नोबेल पुरस्कार जीतने वाले भारतीय

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नोबेल पुरस्कार जीतने वाले भारतीय

नोबेल पुरस्कार शांति, साहित्य, अर्थशास्त्र, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान ,

और चिकित्सा शास्त्र के क्षेत्र में दिया जाने वाला विश्व का सर्वोच्च पुरस्कार है ।

इसे किस किस भारतीय व्यक्ति ने अब तक जीता है ,

यह बताने के पहले आइए इसके बारे में थोड़ा और कुछ जान लें।

अल्फ्रेड नोबेल की विरासत

आज हम जिस पुरस्कार को लेकर इतना संवेदनशील हैं,

इस महान पुरस्कार की नींव अल्फ्रेड नोबेल ने रखी थी ।

 आज  पुरस्कार स्वरूप  जो धनराशि दी जाती है यह धनराशि भी उन्हीं की देन है ।

भले ही सैकड़ों साल गुजर गए हों इस हकीकत के लेकिन,

सच यह है कि इस पुरस्कार को जीतने का सपना हर सफल और काबिल व्यक्ति देखता रहता है ।

सोते हुए भी और जगते हुए भी ।

प्रसिद्ध स्वीडिश वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेल ने डायना माइट  का आविष्कार किया था ।

उन्होंने ने ही दिसम्बर 1896 में अपनी मृत्यु से पहले अपनी संपति का एक बड़ा हिस्सा एक ट्रस्ट के लिए सुरक्षित रख दिया था ।

और अपनी इच्छा बताते हुए कहा था कि मैं चाहता हूं कि इस जमा पूंजीके ब्याज से प्रत्येक वर्ष ऐसे व्यक्तियों को पुरस्कृत किया जाए ,

जिन्होने मानव जीवन के कल्याण के लिए कार्य किया हो ।

इस तरह अल्फ्रेड नोबेल की इसी इच्छाशक्ति के अनुसार,

स्वीडिश बैंक में जमा धनराशि से प्रत्येक वर्ष नोबेल फाउंडेशन द्वारा यह पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं ।

नोबेल फाउंडेशन की स्थापना 29 जून 1900 में की गई थी ।

विश्व का पहला नोबेल पुरस्कार 1901 में रेड क्रॉस के संस्थापक ज्या हेनरी डुनाट को,

तथा फ्रेंच पीस सोसाइटी के संस्थापक अध्यक्ष फ्रेडरिक पैसी  को संयुक्त रूप से दिया गया था ।

नोबेल पुरस्कार और भारतीय विजेता

जहां बात भारतीय नागरिकों के नोबेल पुरस्कार विजेता बनने की है ,

तो यह स्थिति काफी हतोत्साहित करने वाली है ।

क्योंकि 118 सालों में भारतीय बमुश्किल 9 बार ही इसके लायक समझे गए हैं ।

काबिले गौर यह भी है कि इन भारतीय लोगों में भी ,

कुछ केवल नागरिकता से भारतीय हैं सचमुच भारतीय नहीं हैं ।

आइए  यहां पर यह जानने की कोशिश करते हैं कि आज तक ,

किन-किन भारतीय लोगों को यह पुरस्कार प्राप्त हुआ है ।

रवीन्द्र नाथ टैगोर

भारत के पहले नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्र नाथ टैगोर हैं ।

इन्हें 1913 में इनकी पुस्तक गीतांजलि के लिए साहित्य का नोबेल पुरस्कार दिया गया था ।

हरगोविंद खुराना

भारतीय मूल के वैज्ञानिक हर गोविंद खुराना को 1968 में ,

चिकित्सा के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया था ।

इन्हें जिस शोध के लिए यह पुरस्कार मिला था उसका विषय था,

एंटीबायोटिक खाने का शरीर पर किस तरह व्यापक असर पड़ता है ।

सीवी रमन

भारत के सुप्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी सी वी रमन को 1930 में ,

भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में यह पुरस्कार प्रदान किया गया था ।

इनके शोध का विषय था प्रकाश के प्रभावों की खोज ।

जिसे रमन इफेक्ट के नाम से भी जाना जाता है ।

मदर टेरेसा

अल्बानिया मूल की मदर टेरेसा 1929 में मिशनरी के रूप में भारत आई थीं ।

यहां उन्होंन गरीब और बीमार लोगों के लिए मिशनरीज आफ चैरिटी नाम से संस्था बनाई ,

और यहीं पर कुष्ठ रोगियों तथा नशे की लत के शिकार लोगों की सेवा करने लगीं थीं ।

निर्मल ह्रदय नामक संस्था भी इन्हीं की थी ।

गौरतलब है कि इन्हें शांति का नोबेल 1979 में दिया गया था ।

 

कैलाश सत्यार्थी

कैलाश सत्यार्थी मूलतः बचपन बचाओ आंदोलन के जरिए बाल अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले हैं ।

2014 में इनके महत्वपूर्ण कार्य को ध्यान में रखते हुए इन्हें शांति का नोबेल पुरस्कार दिया गया था ।

अमर्त्य सेन

 

प्रसिद्ध अर्थ शास्त्री  अमर्त्य सेन  अर्थ शास्त्र के लिए,

नोबेल पुरस्कार जीतने वाले प्रथम एशियाई व्यक्ति हैं ।

इन्होने लोक कल्याणकारी अर्थशास्त्र का प्रतिपादन किया ।

इन्होने वेलफेयर तथा डेवलपमेंट पर किताबें लिखी हैं ।इन्हें वर्ष 1998 में नोबेल पुरस्कार मिला था ।

वैज्ञानिक सुब्रह्मण्यम चंद्र शेखर

प्रसिद्ध खगोल विज्ञानी चंद्रशेखर को ब्लैक होल पर काम करने के लिए,

1983 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ था ।

चंद्रशेखर लिमिट नामक इनका अध्यन पूरी दुनिया में जाना जाता है ।

वेंकट रामन रामाकृष्णन

भारतीय मूल के इस वैज्ञानिक को 2009 में राइबोसोम की ,

संरचना एवं कार्य प्रणाली के क्षेत्र में शोध के लिए रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया है ।

लेखक वीएस नायपाल

त्रिनिदाद में जन्मे नायपाल भारतीय मूल के ब्रिटिश नागरिक हैं ।

इन्हें 2001 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला था ।

धन्यवाद

KPSINGH 17032018

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