सरस्वती सुपर क्लस्टर

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सरस्वती सुपर क्लस्टर 

सरस्वती सुपर क्लस्टर भारतीय वैज्ञानिकों की एक सराहनीय खोज है।

इसके बारे में विस्तार और सुव्यवस्थित ढंग से

ज्यादा जानने के लिए जरूरी है कि पहले हम

निम्नलिखित चंद लाइनों को पूरी गंभीरता से पढें और समझने की कोशिश करें।

अधिकांश वैज्ञानिक यह मानते हैं कि प्रारंभिक

ब्रह्मांड में ऊर्जा एवं पदार्थ का वित असमान था।

घनत्व के आरंभिक भिन्नता के कारण ही गुरुत्वा कर्षण बलों में भिन्नता आई।

इससे पदार्थ का एकत्रण हुआ, जिसने आकाश गंगाओं के विकास को आधा प्रदान किया। 

जरा गौर फरमाएं 

वास्तव में आकाश गंगा ऐसे तारों का समूह है, जो

अपने ही गुरुत्वाकर्षण बल के कारण एक दूसरे से  परस्पर बंधे हुए हैं।

एक आकाश गंगा में एक दूसरे के निकट रहने वाले अरबों तारे होते हैं,

और ब्रह्मांड में ऐसी अरबों आकाश गंगाएं होती हैं।

कुछ आकाश गंगा सर्पिल होती हैं तो कुछ दीर्घ

वृत्ताकार, वहीं कुछ आकाश गंगा बिना किसी आकार की होती हैं।

हमारा सौरमंडल जिस आकाश गंगा का सदस्य है उसका नाम मिल्की वे है।

इसको दुग्ध मेखला भी कहते हैं और इसका खुद का आकार सर्पिल है।

इसमें तारों की संख्या 100 से 400 बिलियन अनुमानित है। 

आकाश गंगाएं और ब्रह्मांड 

आकाश गंगाएं ब्रह्मांड की मूलभूत और सबसे ही खास अंग हैं।

यह अनियमित रूप से इधर-उधर बिखरी होने के बजाय समूह बद्ध होती हैं।

आकाश गंगाओं के इन समूहों को ही क्लस्टर कहते हैं।

कई क्लस्टर पुन:समूह बद्ध होकर सुपर क्लस्टर का निर्माण करते हैं।

मिल्की वे आकाश गंगा दर्जनों अन्य आकाश

गंगाओं के साथ लोकल ग्रुप क्लस्टर में शामिल है,

जो पुन:लानीयाकिया सुपर क्लस्टर ग्रुप का अंग है। 

अब आइए असली बात पर 

असली बात यह है कि साल 2017 में भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान पुणे,

और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान जमशेदपुर तथा

न्यूमेन कालेज तोडुपुजा केरल के वैज्ञानिकों ने

मिलकर एक बहुत बड़ आआकाश गंगा सुपर क् की खोज की है।

🔵इसका नाम दिया गया है सरस्वती क्लस्टर।

🔵यह सरस्वती सुपर क्लस्टर पृथ्वी से 400

करोड़ प्रकाश वर्ष की दूरी पर मीन तारामंडल में है।

🔵इस सुपर क्लस्टर का फैलाव 600 मिलियन प्रकाश वर्ष के दायरे में विस्तारित है।

🔵यह ब्रह्मांड की अब तक की सबसे बड़ी संरचनाओं में एक है।

🔵इस सुपर क्लस्टर में कुल 43 क्लस्टर हैं।

इसका कुल द्रव्यमान 20 मिलियन सूर्यों के बराबर है।

🔵सरस्वती सुपर क्लस्टर की खोज ने वैज्ञानिकों

को ब्रह्मांड के जन्म और विकास से जुड़ी मूल

धारणाओं पर नए सिरे से विचार हेतु विवश किया है। 

🔵वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तरह की खोज

से डार्क मैटर तथा डार्क एनर्जी जैसे अनसुलझे रहस्यों को सुलझाने में मदद मिलेगी। 

 

धन्यवाद

KPSINGH 30052018

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