सोशल मीडिया कितनी सुरक्षित?

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सोशल मीडिया कितनी सुरक्षित? 

सोशल मीडिया कितनी सुरक्षित?

अगर सचमुच आप इस सवाल का जवाब जानना चाहते हैं ,

तो आपको पहले यह जानना होगा कि आखिर हम सोशल मीडिया कहते किसे हैं?

सोशल मीडिया का मतलब 

एक सही सोशल मीडिया की परिभाषा अथवा मायने यह है कि,

“सोशल मीडिया वर्तमान में सूचनाओं के आदान-प्रदान का वह जरिया है ,

जिसे समाज के जरिए अथवा माध्यम से संचालित और काफी हद तक नियंत्रित किया जाता है ।”

यहां ध्यान देने की बात यह है कि कहीं  सोशल मीडिया की,

ताकत ही इसकी कमजोरी है तो कहीं पर इसकी कमजोरी ही इसकी ताकत बन जाती है ।

इसका मतलब यह हुआ कि कभी बड़े बड़े नामचीन व्यक्ति को भी ,

पत्र पत्रिका के दफ्तर के चक्कर लगाने पड़ते थे ।

एक अदद अपने लेख को प्रकाशित कराने के लिए ,

तो आज आलम यह है कि हम पलक झपकते ही,

करोड़ों लोगों को अपनी हर गतिविधि की सूचना भी देने में सक्षम हो गए हैं ।

यह हमारी ताकत है ।

लेकिन जरा ठहरिए यही हमारी कमजोरी भी है ,

क्योंकि इसी तथाकथित ताकत ने हाल के ही समय में ,

अफवाहों का भी बाजार गर्म करने में बहुत कमाल की चुगली खाई है ।

मतलब यह हुआ कि आज सच्चाई यह है कि ,

हमारी ताकत ही हमारी कमजोरी है और हमारी कमजोरी ही हमारी ताकत है ।

सही अर्थों में यही है सोशल मीडिया और उसका यथार्थ ।

सोशल मीडिया कितनी सामाजिक 

“घिरा हुआ हूं मैं हर तरफ से, है आइने में हवा की दहशत “

सोशल मीडिया का एक यथार्थ यह भी है,

इसमें किसी शायर की काँपती हुई रूह की दहशत सी नजर आती है ।

किसी शायर के यह भाव आज काफी हद तक सोशल मीडिया की भूमिका और यथार्थ बताने में सक्षम हैं ।इसे विडम्बना कहें या महज संयोग कि जिस सोशल मीडिया को मात्र सामाजिक शक्ति बनाने की कोशिश की गई थी वह कुछ और भी बनने को आज हर वक्त लालायित सी रहती है ।

सोशल मीडिया का जन्म 

सोशल मीडिया का जन्म विभिन्न व्यक्तियों,

समाजों व विचारों की अभिव्यक्ति के लिए हुआ था ।

जहां लोग भौगोलिक सीमाओं को तोड़कर,

विचारों का सहज आदान-प्रदान कर सकें।

लेकिन सच कुछ और ही सुनाई और दिखाई पड़ता है ।

लगभग हर दिन के अखबार में या समाचारों के किसी जरिए के जरिए,

हमको आपको सबको यह जरूर सुनने को,

देखने को मिलता है कि कहीं न कहीं, कोई न कोई ऐसी घटना जरूर घटती है,

जिससे सोशल मीडिया पर भरोसा असंतुलित हो जाता है ।

 

सोशल मीडिया किसका आइना है? 

सवाल है कि सोशल मीडिया में जो खौफनाक मंजर ,

लगातार अपनी हुकूमत कायम करता जा रहा है वह आखिर किसका आइना है ?

इसका जवाब बिल्कुल साफ है कि हम और हमारे,

दिल दिमाग़ में पैदा होने वाली हर सकारात्मक और नकारात्मक गतिविधि ही ,

वास्तव में सोशल मीडिया की बदल रही प्रवृत्ति का कारण और निवारण है ।

हमारा लालच, हमारा फरेब, हमारी दिमागी विचलन ही,

आज सोशल मीडिया की सच्ची तस्वीर बनती जा रही है ।

निष्कर्ष रूप में ध्यान देने योग्य बात यह है कि साइबर क्राइम और हमारी सोच ,

लगभग एक बनती जा रही है हमें इस प्रवृत्ति को बदलना ही होगा ।

 

धन्यवाद

लेखक : के पी सिंह

07042018 

 

 

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