कैश मैनेजमेंट बिल छोटी अवधि का बड़ा सहारा

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कैश मैनेजमेंट बिल छोटी अवधि का बड़ा सहारा 

     कैश मैनेजमेंट छोटी अवधि का बड़ा सहारा        इसे आप केवल हेडिंग मत समझिए बल्कि यह       एक सच्चाई है ।

यह सच्चाई क्या    है और कैसी है  इसे यदिआआप विस्तार से समझना चाहते हैं तो आप को इस लेख को पूरा पढना चाहिए।

क्योंकि यह लेख खास इसी बात को बताने के लिए लिखा गया है कि कैश मैनेजमेंट बिल क्या है?

दोस्तों आप अगर सचमुच कैश मै बिल :छोटी अवधि का बड़ा सहारा को समझना चाहते हैं तो आपको थोड़ा ठहर कर कुछ सोचना होगा।

सोचना यह होगा कि कभी कभी सरकार को भी पैसे की जरूरत पड़ती है जिसे वह कई तरीकों से पूरा करती है।

लेकिन चूंकि यह जरूरत लंबी अवधि के लिए ही होती है इस सवाल यहां पर यह उठता है कि अगर सरकार को केवल छोटी अवधि के लिए धन चाहिए तब वह क्या करती है? 

कैश मैनेजमेंट बिल की कहानी 

कभी कभी ऐसा भी होता है कि किसी सयम या

किसी महीने में टैक्स,

एडवांस टैक्स का संग्रह सरकार की अपेक्षा के अनुरूप नहीं होता।

ऐसी स्थिति में सरकार उस महीने विकास कार्यों

पर पहले से निर्धारित खर्च की भरपाई के लिए सरकार थोड़े समय के लिए कैश मैनेजमेंट बिल के जरिए उधार लेती है।

आपको अगर कैश मैनेजमेंट बिल को और ठीक

से समझना है तो आप इस बात को समझिए कि कैश मैनेजमेंट बिल बिलकुल टी बिल की तरह होते हैं।

फर्क बस इतना ही कहा जा सकता है कि इनकी यानी कैश मैनेजमेंट बिल की कुल वैधानिक अवधि 91 दिन होती है।

यानी कैश मैनेजमेंट बिल 91 दिन से ज्यादा के लिए जारी नहीं किए जाते। 

इसका उदाहरण     देखिए 

मान लीजिए इस चालू वित्त वर्ष में सरकार ने 16 जून को 25 दिन की परिपक्वता अवधि का कैश मैनेजमेंट बिल जारी कर के,

10 हजार करोड़ रुपए उधार लिए।

इसी तरह 20 जून को 40 दिन 25 जून को 35 दिन की अवधि के लिए कैश मैनेजमेंट बिल जारी किए।

क्योंकि सरकार को यह पता है कि कमजोर कर संग्रह संभावित है। 

सीएमबी और टी बिल 

टी बिल और कैश मैनेजमेंट बिल में यह समानता है कि इन दोनों में ब्याज नहीं दिया जाता।

बल्कि ये डिस्काउंट पर बेचे जाते हैं।

एक बात और है कि इसे यानी कैश मैनेजमेंट बिल को फेस वैल्यू पर भुनाया जा सकता है । डिस्काउंट मूल्य और फेस वैल्यू के बीच जो अंतर होता है वह निवेशक के लिए ब्याज की तरह होता है ।

मान लीजिए कैश मैनेजमेंट बिल का अंकित मूल्य 100 रुपए है और उसे 98.20 में बेचा जा सकता है तो इस पर निवेशकों को 1. 80 का फायदा होगा।

भारत में कैश मैनेजमेंट बिल के जरिए थोड़े समय के लिए धन राशि को उधार लेने की शुरुआत पहली बार 2010 में हुई थी।

तब सरकार ने बैंकिंग क्षेत्र के नियामक आर बी आई से बात करके यह नया आर्थिक प्रयोग प्रारंभ किया था।

 

ऐसा केवल भारत में ही नहीं होता बल्कि हर बड़े देश में भी ऐसा होता है। 

 

धन्यवाद

KPSINGH17072018

 

 

 

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