारी अपनी

आदतों पर प्रतिबंध लगाने की जरूरत है।

हम सुबह से शाम तक की अगर अपनी दैनिक गतिविधि पर

नजर डालेंगे तो हैरान हो जाएंगे ।

आपको खुद ताज्जुब होगा कि हमारी आदतें इस कदर वाहियात हो गई हैं

कि हम आप सब लोग सुबह से शाम तक

केवल धरती अर्थात

प्रकृति को ही नुकसान  पहुंचाने का काम करते रहते हैं। 

माना कि आप मान गए

मान लिया हमने कि आप प्लास्टिक के बैन को पूरी तरह सिरोधार्य करते हैं।

हमने यह भी मान लिया कि आप आजकल घर से सुबह शाम झोला लेकर निकलने लगे हैं,

जिससे आप रत्तीभर भी प्लास्टिक अपने घर बाजार से उठाकर नहीं लाते।

लेकिन क्या आपने सोचा है कि

जब तक आज का आधुनिक आदमी अपनी बिगड़ चुकी आदतों पर

प्रतिबंध नहीं लगाता तब तक प्लास्टिक के एक या दो कितने भी चरणों में

आप प्रतिबंध लगा लो धरती को बहुत फायदा होने वाला नहीं है ।

 🔴सुबह उठकर ही हम खुले में शौच करने जाते हैं

हमें अपनी इस आदत पर भी

प्रतिबंध लगाने की जरूरत है।

🔴हम जंगल से लकड़ी काट कर उसका उपयोग खुले चूल्हे में

घरेलू खाना बनाने में  करते हैं। 

हमें अपनी इस आदत पर भी प्रतिबंध लगाने की जरूरत है।

🔴हम आज भी अपने नदी तालाबों में जानवरों को नहलाते धुलाते हैं।

या फिर अपने पवित्र जल स्रोतों को मरे हुए लोगों की लाशों से भर देते हैं।

हमें अपनी इस आदत पर भी प्रतिबंध लगाने की जरूरत है ।

🔴हमें इस बात का अंदाजा होना चाहिए कि हम हर वर्ष

धरम करम के नाम पर अपने सभी महत्वपूर्ण जल स्रोतों में

गणेश जी और दुर्गा जी की हजारों तरह के रसायनों से लदी फदी

मूर्तियां प्रवाहित करते हैं ।

फल स्वरूप हमारे जल स्रोतों में भरपूर गंदगी और बीमारियां

हमारा हमेशा स्वागत करने को आतुर रहती हैं । 

 

हमारी आदतें कैसी कैसी 

हम प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाकर क्षणिक खुशी हासिल कर सकते हैं।

क्योंकि यह प्रतिबंध सड़क पर सब्जी बेचने वाले या फिर

परचून की दूकान से चीनी बेचने वाले पर तो लागू है लेकिन

उस नेता की फैक्ट्री पर लागू नहीं है

जिसकी फैक्ट्री में बना प्लास्टिक का दोना पत्तल

भारत की रेल प्रणाली में प्रतिदिन लाखों टन प्रयोग किया जाता है।

क्या हमें अपनी इस आदत को सुधारने की जरूरत नहीं है।

हकीकत यह है कि अब वह समय आ गया है जब हमें

सब्जी वाली प्लास्टिक से आगे बढना चाहिए और महज राजनीति के लिए नहीं

बेहतर जिंदगी जीने के लिए अपनी सभी संदिग्ध आदतों पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए । 

क्योंकि 

जिंदगी का गणित राजनीति की गणित से बेहद अलग है।

राजनीति में जब आप हारते हैं तो केवल आपकी जमानत जब्त होती है। 

और वहीं जब आपको, 

जिंदगी से हार मिलती है तो सिर्फ जनानत नहीं पूरी जिंदगी ही जब्त हो जाती है ।

आपकी जिंदगी जब्त न हो बल्कि वह हंसती खेलती रहे

इसके लिए आपको चाहिए कि आप कुछ और

नहीं बल्कि अपनी ही सड़ी गली आदतों को बदल डालिए। 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 05082018

 

7 COMMENTS

  1. आप प्लास्टिक नही अपने आप पर प्रतिबंध लगाने की जानकरी दी मै इस जानकारी से बहुत सहमत हूं
    Thanks 🎂🎂
    🏓🏓🏓🏓🏈🏈🏓🏓🏓🏓
    Sarvesh kumar
    Mo8756078436

  2. वक्त आ गया है, इस चेतावनी को गंभीरता से समझा जाय | नहीं तो हम अपनी मौत को तो बुलावा दे ही रहे हैं साथ ही आने वाली पीढ़ी की जिन्दगी के लिए भी जहर तैयार कर चुके हैं |

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